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करियर की फिक्र जिंदगी पर लगा सकती है ब्रेक
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 30 Dec 2013 12:03 PM IST
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हार्ट अटैक के चांसेज ज्यादा
यह फिक्र आपके दिल पर भारी पड़ सकती है। हाइपरटेंसिव होने से दिल की बीमारियां घेर सकती हैं जिसका असर हार्ट अटैक के तौर पर नजर आ सकता है। सीएमआई और अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित निशुल्क हृदय रोग परीक्षण शिविर में ऐसे तथ्य सामने आए।
सीएमआई के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिमेष अग्रवाल ने रविवार को शिविर में लोगों की जांच की। शिविर में 22 से 35 साल उम्र के लोगों में सबसे अधिक संख्या डॉक्टर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव आदि प्रोफेशनल और बिजनेसमैन की रही।
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कॅरियर और बिजनेस की फ्रिक में कम उम्र में ही ये लोग हाइपरटेंसिव हो गए हैं। जांच में कई का ब्लडप्रेशर बढ़ा हुआ निकला। कुछ युवाओं का कोलेस्ट्रॉल भी अधिक बढ़ा हुआ था।
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लाइफ स्टाइल में बदलाव जरूरी
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इस उम्र में हाइपरटेंशन है और लाइफ स्टाइल में बदलाव न किया गया तो तय है कि 50 का होते-होते उन्हें हृदय रोग घेर लेगा। शिविर में आए लोगों को हृदय रोग से बचाव के तरीके बताए गए।
शिविर में कुछ ऐसे भी थे जिन्हें पहली बार पता चला कि उन्हें हाई ब्लडप्रेशर और हाई ब्लड शुगर की दिक्कत है। शिविर में ईसीजी, ब्लडप्रेशर, ब्लड शुगर की निशुल्क जांच की गई। इस मौके पर डा. आरके जैन, डॉ. महेश कुड़ियाल मौजूद रहे।
सर्दी से दिमाग की नसों में जम रहा खून
हाई ब्लडप्रेशर के रोगी दिन के चौबीस घंटों में आठ घंटे अधिक सतर्क रहें। रात 12 बजे से सुबह आठ बजे के बीच ठंड का हमला रोगी के दिमाग पर हो सकता है। दून अस्पताल में इन दिनों हर रोज औसत पांच रोगी ब्रेन अटैक के आ रहे हैं।
90 प्रतिशत रोगियों पर अटैक सुबह के वक्त पड़ा था। सात रोगी कोमा में आए थे, जिनमें से चार को हायर सेंटर भेजा गया जबकि एक की मौत हो गई। दून अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. महावीर सिंह ने बताया कि रात में गलन अधिक होती है।
ठंड ज्यादा होने से प्लेटलेट्स का जमाव बढ़ता है और खून गाढ़ा हो जाता है। इससे दिमाग की नस लीक कर जाती है।
इसके अलावा सर्दी में मांसपेशियों और रक्त वाहिनियों में संकुचन से खून का दबाव बढ़ जाता है। ब्लडप्रेशर बढ़ने से रोगी बेहोश हो जाता है। ब्लड प्रेशर बढ़ा रहा तो गुर्दे फेल हो जाते हैं।
दून में सिर्फ चार वेंटीलेटर
ब्रेन अटैक के रोगी को इंटेंसिव केयर में रखा जाता है। हालत बिगड़ने पर रोगी को फौरन वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है, लेकिन दून अस्पताल में सिर्फ चार वेंटीलेटर हैं।
सीनियर फिजिशियन डॉ. एसडी जोशी ने बताया कि जिस रोगी को ऑक्सीजन की जरूरत होती है उसे आईसीयू में वेंटीलेटर पर रखा जाता है।