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भविष्य के हिमालय की आज ही दिख जाएगी झलक
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 19 Dec 2016 10:26 AM IST
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हिमालयी क्षेत्र के लैंडस्केप पर आने वाले दिनों में जलवायु परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ेगा? इसकी झलक आज ही दिखने को मिल जाएगी।
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इसके साथ ही हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ रहे तापमान से वन्य जीवों के वासस्थलों में आ रहे बदलाव का भी पता चल जाएगा। भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्युआईआई) में देश की पहली ‘लैंडस्केप इकोलोजी एंड विजियुलाइजेशन’ लैब स्थापित की गई है। साथ ही विज्ञानियों की टीमें हिमालयी इको सिस्टम के अध्ययन में जुट गई हैं। पहले चरण में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम को लिया गया है।
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जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में लैंडस्केप तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में नए सुरक्षित स्थानों पर आवासीय क्षेत्र शिफ्ट करने की विज्ञानियों ने सलाह दी है। तापमान बढ़ने से वनस्पतियों और वन्य जीवों के वासस्थलों में तेजी से परिवर्तन हो रहा है।
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इस बदलाव के दौर में हिमालयी क्षेत्र में विकास मैप तैयार करने में लैंडस्केप इकोलोजी एंड विजुलाइजेशन से आसानी हो जाएगी। केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डब्ल्यूआईआई हिमालयी इको सिस्टम की रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा है। मंत्रालय ने प्रोजेक्ट के लिए 12 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर दिया है।
थ्री डाइमेंशनल इमेज पर आने वाले दिनों की तस्वीर की झलक तो दिखेगी ही, इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन का सूक्ष्म स्तर पर अध्ययन यह भी बता देगा कि कीट संसार से लेकर बड़े वन्य जीवों के वासस्थल के किन नए स्थलों पर आबाद होंगे। जीआईएस डाटाबेस को विज्ञानियों की ग्राउंड रिपोर्ट के साथ जोड़ा जाएगा।
20 विज्ञानियों की टीम को अध्ययन की जिम्मेदारी दे दी गई है। इस प्रोजेक्ट में विकास का रोड मैप बनाने में मदद मिलेगी। जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर आने वाले दिनों के लैंडस्केप थ्री डाइमेंशनल झलक देखने को मिलेगी। इससे लैंडस्केप में स्थापित की जाने वाली परियोजना का फायदा और नुकसान समझने में आसानी होगी।
- डा. वीबी माथुर, निदेशक भारतीय वन्य जीव संस्थान