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राज्य को बड़ा दर्द दे गई मनोरमा की पुरानी चोट

Thu, 19 Feb 2015 11:09 AM IST
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 19 Feb 2015 11:09 AM IST
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years ago deadly injury of manorama sharma.

राज्यसभा सांसद और देहरादून की पूर्व मेयर मनोरमा डोबरियाल शर्मा को सशक्त महिला आंदोलनकारी के रूप में भी याद किया जाएगा। करीब 20 साल पहले 1994 में पृथक उत्तराखंड के लिए आंदोलन के दौरान उनके पेट पर लगी पुलिसिया लाठी उनकी लिए जानलेवा साबित हुई।

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लीवर में आई चोट आगे चलकर ट्यूमर बन गया और लीवर प्रत्यारोपण सफल न होने पर उनकी जान चली गई। सरकारी तंत्र की लापरवाही और चिन्हीकरण की जटिल प्रक्रिया से उन्हें जिंदा रहते चिन्हित राज्य आंदोलनकारी का दर्जा नहीं मिल सका।
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1994 में राज्य निर्माण आंदोलन से जुड़े लोगों ने राज्य के सभी चुनावों को बहिष्कार किया था। उसी दौरान गन्ना समिति के चुनाव कराए गए। जिसके विरोध में अन्य आंदोलनकारियों के साथ मनोरमा शर्मा भी शामिल हुईं। विरोध तेज होता देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।

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पेट में लगी लाठी बन गई जानलेवा

years ago deadly injury of manorama sharma.

बताते हैं उस दौरान मनोरमा के साथ एक अन्य महिला आंदोलनकारी कौशल्या डबराल सड़क पर गिर पड़ी। पुलिस ने उस दौरान बर्बरता से लाठी कोंचकर महिलाओं को उठाना चाहा। तभी एक लाठी मनोरमा के पेट में भी लगी। उसी दौरान कौशल्या को भी पेट में चोट आई जिनकी कुछ साल पहले ही मौत हो चुकी है।

मनोरमा का उस दौरान भी इलाज हुआ। वक्त गुजरने के साथ पेट में दर्द की शिकायत रही लेकिन सब कुछ यूं ही चलता रहा। अभी हाल राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें तकलीफ बढ़ गई।

दिल्ली में रहने के कारण उन्होंने गुड़गांव के निजी अस्पताल में जांच पड़ताल कराई तो ट्यूमर की बात सामने आई जिससे उनका लीवर बुरी तरह प्रभावित हो चुका था।

इनका है कहना
उन्होंने पृथक राज्य के लिए अहम भूमिका निभाई और समय दिया। वे भी देहरादून के तमाम आंदोलनकारियों में शामिल रही हैं जिन्हें अभी तक चिन्हित आंदोलनकारियों की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
-धीरेंद्र प्रताप, उपाध्यक्ष, राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद

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