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Year Ender 2021: देहरादून के कैंट बोर्ड गढ़ी में बजट के अभाव में आम आदमी की उम्मीद रह गई अधूरी
Fri, 31 Dec 2021 01:19 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
हरीश कंडारी, अमर उजाला, देहरादून
हरीश कंडारी, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 31 Dec 2021 01:19 PM IST
सार
गढ़ी-डाकरा व प्रेमनगर के कैंट एरिया में बजट के अभाव में पिछले एक साल से विकास कार्य धीमी गति से चल रहे हैं, यूं कहें ठप पड़े हैं तो कोई अतिशियोक्ति नहीं।
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- फोटो : pixabay
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विस्तार
आमदनी अठ्ठन्नी और खर्चा रुपया। छावनी परिषद देहरादून की स्थिति कुछ ऐसी ही है। यहां एक बड़ी आबादी बसती है, जिनके लिए तमाम संसाधनों की दरकार है, लेकिन इनकी उम्मीद पर आर्थिक तंगी अड़ंगा डाल रही है।
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ग्रांट इन एड पर लगातार कैंची चल रही है और आय के भी साधन सीमित हैं। स्थिति यह कि बोर्ड अपना खर्च भी बमुश्किल चला पा रहा है। ऐसे में विकास कार्यों की क्या स्थिति होगी सहज ही अंजादा लगाया जा सकता है। पिछले दो सालों से कैंट में बजट के अभाव में आम आदमी की विकास की उम्मीद अधूरी रही।
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गढ़ी-डाकरा व प्रेमनगर के कैंट एरिया में बजट के अभाव में पिछले एक साल से विकास कार्य धीमी गति से चल रहे हैं या यूं कहें कि ठप पड़े हैं तो कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी। कैंट बोर्ड को विकास कार्यों के साथ ही अन्य खर्चों के लिए हर साल करोड़ों रुपये की दरकार है। इस संबंध में हर बार प्रस्ताव भी भेजा जाता है, पर बजट सिर्फ नामभर का मिलता है। बजट न होने के कारण यहां सभी वार्डों में सड़क, सफाई, नाली निर्माण, भवनों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट, पेयजल सहित विभिन्न कार्य ठप पड़े हुए हैं। बोर्ड बैठकों में कईं विकास कार्यों के प्रस्ताव पारित किए जाते हैं, लेकिन बजट न होने के कारण इनमें से भी कई कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।
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फिलहाल कैंट बोर्डों में वैरी बोर्ड काम कर रहा है। कभी भी चुनाव का बिगुल फुंक सकता है। विकास कार्य ठप होने के कारण सभासद चिंतित हैं। चूंकि यहां ज्यादातर विकास कार्य ग्रांट इन एड पर निर्भर हैं, पर इसमें भी लगातार कटौती हुई है। रक्षा मंत्रालय काफी पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि बोर्ड स्वयं की आय बढ़ाएं। जबकि आय के संसाधन सीमित हैं।
हाल यह है कि वर्तमान स्थिति में विकास कार्यों की भी वरियता तय करनी पड़ती है। बात जहां किसी बड़ी योजना की आती है, तो बजट के लिए बोर्ड को रक्षा विभाग का ही मुंह ताकना पड़ता है। अपनी आय के नाम पर टैक्स ही एकमात्र जरिया है। लेकिन, उसे बढ़ाए जाने की एक सीमा है। जितनी आमदनी फिलवक्त हो रही है, उससे कर्मचारियों की तनख्वाह, रखरखाव व अन्य खर्च ही निकल जाएं तो काफी है।
बजट के कारण यह कार्य रहे प्रभावित
- वार्डों में सड़क, सफाई, नाली निर्मण, भवनों की मरम्मत, पेयजल
- सीवर लाइन और सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण
- स्मार्ट वेंडिंग जोनों का निर्माण
- ट्रंचिंग ग्राउंडों में सुरक्षा दीवार का निर्माण
- कैंट अस्पताल में दवाईयों को टोटा
-स्कूलों भवनों में कक्षों का निर्माण
- प्रेमनगर में सामुदायिक भवन का निर्माण
- पार्कों का सौंदर्यीकरण
वैरी बोर्ड के कारण भी जनता के काम अटके
कैंट बोर्डों का कार्यकाल मार्च 2021 में खत्म हो चुका है। तब से लेकर अभी तक कैंट बोर्डों में वैरी बोर्ड काम कर रहा है। इससे भी जनता के काम प्रभावित हो रहे हैं। वैरी बोर्ड बनने के बाद कैंट बोर्ड की बैठक तक नहीं हो पा रहा है। बोर्ड बैठकों में विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार होते हैं। लेकिन बैठक न होने से जनता से जुड़े मुद्दे इस समय गौण हैं।
कैंट बोर्ड में पिछले एक साल से विकास के कार्य ठप पड़े हुए हैं। कई ऐसे महत्वपूर्ण कार्य थे जो बजट न होने के कारण ठप पड़े हैं। बरसात में तमाम नाले, नालियां, सड़कें, पार्क आदि की दशा खराब हो गई थी। जो अभी तक नहीं बन पाए हैं। इसके अलावा पेयजल लाइनें, स्कूलों में कक्षों का निर्माण, सामुदायिक केंद्रों का निर्माण आदि होना था जो अभी तक नहीं हो पाए हैं।
- विनोद पंवार, सदस्य वैरी बोर्ड