फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   year ender 2020 : this year Uttarakhand new excise policy was in news

Year Ender 2020 : नई नीति आने के बाद पूरे साल चर्चाओं में रहा उत्तराखंड का आबकारी महकमा

Thu, 31 Dec 2020 03:10 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 31 Dec 2020 03:10 PM IST
विज्ञापन
year ender 2020 :  this year Uttarakhand new excise policy was in news
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

इस साल नई आबकारी नीति आने के बाद से आबकारी महकमा लगातार चर्चाओं में रहा। पहले दुकानों की आवंटन प्रक्रिया में बदलाव हुआ, लेकिन करीब 150 दुकानों के लिए ठेकेदार ही नहीं मिले। इसके बाद कोविड के कारण लॉकडाउन रहा तो ठेकेदारों ने ठेके खोलने से ही इनकार कर दिया। नतीजतन शासन को ठेकेदारों की मांगों के सामने झुकना पड़ा और लॉकडाउन के समय राजस्व में छूट दी गई। मौजूदा समय में विभाग लक्ष्य से काफी पीछे है और करीब 100 दुकानें बंद हैं। 

विज्ञापन


दरअसल, इस साल आबकारी नीति को इस बात को लेकर मंजूरी दी गई थी कि प्रदेश में शराब यूपी से सस्ती रहेगी। इसके लिए इस साल राजस्व लक्ष्य को भी 3200 से बढ़ाकर 3600 करोड़ रुपये कर दिया गया। पहले आवंटन ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत होता था, लेकिन इस बार यह वर्षों पुरानी लॉटरी से किया गया।
विज्ञापन


बावजूद इसके मार्च में महकमे को कुल 659 दुकानों में से 132 दुकानों का खरीदार ही नहीं मिला। प्रक्रिया आगे बढ़ती इससे पहले ही कोविड की मार पड़ गई और सबकुछ बंद हो गया। करीब 40 दिन बाद दुकानें खोलकर महकमा एक बार फिर चर्चाओं में आ गया, लेकिन शराब की कमी के कारण दुकानदारों ने ठेके चलाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। 
विज्ञापन
विज्ञापन


माल हरियाणा व अन्य बॉटलिंग प्लांट वाले राज्यों में फंसा रहा। लिहाजा, दुकानदारों ने मिलीभगत के बाद पुराने माल को ही बेचना शुरू किया। इसके बाद कई कार्रवाईयां भी हुईं, मगर कोई हल नहीं निकला। दुकानदारों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए। ऐसे में विभाग और शासन को उनकी मांगों को मानते हुए 40 दिन का राजस्व माफ करना पड़ा। 

शराब बिक्री राजस्व में काफी पीछे महकमा 

शराब बिक्री से मिलने वाले राजस्व में महकमा काफी पीछे चल रहा है। अभी तक लगभग 1500 करोड़ रुपये के आसपास ही राजस्व मिल पाया है। जबकि, अब केवल तीन माह ही शेष रह गए हैं। यही नहीं अब भी 98 दुकानें ऐसी हैं, जिनके लिए कोई खरीदार नहीं मिल पाया। 

दुकानों को दो भागों मेेें बेचने पर भी हुआ विवाद 

दुकानों का जब पूरी तरह आवंटन नहीं हुआ तो विभाग ने दुकानों को दो भागों में तोड़कर बेचने का निर्णय लिया। इस बात का भी काफी विवाद हुआ। कुछ दुकानें तोड़कर यानी राजस्व लक्ष्य आधा-आधा कर बेची गईं। बावजूद इसके विभाग कुल रह गई 132 दुकानों में से 34 को ही बेच पाया। 

अब तक नहीं हटा कोविड सेस 

दरअसल, प्रदेश वर्ग के हिसाब से 500 रुपये तक कोविड सेस प्रति बोतल लगाया गया। इसके पीछे आशय था राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी और कोविड के समय में सरकार को भी सहारा मिल सकेगा। लगभग सभी प्रदेशों में कोविड सेस शराब से हट चुका है। लेकिन, उत्तराखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहां पर अब तक कोविड सेस को नहीं हटाया गया है। 


विभाग लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरे प्रयास कर रहा है। शुरूआत में लॉकडाउन के कारण झटका लगा था, लेकिन फिलहाल हालात काबू में हैं। जहां तक दुकानों के आवंटन की बात है तो सारी प्रक्रिया नियमों को ध्यान में रखकर की गई थी।
- सुशील कुमार, आबकारी आयुक्त उत्तराखंड


 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed