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Juhi Babbar: विद लव आपकी सैयारा...से दर्शकों का दिल जीतेंगी जूही, अमर उजाला की 75वीं वर्षगांठ पर पहुंचीं दून

Mon, 17 Apr 2023 03:12 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 17 Apr 2023 03:12 PM IST
सार

अमर उजाला की 75वीं वर्षगांठ पर आज लेखक एवं निर्देशक जूही बब्बर सोनी का नाटक 'विद लव आपकी सैयारा' का मंचन होगा। जूही ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उत्तराखंड के लोकल थियेटर और कलाकार को बढ़ावा देना चाहिए।

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Writer and director Juhi Babbar Soni reached Amar Ujala Dehradun Interview Bollywood Entertainment
लेखक एवं निर्देशक जूही बब्बर पहुंची अमर उजाला दून स्टूडियो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लेखक एवं निर्देशक जूही बब्बर सोनी का देहरादून से खास लगाव है। वह कहती हैं कि उनके पति अनूप सोनी के मामा और मौसी का घर देहरादून में है। इस तरह देहरादून उनकी ससुराल भी है। जूही ने कहा कि उत्तराखंड में भी लोकल थिएटर को बढ़ावा मिलना चाहिए और अमर उजाला ने इस पहल को आगे बढ़ाया है।

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बता दें कि अमर उजाला अपनी 75वीं वर्षगांठ पर 17 अप्रैल को गौरव दिवस मना रहा है। इस मौके पर जूही बब्बर सोनी के हिंदी नाटक 'विद लव आपकी सैयारा' का मंचन होगा। इसके लिए देहरादून पहुंचीं जूही ने अमर उजाला से खास बातचीत की। पेश है कुछ अंश...

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विद लव आपकी सैयारा की कहानी लिखने की प्रेरणा कहां से मिली?

- इसकी कहानी मैंने कोरोना काल में लिखी। इसमें ऐसी बहुत सी बातें हैं जो सामाजिक और राजनीतिक तौर पर प्रभाव डालती हैं। इसका जो मुख्य किरदार है, वह मेरी मां का आइडिया था। इस नाटक को मैंने ऑनलाइन मंचन के लिए तैयार किया, लेकिन दर्शकों ने पसंद किया तो नाटक को बढ़ाकर डेढ़ घंटे का किया। पात्र और कहानी भी बढ़ानी पड़ी।

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यह कहानी एक मुस्लिम महिला की है। उसका प्रेम विवाह होता है। यह कहानी क्या महिलाओं को जोड़ती है?

सैयारा में मुस्लिम महिला की कहानी है लेकिन यह धर्म पर आधारित नाटक नहीं है। यह नाटक हर एक शख्स को जोड़ता है चाहे वह किसी भी उम्र का हो। यह कहानी घरेलू महिलाओं को भी जोड़ती है। यही वजह है कि यह नाटक इतना सफल हो पाया है कि एक साल में हिंदी थियेटर में इसके 50 से अधिक शो हो चुके हैं।

- फिल्मों में परिवारवाद की बात ज्यादा होती है। इस बारे में आपका क्या कहना है?- हर किसी के जीवन में परिवार का बहुत महत्व है और शायद सैयारा के माध्यम से हम लोगों को यह संदेश दे पाए हैं कि परिवार का जीवन में कितना महत्व होता है। एक लड़की की शादीशुदा जिंदगी में अगर कोई परेशानी आती है तो परिवार पहले यही चाहता है कि वह ससुराल में रहे। लेकिन, सैयारा के परिवार ने उसका साथ दिया।

नया नाटक कौन सा लिखेंगी, किसमें आपको लोग देख पाएंगे?

- सैयारा को दर्शकों का इतना प्यार मिला है कि आगे कुछ करने से पहले घबराहट सी होती है। क्योंकि, दर्शकों को मुझसे बहुत उम्मीदें हैं। मेरा बेटा दस साल का हो गया है। करीब नौ साल बाद मैंने यह नाटक किया है। मैंने यह फैसला किया था कि जब तक बेटा थोड़ा बड़ा नहीं हो जाता, काम कम करूंगी। एक-दो आइडिया पर अभी काम चल रहा है।

- आप पहले फिल्में करती थीं, बीच में थोड़ा ब्रेक लिया। अब आपकी नई फिल्म फराज चर्चा में है। क्या कहना चाहेंगी?- मैंने पहली फिल्म 2004 में सोनू निगम के साथ थी। हालांकि, फिल्म ज्यादा चली नहीं। इसके बाद एक पंजाबी फिल्म जिमी शेरगिल के साथ की। फिल्म बहुत चली थी। इसके बाद काम मिल रहा था लेकिन ऐसा काम नहीं था जिसे करके मुझे बहुत खुशी मिलती। इसलिए मैंने खुद को रंगमंच की ओर मोड़ लिया। 12 साल बाद मैने अय्यारी फिल्म की। इसके बाद फराज की। फराज एक छोटी और सीरियस फिल्म है। दो हफ्ते तक नेटफ्लिक्स पर नंबर एक पर रही। इसके लिए हंसल मेहता और दर्शकों को धन्यवाद देती हूं।

- आपके पति अनूप सोनी का क्राइम पेट्रोल शो बहुत पॉपुलर है। क्या आप इस तरह के जागरूकता वाले शो करेंगी?

 जरूर, मैं भी इस तरह के शो करना चाहूंगी। अगर ऐसा कोई मौका मिलता है, जिससे समाज में जागरूकता बढ़े।

- देहरादून कितने समय के बाद आना हुआ?

- बहुत समय के बाद यहां आई हूं। अपनी पहली फिल्म से पहले मम्मी के साथ आई थी। देहरादून में अनूप की मौसी यानी मेरी मौसी सास और अनूप के मामा यानी मेरे मामा ससुर रहते हैं। अनूप का ननिहाल देहरादून ही है। एक तरह से देहरादून मेरी ससुराल है। मामा और मौसी बुलाते रहते हैं लेकिन आना नहीं हो पाता है।

अमर उजाला अपनी 75वीं वर्षगांठ पर गौरव दिवस मना रहा है। इस मौके पर पाठकों को क्या संदेश देंगी?

- अमर उजाला एक विश्वसनीय अखबार है और इतने लंबे सफर से मीडिया जगत में बना हुआ है। वक्त के साथ चलने वाला अखबार है। मुझे बहुत खुशी है कि इस मौके पर अमर उजाला ने मुझे, मेरे नाटक और मेरी टीम को आमंत्रित किया है।

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- थियेटर को लेकर उत्तराखंड में कुछ और करने की जरूरत है?

- मैंने सुना है यहां पर लोकल थियेटर अच्छा होता है। यहां के लोकल थियेटर और लोकल आर्टिस्ट को बढ़ावा देना चाहिए। जिस तरह से अमर उजाला ने रंगमंच को बढ़ावा देकर इस कार्यक्रम का आयोजन किया है, उसी तरह से लोकल थिएटर को आगे बढ़ाना चाहिए।

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