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OMG: यहां दिखा इतना बड़ा सांप जिसकी लंबाई खत्म ही नहीं हुई...
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 07 Sep 2017 08:35 AM IST
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cobra
- फोटो : BBC
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उत्तराखंड में कॉर्बेट के जंगलों में लोगों ने ऐसा सांप देखा जिसकी लंबाई इतनी थी कि सब हैरान रह गए।
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साल 2010 में कालाढूंगी इलाक़े में एक मरा हुआ विशाल किंग कोबरा मिला। इसकी लंबाई 23 फुट 9 इंच थी और दावा किया था कि ये शायद दुनिया का सबसे लंबा किंग कोबरा हो सकता है।
अभी तक किंग कोबरा की सर्वाधिक दर्ज लंबाई 18 फुट 9 इंच ही मानी गई है।
महिलाओं ने देखा की नाग मरा पड़ा है
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बीबीसी की एक खबर के मुताबिक कॉर्बेट नेशनल पार्क के पास पवलगढ़ इलाक़े में जब कुछ महिलाएं लदुवागढ़ झरने के पास से गुज़र रही थीं तो उन्होंने पत्थरों पर कुछ ख़ून लगा हुआ देखा, जब पास गईं तो पाया कि एक नाग मरा हुआ है।
उन्होंने ही सामुदायिक पर्यटन के लिए काम कर रही कॉर्बेट ग्राम विकास समिति को इसकी सूचना दी थी।
उस वक्त समिति के प्रबंध निदेशक राजेश पंवार ने बताया था, "जब हम वहां पहुंचे तो देखकर दंग रह गए कि इतना बड़ा किंग कोबरा है। इसका बीच का हिस्सा चट्टान के नीचे दबा हुआ था और पूरा शरीर गोल घूमा हुआ था और फन और पूंछ मिले हुए थे।"
उन्होंने ही सामुदायिक पर्यटन के लिए काम कर रही कॉर्बेट ग्राम विकास समिति को इसकी सूचना दी थी।
उस वक्त समिति के प्रबंध निदेशक राजेश पंवार ने बताया था, "जब हम वहां पहुंचे तो देखकर दंग रह गए कि इतना बड़ा किंग कोबरा है। इसका बीच का हिस्सा चट्टान के नीचे दबा हुआ था और पूरा शरीर गोल घूमा हुआ था और फन और पूंछ मिले हुए थे।"
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सांप की लंबाई पर किसी को यकीन नहीं हुआ
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वन अधिकारियों की मदद से इसे सावधानी से बाहर निकाला गया और जब इसकी लंबाई नापी गई तो सहसा किसी को यक़ीन ही नहीं हुआ।
नाग को निकालने के लिए चली मुहिम के प्रमुख और जिला वन अधिकारी डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा, "इसकी लंबाई की पुष्टि करने के लिए तीन बार इसे नापा गया। किंग कोबरा यहां पाया ज़रूर जाता है लेकिन इतना विशाल तो ये अपने आप में दुर्लभ था।"
उस वक्त चेन्नई में सरीसृपों यानी रेपटाइल्स और सांप विशेषज्ञ विमल राज से सलाह ली गई तो उन्होंने भी विश्वास नहीं किया कि कोई सांप इतना लंबा हो सकता है।
नाग को निकालने के लिए चली मुहिम के प्रमुख और जिला वन अधिकारी डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा, "इसकी लंबाई की पुष्टि करने के लिए तीन बार इसे नापा गया। किंग कोबरा यहां पाया ज़रूर जाता है लेकिन इतना विशाल तो ये अपने आप में दुर्लभ था।"
उस वक्त चेन्नई में सरीसृपों यानी रेपटाइल्स और सांप विशेषज्ञ विमल राज से सलाह ली गई तो उन्होंने भी विश्वास नहीं किया कि कोई सांप इतना लंबा हो सकता है।
लुप्त हो रहे हैं किंग कोबरा
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किंग कोबरा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-2 में है, यानी उन जीवों में से हैं जो ख़तरे में हैं। लेकिन इसके संरक्षण के उपाय नहीं किए जाते क्योंकि ये बेहद ख़तरनाक, विषैला और जानलेवा होता है।
इसके काटने के बाद 15 मिनट के अंदर ही आदमी की मौत हो जाती है। किंग कोबरा की पहचान उसके ख़ास आकार के फन और उसके ऊपर बनी धारियों से होती है और ये अपने शरीर का एक तिहाई हिस्सा उठाकर चल सकता है।
इसकी औसत लंबाई 12 से 14 फुट होती है और ये 20 साल तक जीता है।
इसके काटने के बाद 15 मिनट के अंदर ही आदमी की मौत हो जाती है। किंग कोबरा की पहचान उसके ख़ास आकार के फन और उसके ऊपर बनी धारियों से होती है और ये अपने शरीर का एक तिहाई हिस्सा उठाकर चल सकता है।
इसकी औसत लंबाई 12 से 14 फुट होती है और ये 20 साल तक जीता है।
दहशत में कई दिनों तक बीमार रहा था स्थानीय निवासी
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उस वक्त लोग अपनी उन मान्यताओं के कारण डरे हुए थे कि नाग का हमेशा जोड़ा होता है यानी ये मर चुका है तो दूसरा जरूर होगा।
लोगों ने बताया था कि दमोला गांव के स्थानीय निवासी विनय कांबोज ने दो महीने पहले इस कोबरा को दौड़ते हुए देखा था तो वो दहशत में कई दिनों तक बीमार रहे थे।
उत्तराखंड के पूर्व प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक और वन्य जीव विशेषज्ञ आनन्द सिंह नेगी ने कहा था कि किंग कोबरा अपने रहने की जगह में कोई खलल बर्दाश्त नहीं करता है। वो बेहद शांत और सघन जंगल में ही पाया जाता है और ऐसे विशालकाय कोबरा का मिलना इस बात का भी सबूत है कि कॉर्बेट के आसपास के जंगल इनके लिए उपयुक्त हैं।
लोगों ने बताया था कि दमोला गांव के स्थानीय निवासी विनय कांबोज ने दो महीने पहले इस कोबरा को दौड़ते हुए देखा था तो वो दहशत में कई दिनों तक बीमार रहे थे।
उत्तराखंड के पूर्व प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक और वन्य जीव विशेषज्ञ आनन्द सिंह नेगी ने कहा था कि किंग कोबरा अपने रहने की जगह में कोई खलल बर्दाश्त नहीं करता है। वो बेहद शांत और सघन जंगल में ही पाया जाता है और ऐसे विशालकाय कोबरा का मिलना इस बात का भी सबूत है कि कॉर्बेट के आसपास के जंगल इनके लिए उपयुक्त हैं।