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पर्यावरण दिवस 2020: मसूरी घोषणापत्र को याद करने की भी जरूरत, पिछले साल एक मंच पर आए थे 11 हिमालयी राज्य
Fri, 05 Jun 2020 01:26 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 05 Jun 2020 01:26 PM IST
सार
- पर्यावरण बचाने के लिए एकजुटता का लिया था संकल्प
- देश के कुल वन क्षेत्र के एक तिहाई का संरक्षण कर रहे हैं राज्य
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- फोटो : File Photo
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विस्तार
पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए 11 हिमालयी राज्यों को नए सिरे से भी जुटना होगा। वर्ष 2019 में मसूरी में हुए कान्क्लेव में मसूरी घोषणापत्र के जरिए हिमालयी राज्यों ने यह संकल्प लिया भी था। पर्यावरण को बचाने के लिए अब यह स्वीकार किया जा रहा है कि देश और प्रदेश की सीमाओं से आगे बढ़कर काम करना होगा। इसके तहत नेपाल, चीन, भारत और तिब्बत के क्षेत्र को मिलाते हुए कैलाश लैंडस्केप पर काम भी किया जा रहा है।
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इससे इतर हिमालयी राज्यों ने भी स्वीकार किया था कि पर्यावरण को बचाने के लिए सभी राज्यों को एक साथ सामने आना होगा। इसी के तहत वर्ष 2019 में 11 हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधि जुलाई में मसूरी में एकत्र भी हुए थे। इनकी ओर से मसूूूरी घोषणा पत्र भी तैयार कर केंद्र सरकार को सौंपा गया था। इस घोषणा पत्र में राज्यों ने संकल्प लिया था कि हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता, पर्यावरण को बचाने के लिए एक मंच पर काम किया जाएगा। यह भी तय हुआ था कि राज्य अपनी बेहतर कामों को साझा करेंगे।
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विश्व पर्यावरण दिवस पर अब इसी संकल्प को दोहराने की जरूरत भी महसूस की जा रही है। पर्यावरणविद डा. अनिल जोशी के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र को खाकों में बांटकर देखना सही नहीं है। भारतीय हिमालयी क्षेत्र (आईएचआर) देश के सबसे प्रमुख कार्बन सिंक के रूप में भी काम करता है।
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जैव विविधता से भरपूर इस क्षेत्र से निकलने वाली नदियां मैदानी भाग की बड़ी जनसंख्या के जीवन का आधार भी हैं। इन नदियों, जैव विविधता आदि को बचाने के लिए ही हिमालयी राज्यों का अधिकतर भूभाग आरक्षित और संरक्षित क्षेत्र में भी है।
एक सुर में उठा था ग्रीन बोनस का मुद्दा
इस आरक्षित और संरक्षित क्षेत्र की वजह से हिमालयी राज्य खुलकर विकास योजनाओं को भी अंजाम नहीं दे पाते। यही वजह थी कि मसूरी घोषणापत्र में ग्रीन बोनस की मांग एक सुर में उठी थी और सभी राज्यों ने इस पर सहमति दी थी। इस बार 15वें वित्त आयोग ने भी वनों के महत्व को स्वीकार करते हुए राज्यों को वन के लिए वेटेज दिया।
अलग से पर्वतीय मंत्रालय की भी थी मांग
हिमालयी राज्यों ने यह स्वीकार किया था कि पर्वतीय क्षेत्रों में विकास का तरीका एकदम अलग है। हिमालयी क्षेत्र आपदाओं का घर भी है और यही वजह रही कि राज्यों ने अलग से पर्वतीय मंत्रालय की मांग भी की थी।
भारतीय हिमालयी क्षेत्र
-11 हिमालयी राज्य, इन राज्यों में करीब 41.5 प्रतिशत वन क्षेत्र, देश के कुल वन क्षेत्र का करीब एक तिहाई
-देश की कुल जैव विविधता का करीब 36 प्रतिशत इन्हीं राज्यों में
-हिमालयी क्षेत्र में करीब 12 हजार ग्लेशियर, कुल क्षेत्रफल करीब 33 हजार वर्ग किलोमीटर
-कुल बारिश-94.62 बीसीएम, 17 प्रतिशत भाप बनकर उड़ जाती है, 29.5 प्रतिशत जमीन सोख लेती है, 15.4 प्रतिशत भूजल को रिचार्ज करती है और 37.6 प्रतिशत नदियों को पानी देती है।
जैव विविधता
-280 प्रजातियां स्तनपाई, 940 से अधिक प्रजातियां पक्षियों की
-देश का प्रमुख कार्बन सिंक