चूल्हा चौका संभालने के साथ गंगा संरक्षण के लिए आगे आईं महिलाएं, अभियान में जुटीं
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गंगा के मैदानी इलाकों में रहने वाली महिलाएं अब चूल्हा चौका संभालने तक ही सीमित नहीं रह गई हैं। वे गंगा संरक्षण को लेकर आगे आई हैं।
‘नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा’ के तहत गोमुख से लेकर गंगासागर तक महिलाएं गंगा सफाई में योगदान दे रही हैं। साथ ही आजीविका के नए साधन भी विकसित कर रही हैं। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा योजना के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान स्थित ‘गंगा एक्तालाइफ मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सेंटर’ इन महिलाओं की मदद के लिए आगे आया है।
‘गंगा एक्वालाइफ मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सेंटर’ की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रुचि बड़ोला ने बताया कि घर गृहस्थी संभालने के साथ ही सैकड़ों की सं?या में महिलाएं बतौर गंगा प्रहरी नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा के तहत भागीदारी कर गोमुख से लेकर गंगासागर तक सफाई अभियान में हिस्सा ले रही हैं। अध्ययन में यह बात सामने आई कि जब तक आमजन की भागीदारी नहीं सुनिश्चित की जाएगी। गंगा को साफ किया जाना संभव नहीं है। ऐसे में अब गंगा की सफाई को लेकर नए सिरे से कार्ययोजना बनाई गई है, जिसमें आमजन के साथ महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
गंगा में प्रवाहित फूलों से बना रहीं अगरबत्ती
गोमुख से लेकर गंगासागर तक के क्षेत्र को छह जोन में बांटा गया है। सभी जोन में गंगा प्रहरियों को तैनाती कर गंगा को साफ करने का अभियान शुरू किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना में बड़ी सं?या में महिलाएं भी आगे आई हैं।
गंगा प्रहरी के तौर पर ये महिलाएं न केवल गंगा की सफाई में अपना योगदान दे रही हैं, वरन आजीविका के नए साधन विकसित कर रही हैं। महिलाएं गोमुख से गंगासागर तक घाटों की सफाई करने के साथ ही दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतुओं के संरक्षण में भी अहम योगदान दे रही हैं। इन महिलाओं को सेंटर की ओर से जैव विविधता संरक्षण समेत तमाम मुद्दों की जानकारी दी जा रही है।
सेंटर के वैज्ञानिकों के मुताबिक अभियान से जुड़ी महिलाएं गोमुख से लेकर गंगासागर तक श्रद्धालुओं द्वारा गंगा में प्रवाहित किए गए फूलों को बाहर निकाल कर सफाई के काम में मदद कर रही हैं। इन फूलों से अगरबत्ती तैयार कर आजीविका के नए साधन भी विकसित कर रही हैं।
वैज्ञानिकों ने गोमुख से गंगासागर तक किया अध्ययन
सेंटर के विज्ञानियों की टीम ने गोमुख से लेकर गंगासागर तक अध्ययन किया गया है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि यदि गंगा संरक्षण को लेकर कारगर कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति बिगड़ सकती है।
जीआईएस तकनीक का किया इस्तेमाल
सेंटर की टीम ने गंगा की मौजूदा स्थिति का अध्ययन करने के लिए जीआईएस तकनीक का इस्तेमाल किया है। टीम के वरिष्ठ वैज्ञानिक जीशान अली के मुताबिक जीआईएस तकनीक के जरिये इस बात का पता लगाया गया है कि गंगा के संरक्षण को लेकर कहां पर बेहद कारगर कदम उठाने की जरूरत है।