कभी खुद को असहाय महसूस करने वाली पुरकुल स्त्री शक्ति समिति की सैकड़ों महिलाओं ने अपनी मेहनत के बूते एक मुकाम हासिल किया है। यहां से अब वे अपने परिवार के अलावा सैकड़ों दूसरी महिलाओं का भी सहारा बन रही हैं। आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ ही अब इनमें गजब का आत्मविश्वास भी आ गया है। स्थिति यह है कि इनके बच्चे विदेशों में अच्छी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
इस महिला को सैल्यूट, खुद संभलकर दूसरों को दे रही सहारा
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चिन्नी ने बताया कि यहां महिलाओं को हस्तकला की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद महिलाएं स्वयं सहायता समूह बनाकर काम करती हैं। ये समूह समिति को आर्थिक मदद करते हैं, जिससे यहां काम होता है। उन्होंने बताया कि समिति के साथ गरीब घरों की महिलाएं काम कर रही हैं। कई महिलाएं ऐसी हैं, जो पहले घरों से निकलने में भी डरती थीं। लेकिन, आज वह समिति में सुपरवाइजर या किसी ऐसे पद पर हैं जो दूसरों को न सिर्फ कार्य करना सिखाती हैं, बल्कि उन्हें जीवन जीने के गुण भी देती हैं।
यह महिलाएं खूबसूरती से रजाई में पैच वर्क आदि करती हैं, जो देश ही नहीं विदेशों में भी बेहद पसंद किया जाता है। इनकी बदली जिंदगी समिति में सुपरवाइजर का काम देख रहीं बलविंदर कौर के पति करीब दस साल पहले गुजर गए थे। तब वह खुद को दुख से उबार नहीं पा रही थी और सामने पैसों का संकट था। बेटी को पढ़ाना था लेकिन कैसे? बलविंदर ने किसी के माध्यम से समिति के साथ काम शुरू किया। आज बलविंदर कई महिलाओं के लिए हौसला बनी हैं। बेटी भी किसी कॉलेज से डिग्री कोर्स कर रही है कला देवी अपने पति से बेहद परेशान थी।
पति ने दूसरी शादी कर ली और कला को मारता-पीटता रहता था। इस बीच कला के किसी पड़ोसी ने उसे समिति के साथ जुड़कर काम करने की सलाह दी। तब कला को कोई काम नहीं आता था, तो वह चाय बनाती थी और बचे हुए समय में प्रशिक्षण लेती थी। अब कला की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत है और वह डटकर सबका सामना करती है।
वाईडीएस (पुरकुल यूथ डेवलपमेंट सोसायटी) लर्निंग सेंटर में बच्चों को प्ले ग्रुप से बारहवीं तक की शिक्षा दी जाती है। स्कूल के संस्थापक जीके स्वामी ने बताया कि वर्ष 2006 में स्कूल की शुरुआत की गई, हालांकि गरीब बच्चों को मदद इससे पहले भी करते थे। उन्होंने बताया कि स्कूल के कुछ बच्चे अमेरिकन यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप लेकर पढ़ रहे हैं, तो कुछ बांग्लादेश यूनिवर्सिटी और थाईलैंड में पढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली की पर्ल एकेडमी की ओर से भी बारहवीं के बाद छात्रों को फैशन, टैक्सटाइल आदि कोर्स निशुल्क कराए जा रहे हैं। जबकि इस कोर्स की फीस 25 लाख रुपये है। यहां हैं महिलाओं के बनाए सामान के ले-आउट: सुभाष रोड स्थित होटल व्हाइट हाउस, मसूरी में पदमिनी निवास, पुरकुल गांव