घर हो या ऑफिस कहीं महफूज नहीं लड़कियां
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उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वालों को नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर नजर जरूर डालनी चाहिए। आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं न घर में महफूज हैं और न कार्यालय में।
2012 में 212 युवतियां-महिलाएं यौन उत्पीड़न की शिकार हुई। ज्यादातर मामले हाई प्रोफाइल ऑफिस और शिक्षण संस्थानों के हैं।
मानव तस्करी के मामले बढ़े
राजधानी देहरादून के पुलिस लाइन में डीआईजी गढ़वाल रेंज आफिस की ओर से आयोजित महिला उत्पीड़न संबंधी कार्यशाला में ‘इम्पावर पीपुल संस्था’ ने एनसीआरबी की ओर से हाल ही में जारी 2012 के आंकड़े पेश किए।
अन्य राज्यों में भी महिला सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक है। हालांकि, उत्तराखंड के लिए चिंता की बात यह है कि यौन उत्पीड़न और मानव तस्करी के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि पुलिस की केस डायरी में मामले मानव तस्करी के दो या तीन मामले ही दर्ज हैं।
बढ़ रहे छेड़छाड़ के मामले
स्कूल और कालेजों में छेड़खानी के मामलों में 19.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2012 में 139 लड़कियां छेड़खानी की शिकार हुई।
संस्था के निदेशक ज्ञानेंद्र कुमार बताते हैं कि महिलाओं का घर और कार्यालय में सुरक्षित न होना गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। पूर्व जिला संरक्षण अधिकारी रमिंद्री मंद्रवाल ने इसे रोकने के लिए पुलिस के साथ ही समाज की समीक्षा की जरूरत है।
महिला पुलिस भी नहीं महफूज
आम महिलाएं ही नहीं महिला पुलिस कर्मी भी अक्सर खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। हालांकि, फोर्स के अनुशासन के कारण वह इस बात को जाहिर नहीं कर पाती।
कार्यशाला में कई महिला पुलिसकर्मियों ने कहा कि पुलिस पिकेट में ड्यूटी के दौरान उन्हें डर लगता है। कार्यशाला के दौरान प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक देख नम हुई कई महिला पुलिसकर्मियों की आंखें उनकी चिंता और तकलीफ को बयां कर रही थी।
लालच के लिए हत्या
दहेज लोभियों ने वर्ष 2012 में 71 महिलाओं की जान ले ली। इनमें कई महिलाओं का लंबे समय तक उत्पीड़न किया गया और फिर उनकी हत्या कर दी गई। दहेज हत्या के सबसे अधिक मामले हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर में सामने आए।
आंकड़ों की जुबानी
यौन उत्पीड़न------------------212
दहेज के लिए हत्या------------71
सार्वजनिक स्थलों पर छेड़खानी-139
दहेज उत्पीड़न-----------------368
(वर्ष 2012 की स्थिति)