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शर्मनाक! सरकारी अस्पताल में फर्श पर हुई डिलीवरी, जच्चा-बच्चा को पैदल इधर-उधर लेकर घूमता रहा स्टाफ

Fri, 02 Nov 2018 08:56 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 02 Nov 2018 08:56 AM IST
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Women Delivery on Floor in Government Doon Female Hospital again
doon female hospital - फोटो : demo pic

दून महिला अस्पताल में महिला दर्द से कराहती रही, लेकिन न डॉक्टर आए और न कोई सुविधा मिली। नतीजतन महिला ने बच्ची को फर्श पर ही जन्म दे दिया। सवा माह के भीतर दून महिला अस्पताल में लापरवाही का यह दूसरा बड़ा मामला है।

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अचानक बच्ची के फर्श पर जन्म लेने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मां-बच्ची दोनों सलामत हैं। दून महिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को चकराता निवासी गर्भवती मनीषा तोमर (वर्तमान निवासी सुंदरवाला) को रायपुर सीएचसी से रेफर किया गया।
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वह अपने पति के साथ दोपहर में अस्पताल पहुंची। पति बच्चन तोमर का कहना है कि डॉक्टर ने बच्चे के जन्म का समय नजदीक होने और दून अस्पताल ले जाने को कहा था। इसके बाद जब वह सुबह महिला अस्पताल पहुंचे तो मनीषा को सही समय पर उपचार नहीं मिल पाया। 

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पति ने लगाए आरोप

लेबर रूम में ले जाने की बजाय वह इधर-उधर घुमाते रहे। मनीषा को अल्ट्रासाउंड कराने को बोला गया। वह अल्ट्रासाउंड के लिए आधे घंटे तक इंतजार में खड़ी रही। अचानक तेज दर्द होने लगा तो वह लेबर रूम वापस आ गई।

आरोप है कि डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लौटा दिया। वह लेबर रूम से बाहर निकली ही थी कि गैलरी में ही प्रसव हो गया। आनन-फानन में गर्भवती को उसके पति और वहां मौजूद लोग उठाकर लेबर रूम ले गए, जहां गर्भवती महिला का आगे का इलाज किया गया। महिला के पति का यह भी आरोप है कि स्टाफ ने उनकी पत्नी से व्हीलचेयर भी छीन ली। 

20 सितंबर को हुई थी जच्चा-बच्चा की मौत

दून महिला अस्पताल में लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 20 सितंबर को अस्पताल में पांच दिन तक फर्श पर पड़ी रहने के बाद महिला को प्रसव हुआ था।

उसके बाद फर्श पर ही जच्चा-बच्चा ने दम तोड़ दिया था। इस मामले की जांच की गई थी, लेकिन बाद में चिकित्सकों को क्लीन चिट दे दी गई थी। 

मुझे मामले के जानकारी नहीं है। मैं ओटी में एक जटिल ऑपरेशन में व्यस्त थी। जानकारी मिलने पर बताती हूं।
-डॉ. मीनाक्षी जोशी, सीएमएस, दून महिला अस्पताल
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