{"_id":"71ae32eb35b22827b24ffe5745397156","slug":"women-are-happy-with-the-decision-of-the-court-in-dehradun","type":"story","status":"publish","title_hn":"दून की बेटियों को कब मिलेगा इंसाफ?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दून की बेटियों को कब मिलेगा इंसाफ?
अमर उजाला, प्रवेश कुमारी, देहरादून
Updated Sat, 14 Sep 2013 01:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिटिया के गुनहगारों को कोर्ट ने फांसी की सजा तजवीज की। इस फैसले से निश्चित रूप से उनके माता-पिता, प्रिय, परिचितों ने राहत की सांस ली।
विज्ञापन
दून में भी हर किसी ने इसे न्याय की जीत बताया, लेकिन यहां एक वर्ग ऐसा भी है, जिसे अब तक न्याय का इंतजार है। यह हैं अपनों, गैरों की शिकार हुईं बलात्कार पीड़ित। इनका सवाल है, इनके गुनहगारों को सजा कब मिलेगी...?
विज्ञापन
पढें, शर्मनाकः दुष्कर्म करने वाला आजाद, पीड़ित हड़ताल पर
विज्ञापन
रेनू और उसकी मां का दिल चाहें इंसाफ
लगभग 15 साल की रेनू (परिवर्तित नाम) आज भी उस वाकये को नहीं भूलती, जिसने उसकी जिंदगी को जख्मों के ज्वार में बदल दिया। चंद्रबनी चोइला में रहने वाली रेनू को स्कूल जाते वक्त एक परिचित ने ही हवस का शिकार बना लिया।
इसके बाद रेनू के लिए घर से निकलना मौत के समान हो गया। जिस घर में रेनू रहती है, वहां के मकान मालिक के समझाने के बाद उसने छोटे भाई के साथ एक बार फिर से पढ़ाई तो शुरू कर दी है, लेकिन जब भी इस घटना का जिक्र होता है तो वह रो उठती है।
मामला कोर्ट में और आरोपी परिचित फिलहाल जेल में है, लेकिन रेनू और उसकी मां की आंखें आज भी न्याय के सूरज का इंतजार कर रही हैं।
पढें, कर्फ्यू में ढ़ील से दौड़ने लगी बसें
रेनू की मकान मालिक माया की मानें तो जिंदगी बर्बाद करने वालों को जीने का कोई हक नहीं है। बृहस्पतिवार को निर्भया हत्याकांड के चारों आरोपियों को फांसी की सजा पर भी उन्होंने यही बात दोहराई।
मेरा बेटा या भाई ऐसा करे तो उसे भी फांसी हो
प्रेमनगर में रह रही मानिया (परिवर्तित नाम) को जख्म देने वाला एक पुलिसकर्मी था। यह मामला भी फिलहाल अदालत में है और आरोपी जेल में। उसे सजा दिलाने के लिए मानिया को एड़ियां घिसनी पड़ रही हैं।
पढें, अल्लाह के बंदो ने दुर्गा के मंदिर में उठाई पत्तल
इस चक्कर में उसका बिजनेस तक ठप हो गया। विधवा मानिया के दो बच्चे भी हैं, जिनका पालन उसकी मां कर रही है। बच्चे रोज पूछते हैं-मम्मी कहां जा रही हो, और मानिया का साहस इतना नहीं होता कि मुंह से बात निकाल सके। बस रोने लगती है।
आरोपी के खिलाफ उसने पुलिस प्राधिकरण तक में शिकायत की है। मानिया का केस लड़ रहे एडवोकेट संजीव शर्मा के मुताबिक इस तरह केमामले लगातार बढ़ रहे हैं।
निर्भया हत्याकांड के चारों आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के फांसी की सजा सुनाने पर भी उसने संतोष जताया। बोली-अगर मेरा बेटा या भाई ऐसा करे तो उसके लिए भी मैं फांसी ही चाहूंगी।
रिपोर्ट - रजा शास्त्री, प्रवेश कुमारी, बिशन सिंह बोरा, नलिनी गोसाईं, अंशुल डांगी।