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नसबंदी के तीन साल बाद गर्भवती हुई महिला, डॉक्टर की बात सुनकर पति-पत्नी को आया गुस्सा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंपावत
Updated Tue, 02 Jan 2018 09:31 PM IST
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बच्चा
वर्ष 2015 में नसबंदी कराने के तीन साल बाद एक महिला गर्भवती हो गई। जब वह अपने पति के साथ डॉक्टर से वजह पूछने पहुंची तो जवाब सुनकर दंपति गुस्से से लाल हो गए।
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महिला और उनके पति ने इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजे की मांग की है। जिला मुख्यालय से करीब 34 किलोमीटर दूर चंपावत विकासखंड की दुधौरी ग्राम पंचायत के दिवान राम का कहना है कि उनकी पत्नी नीला देवी ने 2015 में जिला अस्पताल में लगे शिविर में नसबंदी कराई थी। पिछले साल उनकी पत्नी गर्भवती हो गई। उन्होंने दुधौरी के पूर्व ग्राम प्रधान भीम सिंह से शिकायत की।
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मंगलवार को दिवान राम पूर्व प्रधान को साथ लेकर मुख्यालय आए और विभाग को पत्र भेज नसबंदी में लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि उनके पहले से ही
तीन बच्चे हैं। ग्रामीण दिवान राम ने स्वास्थ्य विभाग से मुआवजे की मांग की है।
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नसबंदी के बाद गर्भवती होने पर 90 दिनों के भीतर मिलता है मुआवजा
new born baby
बता दें कि महिला की नसबंदी के बाद गर्भवती होने पर 90 दिनों के भीतर स्वास्थ्य विभाग को सूचना दिए जाने पर 30 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है। ऐसे मामलों में जिले में अब तक दो लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है।
नसबंदी में प्रयुक्त बैंड कभी-कभार अपने आप खुल जाती है। जिस कारण गर्भ ठहर जाता है। इस बात का उल्लेख सहमति पत्र में भी किया जाता है। नसबंदी के बाद गर्भवती होने पर 90 दिन के भीतर सूचना स्वास्थ्य विभाग को देना जरूरी है। इसके बाद गर्भपात की प्रक्रिया की जाती है।
- डॉ. एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
वर्ष नसबंदी फेल मामले
2015-16 646 14
2016-17 609 04
2017-18 190 03
नसबंदी में प्रयुक्त बैंड कभी-कभार अपने आप खुल जाती है। जिस कारण गर्भ ठहर जाता है। इस बात का उल्लेख सहमति पत्र में भी किया जाता है। नसबंदी के बाद गर्भवती होने पर 90 दिन के भीतर सूचना स्वास्थ्य विभाग को देना जरूरी है। इसके बाद गर्भपात की प्रक्रिया की जाती है।
- डॉ. एमएस बोहरा, मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
वर्ष नसबंदी फेल मामले
2015-16 646 14
2016-17 609 04
2017-18 190 03