{"_id":"a9a22a8b0d355991f25298d0d8546a09","slug":"woman-making-house","type":"story","status":"publish","title_hn":"नौ सालों से ये महिला कर रही पुरुषों का काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नौ सालों से ये महिला कर रही पुरुषों का काम
राजेन्द्र सिंह बिष्ट बबली/अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Sat, 08 Mar 2014 01:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शायद ही आपने कोई महिला को राजमिस्त्री के रूप में काम करते देखा होगा। शारीरिक श्रम के हिसाब से यह काम केवल पुरुषों के लिए ही माना जाता है, लेकिन नौ वर्ष पहले रामपुर से हल्द्वानी आकर पार्वती ने दूसरों की कई इमारतें खड़ी कर दी।
विज्ञापन
पढ़ें, जब एनडी तिवारी को पिता ने किया बेदखल
विज्ञापन
हालांकि वह अब तक अपना मकान नहीं बना सकी हैं। यूं तो देश भर में शनिवार को महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण की चर्चाएं होंगी, मगर ऐसी गतिविधियों से अंजान यह महिला अब भी दबंग ठेकेदारों से जूझ रही हैं।
विज्ञापन
बंगाल की रहने वाली
पार्वती देवी (41) मूलरूप से बंगाल की रहने वाली हैं और उनका असली नाम उज्जन देवी है। पार्वती की ससुराल मिलक (रामपुर) है।
पढ़ें, बदरीनाथ धाम में पहननी होगी धोती, मोबाइल बैन
वह वर्षों पहले पति भूपराम मौर्या के साथ हल्द्वानी आई थीं। परिवार पालने के लिए पति के साथ मजदूरी की और 2007 में उन्होंने किन्नी पकड़ ली। आज वे यहां की जानीमानी राजमिस्त्री हैं।
बना चुकी हैं 50 भवन
पति मजदूर हैं, फिर भी वह अपनी हुनर की बदौलत न केवल परिवार को पाल रही हैं, बल्कि तीन बच्चों को पढ़ा भी रही हैं। हल्द्वानी और आसपास के इलाकों में वह अभी तक लगभग 50 मकान बना चुकी हैं।
पढ़ें, गिनीज बुक के बाद अरविंद का यह है नया लक्ष्य
वे एक दिन में वह लगभग आठ सौ से लेकर एक हजार ईंटों की चिनाई कर देती हैं। पार्वती कहती हैं कि वे भवन निर्माण का सारा काम बखूबी कर लेती हैं। दूसरों के मकान बना कर ही उन्होंने अपनी बेटी का घर बसाया है। दूसरी बेटी कक्षा 10 में, दो लड़के क्रमश: 11 एवं 9 में पढ़ते हैं।