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संगीता के घर गूंजी तीन किलकारियां, दो बेटे एक बेटी को दिया जन्म
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 24 Aug 2017 05:36 PM IST
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संगीता के घर में तीन किलकारियां एक साथ गूंजी तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। संगीता ने हाल ही में एक साथ दो लड़कों और तीन लड़कियों को जन्म दिया। आगे पढ़िए पूरी कहानी...
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निर्मल आश्रम अस्पताल में टिहरी जनपद की महिला ने नॉर्मल डिलीवरी से तीन बच्चों को जन्म दिया है। चिकित्सकीय टीम के अनुसार जच्चा और बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ हैं। महिला के पहले दो बच्चे हैं। चिकित्सक के अनुसार डिलीवरी नॉर्मल हुई है।
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प्रि-मिच्योर डिलीवरी होने के कारण बच्चों का वजन थोड़ा कम था, जिसके कारण बच्चों को न्यूनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में रखा गया। पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद अब मां व बच्चों को छुट्टी दे दी गई है।
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अस्पताल के प्रशासक बिक्रमजीत सिंह ने बताया कि टिहरी जिले के इंदवाल गांव निवासी महिला संगीता भट्ट को बीती 16 अगस्त को अचानक प्रसव पीड़ा होने पर पति सूरज भट्ट ने सुबह नौ बजे अस्पताल में भर्ती कराया। संगीता ने अस्पताल में भर्ती होने के करीब एक घंटे बाद ही नॉर्मल डिलीवरी में सुबह 10.19 पर पहले लड़के को जन्म दिया।
ढाई महीने पहले ही उसकी डिलीवरी हो गई
इसके चार मिनट बाद लड़की और फिर सात मिनट बाद दूसरे लड़के को जन्म दिया। हालांकि, बच्चों का वजन नार्मल से काफी कम है, लेकिन चिकित्सकों के अनुसार तीनों नवजात शिशु स्वस्थ हैं। प्रसव के बाद अस्पताल प्रशासन ने नवजात बच्चों को एनआईसीयू में रखा गया।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. पूजा ने बताया कि संगीता की डिलीवरी अक्टूबर में होनी थी। मगर ढाई महीने पहले ही उसकी डिलीवरी हो गई। उन्होंने बताया कि बच्चों का वजन सामान्य से कम है, लेकिन तीनों बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डा. कंवलदीप सिंह ने बताया कि पेट में बच्चों की संख्या अधिक होने से प्रसव पीड़ा जल्द हो जाती है। इसे मेडिकल की भाषा में फ्रीटर्म कहा जाता है। लिहाजा ऐसा होने से डिलीवरी निर्धारित समय से पहले हो जाती है। जच्चा बच्चा को सोमवार सुबह अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. पूजा ने बताया कि संगीता की डिलीवरी अक्टूबर में होनी थी। मगर ढाई महीने पहले ही उसकी डिलीवरी हो गई। उन्होंने बताया कि बच्चों का वजन सामान्य से कम है, लेकिन तीनों बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डा. कंवलदीप सिंह ने बताया कि पेट में बच्चों की संख्या अधिक होने से प्रसव पीड़ा जल्द हो जाती है। इसे मेडिकल की भाषा में फ्रीटर्म कहा जाता है। लिहाजा ऐसा होने से डिलीवरी निर्धारित समय से पहले हो जाती है। जच्चा बच्चा को सोमवार सुबह अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।