विंटर टूरिज्म के लिए तैयार है केदारनाथ धाम
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सर्दियों में सन्नाटे में डूबा रहने वाला केदारनाथ धाम में अब बर्फबारी के बीच भी चहल-पहल बनी रहेगी। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान(निम) की पहल पर नवंबर के पहले हफ्ते में 50 लोगों का दल केदारनाथ पहुंच रहा है।
दून के युवाओं का यह दल केदारनाथ से चौमासी तक का ट्रेक भी करेगा और यह भी देखेगा कि आखिरकार चौराबाड़ी ताल से किस तरह से केदारनाथ को नुकसान पहुंचा। निम इस पूरे अभियान को बिना हानि-लाभ की परवाह के संचालित करने को तैयार है।
केदारनाथ में निर्माण कार्य में जुटे निम ने इस बार केदारनाथ में विंटर टूरिज्म के लिए पहल की है। इसी के तहत यह पहला दल है जो केदारनाथ पहुंच रहा है। इस दल में दून के विभिन्न शिक्षण संस्थाओं और सामाजिक संस्थाओं के युवा शामिल हैं।
इस दल को साजो सामान और गाइड उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निम ने उठाई है। दल न सिर्फ केदारनाथ का भ्रमण करेगा बल्कि चौराबाड़ी ताल पहुंचकर यह भी देखेगा कि केदारनाथ में आपदा किस तरह से आई। शिला ने मंदिर को किस तरह से बचाया और अब केदारनाथ का स्वरूप क्या हो गया है।
विंटर टूरिज्म और आपदा प्रबंधन का मिश्रित रूप
इसके साथ ही यह दल केदारनाथ से चौमासी तक का ट्रेक भी करेगा। यही ट्रेक है जिसे प्रदेश सरकार वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है। इसकी जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई है।
23 किलोमीटर के इस ट्रेक का सर्वे एक बार निम पहले भी कर चुका है। इस रूट पर दल केजाने से यह भी साबित होगा कि यह रूट वैकल्पिक मार्ग के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है।
इस रूट पर चौमासी के बाद जाल मल्ला, ताल मल्ला सहित दर्जन भर से अधिक गांव है। यही गांव हैं जिन्होने जून 2013 की आपदा में सबसे अधिक नुकसान उठाया। इस रूट के विसित होने पर इन गांवों को भी फायदे की उम्मीद है।
निम के मुताबिक यह बहुत अधिक विंटर टूरिज्म और आपदा प्रबंधन का मिला जुला रूप भी होगा। कोशिश यह भी है कि पर्यटन के साथ-साथ आपदा के बारे में भी लोगों को बताया जा सके। यही वजह है कि वासुकी ताल के साथ-साथ गांधी सरोवर (चोराबाड़ी) तक की ओर यह दल रुख करेगा।