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अचानक ठंड बढ़ने से एलर्जी अटैक
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 01 Nov 2013 03:01 PM IST
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एक दिन की ठंड से सांस की एलर्जी और हृदय रोगियों की जान जकड़ गई है। पारा के नीचे लुढ़क जाने से इन मरीजों पर खतरा बढ़ गया है। बृहस्पतिवार को अस्थमा अटैक के मरीजों की संख्या सात गुना बढ़ गई। सीओपीडी के रोगियों की हालत नाजुक हो गई। उन्हें आईसीयू में रखा गया है।
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पारा और गिरा
दून अस्पताल और नर्सिंग होमों की इमरजेंसी में सांस के रोगी गंभीर हालत में लाए गए।बृहस्पतिवार को पारा अचानक 13.4 डिग्री सेल्सियस पर लुढ़क आया। इससे एकदम से लोगों पर बीमारियों का अटैक हो गया। खासतौर पर बच्चे, बुजुर्ग और पुराने मरीजों की सेहत लड़ख़ड़ा गई। पुराने मरीजों को अस्थमा, सीओपीडी का अटैक पड़ गया है। हाई ब्लडप्रेशर के मरीजों को एंजाइना का दर्द उठ गया। उन्हें आईसीयू में भरती किया गया है।
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मौसम का बदलाव बच्चों पर भारी
इसके साथ ही बच्चों को जुकाम बुखार खांसी हो गई। छोटे बच्चों को पसली चलने, निमोनिया आदि की शिकायत हो गई है। दून अस्पताल में अस्थमा अटैक के एक-दो मरीज रोज आते थे, लेकिन बृहस्पतिवार को 15 मरीज आए। यही हाल नर्सिंगहोमों का रहा। हिमालयन इंस्टीट्यूट जौली ग्रांट की मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. अनीता शर्मा ने बताया कि मौसम के बदलाव से रोगियों की संख्या पर असर पड़ा है।
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यह भी जानें
शरीर का औसत तापमान 36.5 सेंटीग्रेड होता है। इस तापमान पर शरीर के अंदरुनी अंग सरलता से काम करते हैं। बाहर के तापमान के घटने या बढ़ने का प्रभाव शरीर पर आता है। शरीर अपने अंदर और बाहर के तापमान को एडजस्ट करने की कोशिश करता है। अगर बाहर का तापमान कम हुआ है तो शरीर की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं। अगर बाहर का तापमान बढ़ा है तो मांसपेशियां फैलती हैं। स्वस्थ्य शरीर को इस एडजस्टमेंट में दो से पांच मिनट लगते हैं। लेकिन बच्चे, बुजुर्ग, कम प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों और पुराने रोगियों का शरीर जल्दी एडजस्ट नहीं कर पाता और बीमार हो जाता है।
इनको खतरा अधिक
अस्थमा, सीओपीडी, डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर, हार्ट के मरीज, ब्रेन के मरीज, ब्रोंकाइटिस के मरीज, गर्भवती महिलाएं, नवजात, किसी मर्ज के पुराने रोगी
यह करें
गर्म कमरे से अचानक बाहर न निकलें
बुजुर्ग तड़के वॉक पर न जाएं
छोटे बच्चों को गर्म कपड़ों में लपेटे रहें
ठंडक में बाहर न निकलने दें
बुजुर्ग गर्म कपड़े पहनें, कान और सिर ढंके रहें