Wildlife Counting: वन विभाग के पास ही नहीं वन्य जीवों का सही आंकड़ा, 14 साल से नहीं हुई गणना
वर्ष 2008 के बाद वन्य जीवों की संख्या कितनी बढ़ी या घटी वन विभाग को पता ही नहीं है। बाघ, हाथी, बंदरों को छोड़ वन्यजीवों की गणना नहीं हुई है। बाघ की वर्ष 2018, हाथी की वर्ष 2020 और बंदरों की वर्ष 2021 में गणना हुई थी।
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उत्तराखंड देश-दुनिया में अपनी दुर्लभ वन्य जीव संपदा के लिए जाना जाता है, लेकिन हैरत की बात है कि बीते 14 सालों से यहां बाघ, हाथी और बंदरों को छोड़ अन्य जीवों की गणना ही नहीं हो पाई है। वन विभाग को पता ही नहीं कि प्रदेश में वन्य जीवों की आबादी घट रही है या बढ़ रही है।
वन्य जीवों की गणना नहीं होने से राज्य में कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, भूरा भालू, लाल लोमड़ी, भरल (ब्लू शीप), गिद्ध, मोनाल सहित 20 से अधिक लुप्त प्राय प्रजातियों की संख्या का वन विभाग को भी पता नहीं है। ऐसे में यदि विभाग इनके संरक्षण की कोई कार्ययोजना बनाता भी है तो उसे कैसे धरातल पर उतारा जाएगा, यह बड़ा सवाल है। पशु प्रेमियों ने भी इस बात को लेकर हैरानी जताई है, जब विभाग के पास वन्य जीवों का सही आंकड़ा ही नहीं है, ऐसे में इनके संरक्षण के प्रयासों का मूल्यांकन कैसे और किस आधार पर किया जा रहा है।
- वर्ष 2018 में हुई गणना के अनुसार प्रदेश में बाघ की संख्या 442 है।
- वर्ष 2020 की गणना के अनुसार प्रदेश में हाथी की संख्या 2026 है।
- वर्ष 2021 में हुई गणना के अनुसार प्रदेश में बंदरों की संख्या 110481 है।
- वर्ष 2015 की गणना के सापेक्ष बंदरों की संख्या में 3500 (24.55 प्रतिशत) की कमी आई है।
मुख्य वन्य जीव- वर्ष 2003 - वर्ष 2005 - वर्ष 2008
बाघ - 245 - 241 - 178
हाथी - 1582- 1510 - 1346
गुलदार - 2092 - 2105 - 2335
काला भालू - 1904 - 1678 - 1935
भूरा भालू - 05 - 30 - 14
स्लोथ भालू - 00 - 240 - 172
कस्तूरी मृग - 274 - 279 - 376
बारहसिंघा - 0 - 34 - 100
सांभर - 7138 - 10888 - 9533
चीतल- 41076 - 53386 - 53730
पांडा- 513 - 290 - 313
काकड़- 9021 - 10555 - 10111
भरल - 46 - 1991 - 596
थार - 688 - 1600 - 2235
घुरल - 9201 - 9803 - 9837
मगरमच्छ - 00 - 16 - 123
घड़ियाल - 00 - 08 - 231
नीलगाय - 5613 - 10070 - 7877
सिराऊ - 16 - 142- 358
जंगली सूअर - 00 - 32613 - 34914
गिद्ध - 00 - 5066 - 5066
काइट - 00 - 1881 - 1881
चील - 00- 811 - 811
यह बात सही है कि बीते 14 सालों से प्रदेश में वन्य जीवों की गणना नहीं हो पाई है। प्रमुख वन्य जीवों की गणना समय-समय पर होती रही है। आमतौर पर हाथी, बाघ जैसे बड़े जानवरों की गणना को आधार मानकर अन्य जीवों की गणना का तुलनात्मक अध्ययन कर लिया जाता है। हालांकि इस बात का भी परीक्षण कराया जा रहा है कि राज्य की आवश्यकता के अनुसार अन्य वन्य जीवों की गणना की जाए। फिलहाल मध्य हिमालय क्षेत्र में गुलदार की गणना का कार्य जारी है। - डॉ. समीर सिन्हा, मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक, वन विभाग
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