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कोटद्वार : हाथियों की धमक से सहमे लोग, आंगन में रखे बर्तन व कार कर दी क्षतिग्रस्त

Thu, 19 Dec 2019 08:46 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 19 Dec 2019 08:46 AM IST
सार

  • लोगों ने वन विभाग से लगाई सुरक्षा की गुहार

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wild elephant break car in kotdwar
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मंगलवार रात को क्षेत्र में हाथियों के झुंड को देखकर ग्रास्टनगंज के लोगों की तीन घंटे तक सांसें अटकी रही। हाथियों ने लोगों के आंगन में धमककर उनकी दीवार तोड़ी, बर्तन फोड़े, पाइप लाइन उखाड़ी, पेड़ तोड़ते हुए क्यारी चट की और कार को क्षतिग्रस्त कर दिया। हाथियों की धमक से लोग सहमें हुए हैं, उन्होंने वन विभाग से सुरक्षा की गुहार लगाई है। 

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मंगलवार रात को ग्रास्टनगंज में उस समय दहशत फैल गयी जब रात के 11 बजे आठ हाथियों का झुंड लैंसडौन वन प्रभाग के जंगल से ग्रास्टनगंज में घुस गया। हाथियों ने रतन सिंह भंडारी की दीवार तोड़ डाली। दीवार टूटने की आवाज सुनकर लोग जग गए। उन्होंने घरों के बाहर देखा तो उनके आंगन में आठ विशालकाय हाथी और उनके बच्चे टहलते नजर आए।
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हाथी के झुंड को देखते ही लोगों के होश उड़ गए। उन्होंने घर के अंदर दुबकने में ही भलाई समझी। देखते ही देखते हाथियों ने सिद्धार्थ नैथानी की पाइप लाइन उखाड़ डाली और आंगन में खड़ी कार को पलटने लगा। हाथी ने कार पर दांत मारकर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। देववृत नैथानी ने हिम्मत दिखाते हुए अपनी छत पर चढ़कर हाथी की तरफ टार्च चमकाते हुए पटाखा फोड़ा तब जाकर हाथी वहां से हटा।
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इसके बाद हाथियों का झुंड भरोसानंद धस्माना के आंगन में धमक गया। उन्होंने घर के आगे आम और केले के पेड़ और सब्जी की क्यारी चट की। आंगन में रखी पानी की टंकी को गिरा दिया। इसके बाद हाथी रतन सिंह भंडारी और जेआर देवरानी के आंगन में आंगन में रखे बर्तन फोड़ दिए। लोगों ने अपनी छतों पर चढ़कर हो हल्ला और पटाखे फोड़कर रात के दो बजे किसी प्रकार हाथियों को जंगल में खदेड़ा। 

जंगल से निकलकर घरों के आगे धमक रहे हाथी

समाजसेवी सिद्धार्थ नैथानी ने वन विभाग पर लोगों का जीवन संकट में डालने का आरोप लगाया। कहा कि आए दिन हाथी जंगल से निकलकर उनके घरों के आगे धमक रहे हैं। कई बार विभाग के आधा अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इसकी शिकायत की गई, लेकिन हाथी को रोकने व लोगों की सुरक्षा को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

शाम ढलते ही लोग हाथी के डर से घरों में कैद होने को मजबूर हैं। उधर, कोटद्वार रेंज अधिकारी बीबी शर्मा ने बताया कि उन्हें ग्रास्टनगंज में हाथियों की धमक की जानकारी नहीं है। नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में वन कर्मियों की गश्त बढ़ाई जाएगी। 

हाथियों ने रौंदी गन्ने की फसल 

वहीं हरिद्वार जिले के कटेबड़, डालूपुरी, चमरिया और  लालढांग के जंगल से लगे खेतों में शाम ढलते ही हाथी आ धमकते हैं। अब तक किसानों की कई बीघा फसल को हाथी रौंद चुके हैं। चिड़ियापुर रेंज के रवासन क्षेत्र में बीती रात काली मंदिर के पास बस्ती से लगे कई खेतों में हाथी ने पूरी रात गन्ने की फसल को चट कर दिया। किसान मोहम्मद हनीफ, नसीम, कलुवा, रघुवीर सिंह नेगी, सूदन डबराल, बुंदु, मोहम्मद महबूब आदि का कहना है कि वन विभाग हाथियों की आवाजाही पर रोक नहीं लगा पा रहा है। 

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