फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Wild elephant become normal by Crawling in haridwar

अब इस तरह 'शरीफ' बनेंगे बिगड़ैल हाथी, उत्तर भारत में पहली बार शुरू हुई यह व्यवस्था

Thu, 03 Jan 2019 09:11 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal हिमांशु भट्ट, अमर उजाला, हरिद्वार
हिमांशु भट्ट, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 03 Jan 2019 09:11 AM IST
विज्ञापन
Wild elephant become normal by Crawling in haridwar
elephant

दक्षिण भारत में क्रॉल में बंद हाथी को प्रशिक्षित होते हुए तो आपने देखा होगा, लेकिन उत्तर भारत में पहली बार हाथियों को प्रशिक्षित करने के लिए क्रॉल बनाए गए हैं। ये क्रॉल हरिद्वार में राजाजी टाइगर रिजर्व के मीठावाली कैंप में तीन लोगों को मौत के घाट उतारने वाले टस्कर हाथी को प्रशिक्षण देने के लिए बनाया गया है। साथ ही महावत को विशेष रूप से असम से बुलाया गया है।  

विज्ञापन


भेल क्षेत्र में तीन लोगों को मौत के घाट उतारने वाले बिगड़ैल टस्कर हाथी को बीते माह वन विभाग ने ट्रैंकुलाइज कर मीठावाली कैंप में बांधकर रखा था। वन विभाग के विशेषज्ञों ने हाथी के बिगडै़ल व्यवहार की जांच की। दो हथिनी राधा और रंगीली के माध्यम से भी टस्कर के व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास किया गया, जो काफी हद तक कारगर रहा, लेकिन टस्कर को प्रशिक्षित करना विभाग के लिए टेढ़ी खीर है।
विज्ञापन


हाथी की सुरक्षा और सरलता से प्रशिक्षित करने के लिए विभाग ने क्रॉल बनाने की योजना बनाई। क्रॉल बनाने का प्रशिक्षण लेने के लिए राजाजी टाइगर रिजर्व के वार्डन अजय शर्मा को बेंगलुरू के बन्नेरुघट्टा नेशनल पार्क भेजा गया था। वहां उन्होंने बारीकी से क्रॉल बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। शर्मा दो दिन पूर्व ही हरिद्वार पहुंचे, जिसके बाद मीठावाली कैंप में क्रॉल बनाया गया। अब राजाजी टाइगर रिजर्व द्वारा मोतीचूर, चीला, चीलावाली, रानीपुर सहित अन्य रेंजों में हाथियों को प्रशिक्षित करने के लिए क्रॉल बनाने की योजना बनाई जा रही है।  

विज्ञापन
विज्ञापन

क्या होता है क्रॉल 

Wild elephant become normal by Crawling in haridwar
हाथियों के लिए बनाया गया बाड़ा

क्रॉल बनाने के लिए लकड़ियों और बल्लियों का उपयोग किया जाता है। बल्लियों से एक कमरे के समान बाड़ा बनाया जाता है, जिसे आवश्यकता के अनुरूप छोटा व बड़ा किया जा सकता है। क्रॉल में महावत हाथी के ऊपर बैठकर आसानी से उसे प्रशिक्षित कर सकता है। क्रॉल में हाथी ज्यादा हरकत नहीं कर सकता। इसीलिए उसे प्रशिक्षित करने में आसानी होती है और सुरक्षा की दृष्टि से भी ये काफी कारगर है। 

उत्तर भारत में पहली बार हाथी को ट्रेन्ड करने के लिए क्रॉल बनाया गया है। महावत को असम से बुलाया गया है। अन्य रेंज में भी क्रॉल बनाने की योजना है। प्रशिक्षण के लिए विभाग द्वारा हाथी को गश्त के लिए उपयोग में लाया जाएगा। 

-सनातन सोनकर, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed