सेना के इस नियम से शहीद बेटे पर पिता का हक नहीं
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जिस इकलौते बेटे को उंगली पकड़ कर दुश्मनों से लोहा लेना सिखाया आज उस बेटे को मरणोपरांत मिले सम्मान का हक भी उस पिता को नहीं है। कारगिल युद्ध का नाम लेते ही रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल बीआरएस गुप्ता का गला भर आता है।
बेटे मेजर विवेक गुप्ता के महावीर चक्र को नहीं देख पाने का गम उनके सताता है। कर्नल गुप्ता के दिल में उन सैन्य नियम कायदों को लेकर टीस है जिसके तहत सारा सम्मान बेटे की उस पत्नी को मिला है जो अब दूसरी शादी कर अपना परिवार बसा चुकी है।
सैन्य नियमों की बात करें तो पत्नी को हक मिलना वाजिब है लेकिन पिता के दिल में जवान बेटे की शहादत कायदों की सीमा में नहीं बंध सकता।
शहीद होने से पहले होने वाला था तलाक
कर्नल गुप्ता का कहना है कि कारगिल युद्ध से पहले विवेक और पत्नी के तलाक का वाद अदालत में दायर हो चुका था, लेकिन फैसला आने से पहले विवेक शहीद हो गया। जिस पत्नी से विवेक का तलाक होने वाला था आज बेटे का मेडल सहित सभी लाभ उसी को मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मैंने इस संबंध में राष्ट्रपति को पत्र लिखा लेकिन उन्होंने कोई जवाब तक नहीं दिया। मेरी सबसे बड़ी पीड़ा है कि यह कैसे नियम है जिसमें पिता अपने बेटे की शहादत के उस सम्मान से दूर है जबकि सबसे बड़ा हकदार उसे होना चाहिए।
उन्होंने साफ किया कि उन्हें बेटे की पेंशन या मिले आर्थिक लाभ बिल्कुल नहीं चाहिए। उन्होंने इस नियम पर एक सवाल खड़ा किया है कि जब बेटे की पत्नी दूसरी शादी कर चुकी है तो उसे लाभ क्यों दिए जा रहे हैं। ऐसे केस में सरकार को पत्नी को दिए जाने वाले समस्त लाभ समाप्त कर देने चाहिए।
शहादत को सम्मान की दरकार
कारिगल युद्ध में अलंकृत सैनिकों के परिजनों का दुख सिर्फ शहादत के सम्मान में होने वाली सरकारी चूक दुखता है। युद्ध के बाद केंद्र के साथ राज्य सरकारों ने घोषणाओं के पिटारे खोले और पूरे भी किये।
पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, ढाई बीघा भूमि और नकद सहायता दी गई, लेकिन आज भी यह उस मां के लिए कुछ नहीं जिसने अपना बेटा खो दिया।
वीर चक्र से सम्मानित नाइक ब्रिज मोहन सिंह के भाई देवेंद्र सिंह ने बताया कि मरणोंपरांत सभी आर्थिक लाभ परिवार को मिले, लेकिन उनके नाम से तुनुवाला में एक स्कूल खोलने की घोषणा की थी जो आज तक पूरी नहीं हुई। परिवार को ढाई बीघा भूम दी थी, जिसके लिए रास्ता तक नहीं मिला है।
आज भी है सुविधाओं का इंतजार
मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित नायक जगत सिंह के बेटे वेद प्रताप ने बताया कि वह दो भाई है, लेकिन सेना में भर्ती नहीं हुए। उन्होंने कहा कि जिस समय पिता शहीद हुए सब छोटे थे तो पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी नहीं मिली।
कोई बड़ा बुजुर्ग नहीं था इसलिए होश संभालने के बाद आवेदन दिया, लेकिन उसपर आज तक सुनवाई नहीं हुई।
वीर चक्र से सम्मानित नायक कश्मीर सिंह की पत्नी सुभाषी देवी ने बताया कि परिवार में आर्थिक रूप से समस्याएं नहीं है। दो बेटे हैं एक पेट्रोल पंप संभालता है तो दूसरा पढ़ रहा है, लेकिन फौज में कोई नहीं गया।