फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   wife got all award of martyr

सेना के इस नियम से शहीद बेटे पर पिता का हक नहीं

Sun, 27 Jul 2014 01:01 AM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 27 Jul 2014 01:01 AM IST
विज्ञापन
wife got all award of martyr

जिस इकलौते बेटे को उंगली पकड़ कर दुश्मनों से लोहा लेना सिखाया आज उस बेटे को मरणोपरांत मिले सम्मान का हक भी उस पिता को नहीं है। कारगिल युद्ध का नाम लेते ही रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल बीआरएस गुप्ता का गला भर आता है।

विज्ञापन


बेटे मेजर विवेक गुप्ता के महावीर चक्र को नहीं देख पाने का गम उनके सताता है। कर्नल गुप्ता के दिल में उन सैन्य नियम कायदों को लेकर टीस है जिसके तहत सारा सम्मान बेटे की उस पत्नी को मिला है जो अब दूसरी शादी कर अपना परिवार बसा चुकी है।
विज्ञापन


सैन्य नियमों की बात करें तो पत्नी को हक मिलना वाजिब है लेकिन पिता के दिल में जवान बेटे की शहादत कायदों की सीमा में नहीं बंध सकता।

शहीद होने से पहले होने वाला था तलाक

wife got all award of martyr

कर्नल गुप्ता का कहना है कि कारगिल युद्ध से पहले विवेक और पत्नी के तलाक का वाद अदालत में दायर हो चुका था, लेकिन फैसला आने से पहले विवेक शहीद हो गया। जिस पत्नी से विवेक का तलाक होने वाला था आज बेटे का मेडल सहित सभी लाभ उसी को मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मैंने इस संबंध में राष्ट्रपति को पत्र लिखा लेकिन उन्होंने कोई जवाब तक नहीं दिया। मेरी सबसे बड़ी पीड़ा है कि यह कैसे नियम है जिसमें पिता अपने बेटे की शहादत के उस सम्मान से दूर है जबकि सबसे बड़ा हकदार उसे होना चाहिए।

उन्होंने साफ किया कि उन्हें बेटे की पेंशन या मिले आर्थिक लाभ बिल्कुल नहीं चाहिए। उन्होंने इस नियम पर एक सवाल खड़ा किया है कि जब बेटे की पत्नी दूसरी शादी कर चुकी है तो उसे लाभ क्यों दिए जा रहे हैं। ऐसे केस में सरकार को पत्नी को दिए जाने वाले समस्त लाभ समाप्त कर देने चाहिए।

शहादत को सम्मान की दरकार

wife got all award of martyr

कारिगल युद्ध में अलंकृत सैनिकों के परिजनों का दुख सिर्फ शहादत के सम्मान में होने वाली सरकारी चूक दुखता है। युद्ध के बाद केंद्र के साथ राज्य सरकारों ने घोषणाओं के पिटारे खोले और पूरे भी किये।

पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, ढाई बीघा भूमि और नकद सहायता दी गई, लेकिन आज भी यह उस मां के लिए कुछ नहीं जिसने अपना बेटा खो दिया।

वीर चक्र से सम्मानित नाइक ब्रिज मोहन सिंह के भाई देवेंद्र सिंह ने बताया कि मरणोंपरांत सभी आर्थिक लाभ परिवार को मिले, लेकिन उनके नाम से तुनुवाला में एक स्कूल खोलने की घोषणा की थी जो आज तक पूरी नहीं हुई। परिवार को ढाई बीघा भूम दी थी, जिसके लिए रास्ता तक नहीं मिला है।

विज्ञापन

आज भी है सुविधाओं का इंतजार

wife got all award of martyr

मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित नायक जगत सिंह के बेटे वेद प्रताप ने बताया कि वह दो भाई है, लेकिन सेना में भर्ती नहीं हुए। उन्होंने कहा कि जिस समय पिता शहीद हुए सब छोटे थे तो पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी नहीं मिली।

कोई बड़ा बुजुर्ग नहीं था इसलिए होश संभालने के बाद आवेदन दिया, लेकिन उसपर आज तक सुनवाई नहीं हुई।

वीर चक्र से सम्मानित नायक कश्मीर सिंह की पत्नी सुभाषी देवी ने बताया कि परिवार में आर्थिक रूप से समस्याएं नहीं है। दो बेटे हैं एक पेट्रोल पंप संभालता है तो दूसरा पढ़ रहा है, लेकिन फौज में कोई नहीं गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed