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आखिर क्यों झुक रहे बारहवीं शताब्दी के बने शिव मंदिर, जानिए इसके पीछे का रहस्य

Thu, 30 Nov 2017 08:03 AM IST
दीप जोशी/ अमर उजाला, अल्मोड़ा
दीप जोशी/ अमर उजाला, अल्मोड़ा Updated Thu, 30 Nov 2017 08:03 AM IST
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 Why the Twelfth Century Shiva Temple Leaning
temple - फोटो : amar ujala

बानठोक के प्रसिद्ध नौ देवल मंदिर समूह के छह झुके हुए मंदिर सीधे हो गए। यह मंदिर सौ साल से भी अधिक समय से झुके हुए थे, लेकिन अब यह मंदिर सीधे हो गए.. जानिए क्या है रहस्य..

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कत्यूरी शासन काल में 12वीं शताब्दी में बने ये ऐतिहासिक मंदिर क्षेत्रवासियों की आस्था के केंद्र हैं। अल्मोड़ा से करीब 30 किमी दूर बमनस्वाल के निकट बानठोक नामक स्थान पर नौ देवल मंदिर समूह है।
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मंदिर समूह के सभी नौ मंदिर नागर शैली में बने हैं। बरतोली और खोली नदी के संगम में स्थित यह सभी शिव मंदिर हैं। इनकी ऊंचाई 4.50 से 13 मीटर तक हैपुरातत्व विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इन मंदिरों का निर्माण 12वीं शताब्दी में कत्यूरी शासनकाल में हुआ। 1993 में राज्य पुरातत्व विभाग ने इन्हें संरक्षण में ले लिया। इनमें से छह मंदिर 1993 से पहले से ही झुके हुए थे।
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पुरातत्व अधिकारियों के मुताबिक भूमि के धंसाव के कारण ये मंदिर 100 साल से भी अधिक समय पहले झुक गए थे। पुरातत्व विभाग ने सुरक्षा दीवार बनवाने के बाद मंदिरों को सीधा करने की योजना तैयार की।

बानठोक के प्रसिद्ध नौ देवल मंदिर समूह के छह झुके हुए मंदिरों को पुरातत्व विभाग ने सीधा कर दिया है। इसी साल जून में पुरातत्व विभाग ने 25 लाख रुपये की लागत से इन मंदिरों को सीधा करने का काम शुरू किया था।

इसमें दौलपुर (राजस्थान) के कारीगरों को लगाया गया था। अंतिम चरण में कुछ सुंदरीकरण आदि का काम अगले दो माह में पूरा कर लिया जाएगा। इस साल शुरू में 25 लाख रुपये की लागत की इस योजना को शासन से मंजूरी मिली और जून 2017 में मंदिरों को सीधा करने का काम शुरू हुआ

इस तकनीक से किया झुके मंदिरों को सीधा करने की तकनीक

 Why the Twelfth Century Shiva Temple Leaning
temple - फोटो : amar ujala
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि झुके हुए मंदिरों को सीधा करने के लिए धौलपुर के रोहित कुमार के नेतृत्व में कारीगरों की टीम पिछले छह माह से लगी थी। यह कार्य ग्रामीण निर्माण विभाग के माध्यम से कराया जा रहा है। सभी छह मंदिरों को सीधा करने का काम पूरा हो चुका है।

क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सीएस चौहान ने बताया कि मंदिरों को सीधा करने के लिए मंदिरों के पत्थरों को एक-एक करके चेन पुली के सहारे उतारा गया। उतारने के साथ ही हर पत्थर पर नंबरिंग कर दी गई।

साथ ही उनमें पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण दिशा का भी अंकन किया गया ताकि उन्हें दोबारा ठीक उसी तरह लगाया जा सके। मंदिरों की बुनियाद तक सारे पत्थर हटाने के बाद उस स्थल को समतल किया गया।

फिर पत्थरों को उसी क्रम में फिट किया गया जिस क्रम से उन्हें हटाया गया था। डॉ. चौहान ने बताया कि सभी छह मंदिरों में कोई पत्थर खराब नहीं था इसलिए कोई नया पत्थर नहीं लगाया गया।

उतारे गए सारे पत्थरों को इस तरह फिट कर दिया गया कि मंदिर हू-ब-हू पहले की तरह बन गए, लेकिन झुकाव खत्म हो गया। इस तकनीक के जरिये मंदिरों की नाप में भी इंच भर का अंतर नहीं आता।
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