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Uttarakhand: भू कानून...आधार कार्ड में दर्ज पते ने प्रदेश के कई लोगों को बनाया बाहरी, खतरे में पुश्तैनी जमीन

Fri, 21 Mar 2025 11:16 AM IST
रेनू सकलानी अश्वनी त्रिपाठी, अमर उजाला, देहरादून
अश्वनी त्रिपाठी, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 21 Mar 2025 11:16 AM IST
सार

पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर भूकानून का पालन कराने के लिए जिला प्रशासन हरकत में आया। जिलाधिकारी सविन बंसल ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देश देकर कहा कि जमीनों की खरीद में नियमों के उल्लंघन की रिपोर्ट तैयार की जाए।

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While enforcing land laws addresses of other states in Aadhar card made many people of state outsiders
डीएम सविन बंसल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भू कानून का पालन कराने के दौरान आधार कार्ड में दर्ज गैर राज्यों के पते ने प्रदेश के ही कई लोगों को बाहरी बना दिया। रोजगार या नौकरी के लिए बाहर गए कई लोग भू कानून की चपेट में आ गए। जिला प्रशासन ने इन सभी लोगों को राज्य से बाहर का मानते हुए उनकी पुश्तैनी जमीनों पर सरकारी कब्जा लेने का आदेश जारी कर दिया।

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अब सुनवाई के दौरान राज्य के यह भूस्वामी अपने दस्तावेज दिखाकर उत्तराखंड राज्य का निवासी होने का प्रमाण दे रहे हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर भूकानून का पालन कराने के लिए जिला प्रशासन हरकत में आया। जिलाधिकारी सविन बंसल ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देश देकर कहा कि जमीनों की खरीद में नियमों के उल्लंघन की रिपोर्ट तैयार की जाए।
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नियमों को ताक पर रखकर जमीन खरीद
ऐसे बाहरी लोगों की सूची तैयार की जाए, जिन्होंने तथ्य छिपाकर देहरादून व आसपास के इलाकों में 250 वर्ग मीटर से अधिक आवासीय या नियमविरुद्ध कृषि या औद्योगिक भूमि क्रय की। जांच में सामने आया कि 393 लोगों ने जिले में नियमों को ताक पर रखकर जमीन खरीद की। इसमें करीब 300 मामलों में कार्यवाही भी कर दी गई। करीब 200 हेक्टेयर से अधिक भूमि को राज्य सरकार में निहित कर नोटिस जारी करते हुए अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया। इस दौरान यह सामने आया कि राज्य के कई निवासी भी इस सूची के शिकार हो गए हैं।

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पता बदलते ही बदल गया कानून

दरअसल हजारों की संख्या में उत्तराखंड के लोग राज्य से बाहर जाकर रोजगार या काम धंधा कर रहे हैं। बाहर पांच-सात साल गुजार चुके लोग स्थानीय कारणों से अपने आधार कार्ड में स्थानीय पता दर्ज करा चुके हैं, जब प्रशासन ने ऐसे भूस्वामियों को ट्रेस किया तो आधार कार्ड में दर्ज पते से ही जांच की। इसके आधार पर ही यह तय किया कि कौन भूस्वामी राज्य का है, कौन राज्य से बाहर का निवासी। राज्य से बाहर का पता दर्ज होने के कारण बड़ी संख्या में राज्यवासियों के लिए नियम बदल गए और उन्हें स्थानीय दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर सफाई देनी पड़ी कि जिस जमीन पर सरकार कब्जा लेने की तैयारी कर रही है, दरअसल वह उनके पुरखों की जमीन है।

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भू कानून का उल्लंघन करने वालों की सूची के आधार पर सभी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है, राज्य से बाहर का निवासी साबित होने के बाद ही जमीन पर सरकार का कब्जा लिया जाएगा। -सविन बंसल, डीएम, देहरादून

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