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जहां मिला जीवन, वहीं के लिए कर दी देहदान
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शरीर दान करने के लिए दून मेडिकल कॉलेज में फॉर्म भरते राहुल गुप्ता।
- फोटो : DEHRADUN
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नेहरू कालोनी जी ब्लॉक निवासी राहुल गुप्ता (63) ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के छात्रों की पढ़ाई के लिए अपनी देह दान की है। खास बात यह है कि राहुल का जन्म दून अस्पताल में ही हुआ था। इसलिए राहुल को लगा कि जहां उनका जन्म हुआ उसी अस्पताल से जुड़े कॉलेज के लिए देहदान की जानी चाहिए। शुक्रवार को उन्होंने परिजनों के साथ दून मेडिकल कॉलेज के एनॉटामी विभाग में जाकर देहदान की जरूरी प्रक्रिया पूरी की।
12वीं पास राहुल गुप्ता ने बताया कि 1987 में स्कूल ऑफ योगा मुंगेर (बिहार) में स्वामी सत्यानंद सरस्वती से उन्होंने दीक्षा ली थी। लगभग तीन साल संन्यास दीक्षा लेने के बाद वापस देहरादून आए। फिर 1992 में मसूरी के क्यारकुली गांव से तीन किलोमीटर दूर आश्रम बनाया और वहां रहने लगे। राहुल गुप्ता बताते हैं कि 1996 में कुछ प्रॉपर्टी डीलर ने उन्हें जान से मारने की धमकी देकर वहां से निकाल दिया। इसके बाद वह डेढ़ साल बद्रीनाथ में रहकर दून वापस आए। परिवार का भरण पोषण करने के लिए दून-मसूरी के बीच अपनी टैक्सी चलाई। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना, एनॉटॉमी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. एमके पंत और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जौली अग्रवाल ने बताया कि लोगों को देहदान के लिए प्रेरित करने के लिए कॉलेज की वेबसाइट पर जानकारी और फार्म भी दिया गया है।
शुक्रवार को डॉ. जौली अग्रवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पियूष, डॉ. राजीव, एनके पांझा व नीरज ने राहुल के देहदान की जरूरी प्रक्रिया पूरी कर फार्म भराया। राहुल गुप्ता ने कहा कि वह फिर से क्यारकूली में आश्रम में रहेंगे। अगर उनकी हत्या या किन्हीं और कारणों से मौत हो जाती है तो उनकी देह अस्पताल को सौंप दी जाए।
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12वीं पास राहुल गुप्ता ने बताया कि 1987 में स्कूल ऑफ योगा मुंगेर (बिहार) में स्वामी सत्यानंद सरस्वती से उन्होंने दीक्षा ली थी। लगभग तीन साल संन्यास दीक्षा लेने के बाद वापस देहरादून आए। फिर 1992 में मसूरी के क्यारकुली गांव से तीन किलोमीटर दूर आश्रम बनाया और वहां रहने लगे। राहुल गुप्ता बताते हैं कि 1996 में कुछ प्रॉपर्टी डीलर ने उन्हें जान से मारने की धमकी देकर वहां से निकाल दिया। इसके बाद वह डेढ़ साल बद्रीनाथ में रहकर दून वापस आए। परिवार का भरण पोषण करने के लिए दून-मसूरी के बीच अपनी टैक्सी चलाई। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना, एनॉटॉमी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. एमके पंत और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जौली अग्रवाल ने बताया कि लोगों को देहदान के लिए प्रेरित करने के लिए कॉलेज की वेबसाइट पर जानकारी और फार्म भी दिया गया है।
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शुक्रवार को डॉ. जौली अग्रवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पियूष, डॉ. राजीव, एनके पांझा व नीरज ने राहुल के देहदान की जरूरी प्रक्रिया पूरी कर फार्म भराया। राहुल गुप्ता ने कहा कि वह फिर से क्यारकूली में आश्रम में रहेंगे। अगर उनकी हत्या या किन्हीं और कारणों से मौत हो जाती है तो उनकी देह अस्पताल को सौंप दी जाए।
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