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Weather Today: भूधंसाव की चपेट में आया ऊखीमठ-चोपता हाईवे का 500 मीटर हिस्सा, दून में भूस्खलन से दुकानें ढही

Sun, 16 Aug 2020 10:28 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 16 Aug 2020 10:28 PM IST
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Weather Today Forecast Report Uttarakhand: Badrinath, gangotri and Dehradun mussoorie road Closed, Heavy Rainfall Orange Alert
हाईवे बंद - फोटो : अमर उजाला

शनिवार रात को हुई तेज बारिश के बाद आज मसूरी-देहरादून मार्ग पर कोलूखेत पानी वाली बैंड के पास भारी भूस्खलन हो गया। इसके बाद से ही दून-मसूरी मार्ग बंद हो गया है। इससे पहले भी मसूरी-देहरादून कोलू खेत पानी वाले बैंड के पास मार्ग का करीब 60 मीटर हिस्सा ढह जाने से रास्ता बंद हो गया था। 

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वहीं, तुंगनाथ व मंडल घाटी के गांवों को जोड़ने के साथ ही बदरी-केदार यात्रा का वैकल्पिक मार्ग कुंड-ऊखीमठ-चोपता-गोपेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग का पांच सौ मीटर हिस्सा भूधंसाव की चपेट में आ गया है। ताला में हाईवे पर जगह-जगह मोटी दरारें पड़ चुकी हैं, जिससे वाहनों का संचालन तो दूर पैदल आवाजाही में भी निरंतर खतरा बना हुआ है।
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तहसील मुख्यालय से 11 किमी दूर ग्राम पंचायत उषाड़ा के ताला में कुुंड-ऊखीमठ-चोपता-गोपेश्वर राजमार्ग भूधंसाव से बदहाल हो गया है। सड़क के पांच सौ मीटर क्षेत्र में जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं, जो दिनोंदिन चौड़ी हो रही हैं। एनएच द्वारा मशीनों की मदद से हाईवे को दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन लगातार हो रहे भूधंसाव से स्थिति खराब हो रही है। यहां हाईवे के ऊपरी तरफ बने भवनों पर भी दरारें पड़ गई हैं।
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दूसरी तरफ ताला-बरंगाली मोटर मार्ग का भी दो सौ मीटर हिस्सा व मोटर पुल भूधंसाव से खतरे की जद में आ गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता महिपाल सिंह बजवाल व प्रदीप सिंह बजवाल ने बताया कि बीते 28 वर्षों से क्षेत्र भूधंसाव का दंश झेल रहा है, लेकिन इस बार, यह विकराल हो गया है, जिससे निजी व सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान हो रहा है। बताया कि दैड़ा के समीप भी राजमार्ग पर पहाड़ी से भारी भूस्खलन से आए दिन मलबा व बोल्डर गिर रहे हैं। एनएच के ईई जितेंद्र कुमार कुमार त्रिपाठी ने बताया कि बरसात के बाद प्राथमिकता से हाईवे के प्रभावित हिस्से का भू-वैज्ञानिकों से सर्वेक्षण कराया जाएगा। इस संबंध में आला अधिकारियों को भी भेज दिया गया है।

कई जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार, आज भी कई जगह भारी बारिश होने के आसार हैं। कई अन्य इलाकों में भी हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, कई जिलों में तेज बारिश होगी। इसके चलते मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

मौसम केंद्र की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले में भारी बारिश का अनुमान है। वहीं, अन्य जगहों पर भी बारिश होगी। मौसम केंद्र निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि कुछ जगहों पर बिजली गिरने का खतरा भी बना है।

दो घंटे बंद रहा बदरीनाथ हाईवे

रविवार को ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर कर्णप्रयाग में उमा माहेश्वर आश्रम के पास शाम को करीब पांच बजे पहाड़ी से मलबा व बोल्डर आ गए। एनएचआईडीसीएल के ईई शशिकांत मणि ने कहा कि चार जेसीबी की मदद से मलबा हटाकर हाईवे पर वाहनों की आवाजाही शुरू की गई। 

गत रात्रि को भारी बारिश से देवपुरी के कालूखर्क तोक में श्याम सिंह की दो मंजिला मकान का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। पीड़ित ने जिला पंचायत सदस्य अवतार सिंह पुंडीर, प्रधान महेंद्र गुर्साइं से मदद की गुहार लगाई है। जिला पंचायत सदस्य अवतार पुंडीर ने बताया कि कालूखर्क में बचन सिंह, चंदर सिंह, जितेंद्र सिंह, गबर सिंह के मकान को भी क्षति पहुंची है। 

नदी में बने टापू पर फंसे दो ग्रामीण
देवलगढ़ नदी पर सिराली गांव के नीचे बने टापू पर ब्यूरा के दो ग्रामीण फंस गए, जिन्हें आपदा प्रबंधन टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। रविवार सुबह ग्राम ब्यूरा के दो ग्रामीण भगत सिंह (45) और प्रदीप सिंह (22) नदी पार कर रहे थे। इस दौरान अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से वे नदी पार नहीं कर सके और नदी की दो धाराओं के बीच बने टापू पर फंस गए।

सूचना पर निकट गांव के ग्रामीण मदद के लिए पहुंचे, लेकिन नदी का बहाव तेज होने के कारण वे कुछ नहीं कर सके। सूचना पर थाना धुमाकोट से आपदा प्रबंधन टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। थानाध्यक्ष प्रमोद उनियाल ने बताया कि सूचना मिलने पर रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजा गया था। दोनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। 

ढांग पर बनी प्रेमनगर में तीन दुकानें ढहीं

शनिवार शाम प्रेमनगर में ढांग पर बनीं तीन दुकानें भरभरा कर ढह र्गईं। हादसे के समय नीचे सड़क पर काफी ट्रैफिक चल रहा था। गनीमत रही कि कोई मलबे की चपेट में नहीं आया। बहरहाल अभी भी अन्य दुकानों के ढहने का खतरा बना हुआ है, लेकिन कोई सुध नहीं ली जा रही है। इस बात को लेकर पुश्ता निर्माण करा रहे ठेकेदार और व्यापारियों के बीच नोकझोंक भी हुई। 

बता दें, दो साल पहले हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने प्रेमनगर में अतिक्रमण हटाया था। इसके बाद चकराता रोड को दोनों तरफ से चौड़ा किया जा रहा है। इसके लिए दोनों तरफ एनएच पुश्तों का निर्माण कर रहा है। जहां पुश्तों का निर्माण किया जा रहा है, उसके ऊपर क्षतिग्रस्त आधी-अधूरी दुकानें भी हैं। पुश्ते के लिए जब जेसीबी द्वारा ढांग को काटा जा रहा है तो दुकानों के नीचे की मिट़टी खिसक रही है।

इसके कारण दुकानें गिर रही हैं। शनिवार शाम को करीब चार बजे भी यहां अतुल की मोबाइल शॉप, छतर सिंह, और जगदीश की दुकान ढह गई। उधर, दुकानें गिरने के बाद जब एनएच का ठेकेदार मलबा उठाने के लिए आया तो दुकानदारों की उसके साथ काफी बहस भी हुई। दुकानदारों में अनियमित ढंग से खुदाई का आरोप लगाया है। 

जान जोखिम में डाल रहे दुकानदार
प्रेमनगर चौक से लेकर आगे न्यू मिट्ठी बेहड़ी तक ढांग पर बनी दुकानें कभी भी गिर सकती हैं, लेकिन प्रशासन के चेतावनी के बाद भी कोई भी दुकानदार इन दुकानों से हटने को तैयार नहीं है। जुगाड़ लगाकर वह इन दुकानों में ही रह रहे हैं। इससे कि कभी भी यहां कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जहां पर पुश्ता बन रहा है, वहां भी दुकानों ने पुश्ते के ऊपर फिर से दुकानें खड़ी कर दी हैं। 

नौ दिन में बनाया 180 फीट लंबा मोटर पुल

आपदा में 27 जुलाई की रात बह गए मोटर पुल के स्थान पर बीआरओ ने नया पुल बना दिया है। 180 फीट लंबे पुल को बीआरओ ने महज नौ दिन में तैयार कर लिया है। रविवार से इस पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है।

27 जुलाई की रात आई भीषण आपदा में जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क पर बरम चामी के पास स्थित दुगड़ीगाड़ का मोटर पुल बह गया था। इसके स्थान पर गहरी खाई बन गई थी। लुम्ती समेत अन्य गांवों में फंसे ग्रामीणों को सेना की स्काउट के जवानों ने रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला था। पुल बहने से बंगापानी और मदकोट का शेष दुनिया से संपर्क कट गया था। लोगों को पैदल ही आवागमन करना पड़ रहा था। मदकोट में खाद्यान्न सहित सब्जियों की भी किल्लत पैदा हो गई थी।

सात अगस्त से बीआरओ ने नया पुल बनाने का काम शुरू किया। पुल बनाने में एक पोकलैंड, एक क्रेन और 80 मजदूर लगे। 18 टन वजनी और 180 फुट लंबे पुल को बनाने में बीआरओ को केवल नौ दिन का समय लगा। रविवार को पुल बनकर तैयार हो गया। 

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कमांडर कर्नल सोमेंद्र बनर्जी के नेतृत्व में नवनिर्मित पुल का लोकार्पण रविवार को किया गया। सबसे पहले सुबह 10 बजे पुल से बीआरओ की पोकलैंड गुजरी। इसके बाद वाहनों की आवाजाही शुरू हुई। इस दौरान साइट इंचार्ज ईई पीके रॉय, एई वीके सिन्हा, जेई आजाद सहित बीआरओ के सभी अधिकारी और मजदूर मौजूद रहे। 

दिन भर कटा रहा पहाड़ का मैदान से संपर्क

पहाड़ का मैदानी क्षेत्र टनकपुर से रविवार को पूरे दिन सड़क संपर्क कटा रहा। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर आठ स्थानों (बनले, धौन, स्वांला, बेलखेत, सिन्याड़ी, आठवां मील, भारतोली और सिंगदा) पर मलबा आने से मार्ग पूरे दिन बंद रहा। जेसीबी औैर अन्य मशीनों के पहुंचने के बावजूद मलबे के लगातार गिरते रहने से मार्ग को नहीं खोला जा सका है।

इसके चलते लोगों को दुश्वारी झेलनी पड़ी। शाम को पुलिस ने ध्वनि विस्तारक यंत्र के जरिये मार्ग नहीं खुलने की जानकारी देते हुए लोगों से आगे नहीं बढ़ने की हिदायत दी।  वहीं चंपावत कोतवाली और ककरालीगेट के पास बेरियर लगाकर वाहनों को आगे जाने से भी रोक दिया गया।  आपदा नियंत्रण कक्ष के मुताबिक जगह-जगह मलबे के चलते एनएच पर रविवार सुबह पांच बजे से आवाजाही ठप है।  थल-मुनस्यारी सड़क, फल्याटी, नया बस्ती और रातिगाड़ में दस घंटे बंद रही। कड़ी मशक्कत के बाद सड़क खोली गई। 

बंगापानी तहसील के आपदा प्रभावित लुम्ती गांव में ऊपर से पहाड़ी खिसकने का क्रम जारी है। पहाड़ी खिसकने से 14 परिवार खतरे में आ गए हैं। लुम्ती गांव में 27 जुलाई की रात को भीषण आपदा आई थी। इसके बाद से यहां के लगभग दस परिवार बरम राहत शिविर में रह रहे हैं। बारिश से रामगंगा और काली नदी के उफान पर है। न्याय पंचायत क्वीटी के सैंणराथी, बेडूमहर और किमखेत में भारी भूस्खलन से कई मकान खतरे की जद में आ गए हैं। नाचनी में रामगंगा के सैलाब में यूपीसीएल के छह बिजली के पोल बह गए। इधर, खैरना-मोहान मोटरमार्ग भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हो गई। बार-बार आ रहे मलबे को देखते हुए सड़क को 31 अगस्त तक बंद कर दिया गया है।
 
नदी में फंसे पौड़ी गढ़वाल के दो लोगों की जान बचाई
अल्मोड़ा जिले और पौड़ी गढ़वाल जिले की सीमा पर देवता गधेरे (नदी) के उफान में आने से बकरी चराने गए पौड़ी गढ़वाल जिले के औलेते गांव निवासी भगत सिंह (40) पुत्र घनश्याम सिंह और प्रदीप नेगी (25) पुत्र भगत सिंह नदी के बीचोंबीच फंस गए। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद सल्ट पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से इन दोनों लोगों को सुरक्षित निकाल लिया।

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