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केदारनाथ में बारिश, भूस्खलन की चेतावनी

Sat, 03 May 2014 10:28 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 03 May 2014 10:28 PM IST
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weather change in kedarnath

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुक्रवार से शुरू हो चुकी है। मौसम एक बार फिर चार धाम यात्रियों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। रविवार 4 मई को केदारनाथ के कपाट खुलने वाले हैं।

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आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के तहत स्टेट इमरजेंसी आपरेशन सेंटर (एसईओसी) की तरफ से मौसम के मिजाज के संबंध में अलर्ट जारी किया गया है।

देहरादून, उत्तरकाशी एवं रूद्रप्रयाग जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों में गरजन वाले बादल विकसित होने के साथ ही गरज संग तेज बौछारें पड़ने की आशंका जताई गई है। इस कारण भूस्खलन की आशंका जताई जा रही है।

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पहले फुहारों में बरसात अब मोटी बूंदें

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बता दें कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र गंगोत्री और यमुनोत्री धाम उत्तरकाशी जिले में पड़ते हैं, जबकि पिछले साल जून माह में आपदा का दंश झेल चुका केदारनाथ धाम रूद्रप्रयाग जनपद के अंतर्गत आता है।

अलर्ट मुख्य रूप से आपदा के प्रति बेहद संवेदनशील माने जाने वाले इन्हीं जिलों के लिए है। ऐसे में चार धाम यात्रियों को मौसम के रुख को देखते हुए सावधान रहने की बेहद जरूरत होगी।

पहले मौसम बदलता था तो बदरीनाथ धाम में बरसात एक फुहार के रूप में हुआ करती थी। पर अब बरसात मोटी बूंदों के रूप में हो रही है। बादल गरजते हैं और बिजली भी चमकती है।

बरसात का अनुमान लगाना भी अब मुश्किल हो रहा है। किस समय बरसात हो जाएगी यह कहना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में कई बार बिना बरसात की तैयारी के पहुंचे यात्रियों को भी खासी सर्दी में बरसात का सामना करने पर परेशानी का सामना करना पड़ता है।

बदलते मौसम के लिए रहें तैयार

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वहीं बदरीनाथ धाम में पहुंचने वाले यात्रियों को अब बदलते मौसम के लिए भी तैयार रहना होगा। बदरीधाम करीब 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

इसलिए यहां पर महीनों बर्फ  का साम्राज्य रहना सामान्य बात है। पर पिछले दस सालों से बदरीनाथ की यह तस्वीर बदल रही है।

पिछले 25 साल से धाम में रह रहे मंदिर समिति के सदस्य भागवत मेहता के मुताबिक आज से करीब दस साल पहले तक कपाट खुलने के समय सबसे बड़ी समस्या आसपास पड़ी बर्फ होती थी।

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बर्फ हटाना सबसे बड़ी चुनौती

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कई बार 15-15 फीट तक बर्फ पड़ जाती थी और ऐसे में कपाट खुलने से ठीक पहले बर्फ को हटाना सबसे बड़ी चुनौती होती थी। तीन-तीन दिन की कोशिश के बाद यह काम हो पाता था।

मेहता के मुताबिक अब पिछले दस साल से इसमें बदलाव आया है। अब बर्फ इतनी नहीं है। मंदिर की देखरेख में बर्फ हटाने के बाद रंग रोगन का भी पूरा समय मिल जाता है।

जाहिर है कि मंदिर समिति को मौसम में आ रहे इस बदलाव से थोड़ी राहत महसूस हो रही है। पर मौसम बदलाव का एक रुख और है जो यात्रियों के लिए चुनौती का सबब है। पिछले कुछ समय से बदरीनाथ में भारी बरसात होती है।

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