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बदलते मौसम से ग्लेशियरों की बिगड़ रही ‘सेहत’
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 13 Jan 2016 02:17 PM IST
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बदलते मौसम का असर हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियरों की ‘सेहत’ पर भी पड़ा है। जल्दी-जल्दी मौसम का मिजाज बदलने से इनका आकार सिकुड़ रहा है और ये अंदर से कमजोर भी हो रहे हैं। ग्लेशियरों की ‘बॉडी’ में पानी की कमी हो रही है जिससे ‘स्नो’ के ‘आइस’ में तब्दील होने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।
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ऐसा नहीं है कि बर्फबारी की मात्रा कम हुई है बल्कि मौसम अचानक सर्द और फिर गर्म होने से यह परेशानी बढ़ी है। विज्ञानियों का कहना है कि बर्फबारी और बारिश तो बराबर हो रही है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण फर्क यह आया है कि अब एक बार बहुत अधिक बर्फबारी और बारिश हो जाती है, इसके बाद मौसम खुल जाता है। बर्फबारी केबाद मौसम का खुलना गंभीर है।
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अचानक तापमान में उतार-चढ़ाव से बर्फ जल्दी से पिघलकर बह जाती है जिससे ग्लेशियरों को कोई फायदा नहीं मिलता। गर्मी में ग्लेशियरों से निकले पानी की भरपाई नहीं हो पाती है जिससे उनकी ‘बॉडी’ पतली हो जाती है और टूटने का खतरा भी पैदा हो जाता है।
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स्नो के आइस में तब्दील होने में काफी वक्त लगता है। स्नो बहुत ही मुलायम होती है जब इसमें पानी का घनत्व बढ़ता है तो यह सख्त होकर आइस बन जाती है।
- डॉ. डीपी डोभाल, वरिष्ठ ग्लेशियर विशेषज्ञ, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान
यह अंतर है स्नो और आइस में
स्नो में पानी का घनत्व- .01
आइस में पानी का घनत्व - .9
ग्लेशियर : एक नजर में
- ग्लेशियरों का सबसे अधिक विकास हुआ 63000 साल पहले
- समुद्र तल से 2800 मीटर तक आ गए
- इस वक्त 3700 मीटर तक खिसके
- एक हजार मीटर पीछे खिसके ग्लेशियर