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मजदूरों की मजबूती का कमजोर सिस्टम है यह, भीड़ इतनी की बदहवास हो रहे मजदूर
Fri, 19 Jul 2019 10:23 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 19 Jul 2019 10:23 AM IST
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उमड़ी है भारी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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मजदूरों की मजबूती के लिए चलाई जा रही सन्निर्माण कर्मकार कल्याण योजना का कमजोर सिस्टम राजधानी में ही देखने को मिल रहा है। लोग धक्का-मुक्की के बीच, बदहवास हालात में, हक के लिए खड़े हैं। कोई पूछने वाला नहीं है। पुलिस भी व्यवस्था बनाने नहीं आती। यह हालात हैं अजबपुर स्थित उप श्रमायुक्त कार्यालय का।
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सुबह चार बजे से कतार
भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण योजना के तहत ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था होने के चलते यहां श्रम विभाग कार्यालय के बाहर सुबह चार बजे से ही श्रमिकों की कतार लग रही है। लेकिन, विभाग में कार्मिकों की कमी के कारण बेहद कम संख्या में पंजीकरण हो पा रहे हैं।
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इसलिए बढ़ती जा रही भीड़
श्रम विभाग की पंजीकरण अधिकारी पिंकी टम्टा का कहना है कि मजदूरों के पंजीकरण और नवीनीकरण का काम पहले मैन्युअल होता था। इसमें भीड़ नहीं होती थी। अब ऑनलाइन होने लगा है, जिसमें एक ही मजदूर का नवीनीकरण करने में आधा घंटे तक का समय लग जाता है। इसलिए कम संख्या में पंजीकरण और नवीनीकरण हो पा रहे हैं।
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बदहवास हो रहे मजदूर
श्रमिकों की भीड़ में आपाधापी का भी माहौल बना है। इसके चलते वहां श्रमिकों को काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। बृहस्पतिवार को एक महिला श्रमिक श्रमायुक्त कार्यालय के बाहर बेहोश भी हो गई थी। साथी श्रमिकों ने उसे पानी आदि पिलाकर संभाला। विभाग के अधिकारियों ने भी महिला के लिए प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की।
यह है योजना, जिसके लिए जुट रही भीड़
-महिला श्रमिकों को संतान होने पर आर्थिक सहायता (लड़का 15000, लड़की पर 25000 रुपये)।
-दो बेटियों की शादी पर एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता।
-वर्ग के हिसाब से श्रमिकों को 10 हजार रुपये मूल्य की टूल किट।
-सामान्य मृत्यु पर तीन लाख रुपये और दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता।
-श्रमिक के अंतिम संस्कार पर भी 10 हजार रुपये की सहायता मिलती है।
-60 वर्ष से अधिक आयु के बाद पेंशन।
-लालटेन, कंबल, सिलाई मशीन, साइकिल आदि भी वितरित की जाती हैं।
निगम, पालिका भी जुटे तो होगा बोझ कम
नियमों के तहत इस योजना में अन्य विभागों के अधिकारी भी पंजीकरण कर सकते हैं। नगर निगम या पालिका के अधिशासी अधिकारी और खंड विकास अधिकारी इसके लिए अधिकृत हैं। बावजूद इसके दोनों ही जगह पंजीकरण नहीं हो रहे हैं। यदि, खंड विकास अधिकारी और पालिका स्तर पर पंजीकरण शुरू हो जाएं तो निश्चित रूप से यहां का बोझ तो कम होगा ही श्रमिकों को भी कम परेशानियां उठानी पड़ेंगी।
इस योजना के तहत वैसे तो निगम, पालिका, बीडीओ कार्यालय को भी सेवा देनी है लेकिन उनमें से कहीं भी काम नहीं हो रहा है। नतीजतन यहां बोझ बढ़ गया है। एक मजदूर की ऑनलाइन प्रक्रिया में ही काफी वक्त लग रहा है।
-पिंकी टमटा, पंजीयन अधिकारी