उत्तराखंडः पानी के बिल से आम को राहत तो खास को आफत
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जल सरचार्ज और सालाना जल मूल्य वृद्धि की दर घटाकर आम आदमी को राहत दी है, वहीं भूगर्भ जल का मुफ्त उपभोग करने वालों से जल मूल्य वसूलने के निर्देश दिए हैं।
इससे भूगर्भ जल का दोहन करनी वाली औद्योगिक इकाइयों, भवन निर्माण करने वाले बिल्डरों, व्यावसायिक संस्थाओं के साथ सरकारी भवनों से भी जल मूल्य की वसूली की जाएगी। अभी तक बिल्डरों, व्यावसायिक संस्थाओं आदि से स्थायी या अस्थायी रूप से ट्यूबवेल लगाकर भूगर्भ जल दोहन करने पर जल मूल्य नहीं लिया जाता था।
पानी का बिल देर से जमा करने पर उपभोक्ताओं से पांच प्रतिशत सरचार्ज वसूल किया जाता था। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस घटाकर डेढ़ प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही जल मूल्य में हर साल 15 फीसदी की वृद्धि की जाती थी।
भूगर्भ जल का मुफ्त दोहन करने वालों पर लगाम
इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निम्न और मध्यम वर्ग (चार टोंटियों तक) के लिए 15 की जगह 9 फीसदी तक जल मूल्य वृद्धि की जाए। उच्च वर्ग के लिए जल मूल्य वृद्धि की दर 15 फीसदी रहेगी या इसे भी कम किया जाएगा, इस पर अभी विचार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने भूगर्भ जल का मुफ्त दोहन करने वालों पर लगाम लगा दी है। अभी तक बिल्डर भवन निर्माण करने में मुफ्त भूगर्भ जल का इस्तेमाल करते थे। इस पर अब वसूली होगी। मंगलवार देर रात और बुधवार सुबह विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठकों में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य के आर्थिक संसाधन बढ़ाने पर मंथन किया।
उन्होंने कहा कि जलनिगम व जलसंस्थान बेहतर तकनीक का उपयोग करते हुए अपनी योजनाओं की निर्माण लागत में कम से कम 10 प्रतिशत तक कमी लाएं। जहां तक संभव हो, ग्रेविटी आधारित पेयजल योजनाएं बनाई जाएं।