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वेटर आखों के सामने ग्राहकों के डेबिट कार्ड पर ऐसे करता था हाथ साफ, पढ़ें और अलर्ट हो जाएं...

Mon, 14 Jan 2019 08:33 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 14 Jan 2019 08:33 AM IST
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Waiter done atm hacking from hotel customers this way
डेबिट कार्ड

रंजीत साजिश के तहत देहरादून के एक बड़े रेस्टोरेंट में वेटर के रूप में भर्ती हुआ था। आरोपियों का इरादा किसी अमीर व्यक्ति के डेबिट कार्ड की जानकारी हासिल करना था। चूंकि, बड़े रेस्टोरेंट में अमूमन लोग कार्ड से ही भुगतान करते हैं, इसीलिए आरोपियों के लिए यह मुफीद जगह थी। रंजीत ने रेस्टारेंट में ही सिमरनजीत के डेबिट कार्ड का डाटा चुराया था। इस डाटा को लेकर वह दिल्ली गया और यहां तीनों ने एटीएम से पैसे निकालकर आपस में बांट लिए। 

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दरअसल, इस ठगी की योजना रोहित और आयुष ने दो माह पहले बनाई थी। वे दोनों दिल्ली आए और एक अस्पताल में नौकरी करने वाले रंजीत के साथ ठहरे थे। उन्होंने रंजीत को बताया कि 10-12 हजार रुपये की नौकरी में कुछ नहीं होने वाला है। बताया कि उनके बॉस विक्की ने उन्हें सॉफ्टवेयर बनाना और स्कीमर के माध्यम से डेबिट कार्ड का क्लोन बनाना सिखा दिया है।
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पुलिस के अनुसार उन्होंने रंजीत से कहा कि वह किसी रेस्टोरेंट में भर्ती हो जाए। उसने अपने एक जान पहचान वाले की मदद से देहरादून के मोती महल रेस्टोरेंट में वेटर की नौकरी हासिल कर ली। एक दिन सिमरनजीत वहां खाना खाने आए तो उन्होंने अपने डेबिट कार्ड से बिल भरा। 

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इस दौरान रंजीत ने चुपके से अपने हैंडी स्कीमर (हाथ में रखा जाने वाली कैमरे वाली मशीन) में भी इस डेबिट कार्ड को स्वैप कर लिया। इस तरह डेबिट कार्ड का डाटा स्कीमर में सेव हो गया और कार्ड का पिन उसने सिमरनजीत को मशीन में फीड करते हुए देख लिया था। इसके अगले दिन ही वह दिल्ली चला गया। वहां आयुष, रोहित और रंजीत ने पैसे निकालकर आपस में बराबर बराबर बांट लिए। 

ऑनलाइन मंगाया स्कीमर 
आयुष ने अपने उस्ताद विक्की से सब कुछ सीख लिया था। इसके लिए उसे जरूरत थी कार्ड रीडर और स्कीमर की। यह सब उसने ऑनलाइन मंगा लिया। यही नहीं दिल्ली के एक मार्केट से उसने ब्लैंक डेबिट कार्ड भी खरीद लिए और एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से क्लोन तैयार कर लिया। 
 

खरीदारी करें तो रहें सावधान 

ठगी से बचने के लिए डेबिट व क्रेडिट कार्ड से खरीददारी करते वक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। यह सावधानी आपको स्वैप करने वाले कर्मचारी की गतिविधियां देखकर बरतनी चाहिए। दुकानों, रेस्टोरेंट, होटल, पेट्रोल पंप आदि पर पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल ) मशीन से भी यह गड़बड़ झाला किया जा सकता है। 

-जिस वक्त डेबिट कार्ड स्वैप करें तो पिन खुद ही डालें, कोई कर्मचारी पूछे तो मना कर दें। 
-पिन डालते वक्त देख लें कि ऊपर कोई कैमरा तो नहीं है। यदि हो तो थोड़ा दूर चलें जाएं। 
-स्वैप करने के बाद पिन तत्काल डालें, ताकि मशीन हैंग न हो पाए। 
-किसी कर्मचारी को अपना डेबिट कार्ड न दें, वह रंजीत की भांति आपका डाटा चुरा सकता है। 
-सिर्फ पीओएस पर ही कार्ड स्वैप करें, किसी छोटी पॉकेट साइज मशीन में स्वैपिंग से बचें।
-ये मशीनें दिखने में एक कैलकुलेटर जैसी होती हैं, यदि उन पर बैंक का लोगो नहीं है तो इसके बारे में पूछताछ करें।

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