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‘यूनेस्को’ पहुंचा उत्तराखंड के बेटे का 'ग्रीन' आइडिया

Fri, 05 Jun 2015 03:42 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 05 Jun 2015 03:42 PM IST
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virendra rawat green school idea send to unesco.

देश में ग्रीन स्कूल बनाकर शिक्षा को पर्यावरण से जोड़ने का उत्तराखंड के बेटे विरेंद्र रावत का आइडिया केंद्र को भी भा गया।

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केंद्र ने यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन) की ओर से पहली बार मिलने जा रहे ‘यूनेस्को-जापान प्राइज ऑन एजुकेशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ के लिए विरेंद्र का नाम भेज दिया है। यह मुकाम हासिल करने वाले विरेंद्र पहले और अकेले भारतीय बन गए हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ की पर्यावरण संबंधी संस्था यूनेस्को ने पहली बार दिए जाने वाले पर्यावरण शैक्षिक पुरस्कार के लिए प्रविष्टियां मांगी थी। केंद्र सरकार के पास देशभर से 1000 से ज्यादा पर्यावरणविदें के आवेदन आए। इसमें से विरेंद्र का चयन कर उनका नाम यूनेस्को को भेज दिया गया।
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दो दिन पहले ही विरेंद्र को इसकी सूचना केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से फोन पर दी गई। विरेंद्र ने खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि यह अवार्ड उन्हें ही मिलेगा।
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पुरस्कार मिलने की सूरत में उन्हें 50 हजार डॉलर की राशि के साथ ही प्रशस्ति पत्र भी यूनेस्को की ओर से दिया जाएगा। इसकी घोषणा अगस्त में और पुरस्कार नवंबर में होने वाले समारोह में दिया जाएगा।

ग्रीन स्कूल में बच्चे नहीं होते बीमार

विरेंद्र रावत ने फोन पर बताया कि ग्रीन स्कूल एक सोच है। इसमें छात्रों को जीने के लिए आधारभूत तत्व जल, गगन, वायु, अग्नि और पृथ्वी उपलब्ध कराये जाते हैं। पांचों तत्वों के बारे में गहनता से छात्रों को बताया जाता है।

ग्रीन स्कूल के भीतर बच्चे के लिए कम से कम एक पेड़ लगाया जाता है। इन स्कूलों में बच्चों के खेल भी पर्यावरण संबंधित ही होते हैं। बच्चों को व्यर्थ की चीजों को रिसाइकिल कर उन्हें प्रयोग में लाना सिखाया जाता है। विरेंद्र ने बताया कि यहां पढ़ने वाला छात्र कभी बीमार नहीं पड़ता।

दुर्गम गांव से विश्व फलक तक

virendra rawat green school idea send to unesco.

मूलरूप से टिहरी गढ़वाल स्थित प्रतापनगर ब्लॉक के उपली रमौली में हेरवाल गांव में मुकुंद सिंह रावत व बच्चा देवी रावत के घर जन्मी छह संतानों में सबसे बड़े विरेंद्र रावत की प्रारंभिक शिक्षा दीप गांव में हुई। उन्होंने राजकीय इंटर कालेज तोलीसैंण, टिहरी से 12वीं करने के बाद गढ़वाल विवि से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

वर्ष 1994 में वह नौकरी के सिलसिले में अहमदाबाद चले गए, जहां उन्होंने 1200 रुपये वेतन पर नौकरी की। उनके दिलोदिमाग पर उत्तराखंड की हरियाली का गहरा असर था। वर्ष 2010 में उन्होंने अहमदाबाद में पहले ग्रीन स्कूल की स्थापना की। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जब इस ग्रीन स्कूल के बारे में पता चला तो उन्होंने खुद जाकर इसका निरीक्षण किया।

विरेंद्र को तत्काल प्रदेश में इस तरह के ग्रीन स्कूल के प्रोत्साहन के लिए सलाहकार नियुक्त कर लिया। आज विरेंद्र रावत सीबीएसई के 10 से अधिक संबद्ध ग्रीन स्कूलों के संचालक होने के साथ ही 100 से अधिक ग्रीन स्कूलों की देखरेख का जिम्मा संभाल रहे हैं। वह पहले ऐसे भारतीय हैं, जिन्हें हाल ही में बोस्टन यूनिवर्सिटी अमेरिका ने अपने आठवें वार्षिक एमए ग्रीन स्कूल समिट में सम्मानित किया।

विरेंद्र की उपलब्धियां
- वर्ष 2014 में डिजिटल लर्निंग मैनेजमेंट ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़े गेम चेंजरों की सूची में पहला स्थान।
- दुनिया में 300 से अधिक ग्रीन स्कूल संचालित करने वाली संस्था ग्रीन स्कूल एलायंस ग्लोबल बेस्ट यूएसए के समन्वयक।
- बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट, सीयू शाह यूनिवर्सिटी, गुजरात, एनवॉयरमेंट एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी बोर्ड गुजरात, टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी अहमदाबाद, इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर एनवॉयरमेंट एजुकेशन यूएसए, एनवॉयरमेंट एजुकेशन कमेटी, सीबीएसई के सदस्य।
- यंग मास्टर प्रोग्राम ऑन सस्टेन एबिलिटी, यूनेस्को के प्रमाणित प्रशिक्षक।
- वाइब्रेंट गुजरात 2015 में विरेंद्र सिंह रावत ने ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट को पूरे विश्व के सामने प्रस्तुत किया गया।

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