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Dehradun News: वायरल फीवर के मरीज रैपिड एंटीजन जांच में पॉजिटिव
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दो दिन तक डेंगू का उपचार, एलाइजा में निगेटिव
वायरल फीवर के मरीज डेंगू की रैपिड एंटीजन जांच में पॉजिटिव आ रहे हैं। जबकि एलाइजा जांच में रैपिड के 23.8 फीसदी मामले फेल हो रहे हैं। सबसे बड़ी परेशानी मरीजों के साथ है। वह दो दिन तक तो डेंगू और फिर रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद वायरल फीवर का उपचार ले रहे है। दोनों के लक्षण एक जैसे हैं तो चिकित्सकों को भी बिना जांच डेंगू और वायरल में अंतर करने में दिक्कत आ रही है।
उप जिला अस्पताल में एक सप्ताह में 295 मरीजों की एलाइजा जांच की गई। ये सभी मरीज रैपिड एंटीजन जांच में पॉजिटिव पाए गए थे। सभी मरीजों के सैंपल एलाइजा जांच के लिए भेजे गए। एलाइजा जांच रिपोर्ट अगले दिन शाम को मिलती है।
रैपिड एंटीजन में पॉजिटिव आने के साथ मरीजों का डेंगू का उपचार शुरू कर दिया गया, लेकिन जब जांच रिपोर्ट आई तो केवल 70 मरीज ही डेंगू संक्रमित पाए गए। गौर करने वाली बात है इनमें से अधिकांश मरीजों को तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, बदन दर्द, कमजोरी, पैरों में दर्द आदि की समस्या थी।
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डेंगू और वायरल फीवर के यह लक्षण बिल्कुल मिलते जुलते होते हैं। ऐसे में एलाइजा जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाती है। मरीजों को तत्काल राहत देने के लिए चिकित्सक ने लक्षण आधारित डेंगू का उपचार शुरू कर दिया। जब एलाइजा रिपोर्ट निगेटिव आई तो मरीजों को अब वायरल फीवर का उपचार दिया जा रहा है।
रैपिड एंटीजन केवल स्क्रीनिंग जांच
उप जिला अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट डॉ. राजेंद्र शर्मा ने बताया कि रैपिड एंटीजन जांच केवल स्क्रीनिंग जांच होती है, जिससे संदिग्ध मरीजों की पहचान होती है। बताया कि कई बार रैपिड एंटीजन किट के अलग-अलग कार्ड में बुखार के मरीज या डेंगू के पुराने मरीज भी पॉजिटिव आ जाते है। एलाइजा जांच को ही डेंगू की पुष्टि माना जाता है। उन्होंने कहा डेंगू के संदिग्ध मरीज को लक्षण आधारित उपचार दिया जाता है, इसलिए उसको कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।
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वायरल फीवर के मरीज डेंगू की रैपिड एंटीजन जांच में पॉजिटिव आ रहे हैं। जबकि एलाइजा जांच में रैपिड के 23.8 फीसदी मामले फेल हो रहे हैं। सबसे बड़ी परेशानी मरीजों के साथ है। वह दो दिन तक तो डेंगू और फिर रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद वायरल फीवर का उपचार ले रहे है। दोनों के लक्षण एक जैसे हैं तो चिकित्सकों को भी बिना जांच डेंगू और वायरल में अंतर करने में दिक्कत आ रही है।
उप जिला अस्पताल में एक सप्ताह में 295 मरीजों की एलाइजा जांच की गई। ये सभी मरीज रैपिड एंटीजन जांच में पॉजिटिव पाए गए थे। सभी मरीजों के सैंपल एलाइजा जांच के लिए भेजे गए। एलाइजा जांच रिपोर्ट अगले दिन शाम को मिलती है।
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रैपिड एंटीजन में पॉजिटिव आने के साथ मरीजों का डेंगू का उपचार शुरू कर दिया गया, लेकिन जब जांच रिपोर्ट आई तो केवल 70 मरीज ही डेंगू संक्रमित पाए गए। गौर करने वाली बात है इनमें से अधिकांश मरीजों को तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, बदन दर्द, कमजोरी, पैरों में दर्द आदि की समस्या थी।
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डेंगू और वायरल फीवर के यह लक्षण बिल्कुल मिलते जुलते होते हैं। ऐसे में एलाइजा जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाती है। मरीजों को तत्काल राहत देने के लिए चिकित्सक ने लक्षण आधारित डेंगू का उपचार शुरू कर दिया। जब एलाइजा रिपोर्ट निगेटिव आई तो मरीजों को अब वायरल फीवर का उपचार दिया जा रहा है।
रैपिड एंटीजन केवल स्क्रीनिंग जांच
उप जिला अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट डॉ. राजेंद्र शर्मा ने बताया कि रैपिड एंटीजन जांच केवल स्क्रीनिंग जांच होती है, जिससे संदिग्ध मरीजों की पहचान होती है। बताया कि कई बार रैपिड एंटीजन किट के अलग-अलग कार्ड में बुखार के मरीज या डेंगू के पुराने मरीज भी पॉजिटिव आ जाते है। एलाइजा जांच को ही डेंगू की पुष्टि माना जाता है। उन्होंने कहा डेंगू के संदिग्ध मरीज को लक्षण आधारित उपचार दिया जाता है, इसलिए उसको कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।