{"_id":"7c20fcccaf590e1c6623491763d9f03d","slug":"vip-seats-nainital","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस लोकसभा सीट पर हर बार हारी है भाजपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस लोकसभा सीट पर हर बार हारी है भाजपा
अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Mon, 31 Mar 2014 03:34 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रत्याशी चयन में पहाड़ और मैदान की खाई के बीच पैदा होने वाला असंतोष संभाल पाने में नाकामी ने नैनीताल संसदीय सीट पर भाजपा को हर बार हराया है।
विज्ञापन
चुनावों में भाजपा प्रत्याशी की हुई दुर्गती
यह सीट सिर्फ 6 साल भाजपा के पास रही और बाकी चुनावों में पार्टी प्रत्याशी की दुर्गत ही हुई है। वर्ष 1984 से चुनाव लड़ रही बीजेपी को 1991 से 1996 और 1998 से 1999 तक ही सीट मिल पाई।
विज्ञापन
इन 6 सालों तक ‘रामलहर’ भी पार्टी बहेड़ी और रामनगर विधानसभा सीट की बदौलत चला सकी। नए परिसीमन के बाद 2009 में बहेड़ी के पीलीभीत और रामनगर विधानसभा सीट के पौड़ी संसदीय क्षेत्र में मिल जाने से भाजपा के नैनीताल से ये दो बड़े गढ़ ‘ध्वस्त’ हुए हैं।
विज्ञापन
अब केवल पर्वतीय वोटों के सहारे भगवा साथ लेकर चल रही पार्टी के सामने मैदानी वोटों को कवर करना एक बार फिर से पहाड़ चढ़ने की तरह बन गया है।
नैनीताल संसदीय सीट में इस समय 9 विधानसभा सीटें ऊधमसिंह नगर और 6 सीटें नैनीताल जिले में हैं। रामनगर विस सीट के वोट पौड़ी में मिलने के बाद 5 सीटें बचती हैं। इनमें दो सीटों में भाजपा, एक में निर्दलीय और दो में कांग्रेस विधायक हैं।
नैनीताल में मुरझाया कमल
नैनीताल, भीमताल और कालाढूंगी विस सीट में पर्वतीय मतदाताओं की संख्या बेहतर रहने की वजह से भाजपा इन तीनों सीटों में बेहतर बढ़त बनाती आई लेकिन मैदान में उतरते ही ‘कमल’ मुरझा जाता है।
हल्द्वानी विस सीट में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक होने और लालकुआं में तराई के वोटर ज्यादा रहने की वजह से भगवा साथ लेकर चल रहा प्रत्याशी हर बार करीब 50 हजार वोटों की लीड से हारा है।
ऊधमसिंह नगर जिले में भाजपा के 5 विधायक हैं, लेकिन प्रत्याशी चयन में पहाड़-मैदान के बीच बराबर संतुलन नहीं रख पाने की वजह से ऊधमसिंह नगर में पार्टी की स्थिति खराब है।
अपनों के असंतोष ने हराया
खटीमा के पर्वतीय वोटरों को छोड़ दें तो रुद्रपुर बाजपुर, काशीपुर, जसपुर, किच्छा, शांतिपुरी, गूलरभोज, सितारगंज, हरिपुरा जैसे बड़े क्षेत्रों में पार्टी को अपनों के असंतोष ने ही हराया है और इस लड़ाई के बीच बाजी कांग्रेस मारती आई है।
इस बार कांग्रेस ने हल्द्वानी में दमुवाढूंगा गांव को नगर निगम में शामिल करने और लालकुआं को नगरपालिका बनाने का नया दांव खेलकर भाजपा के भगत सिंह कोश्यारी के लिए इन दो विस सीटों में उलझन खड़ी कर दी है।
क्योंकि पार्टी का यहां बचाखुचा वोटर भी अब कांग्रेस के पाले में जाने के आसार तेज हो गए हैं। तराई में प्रत्याशी चयन को लेकर कुछ विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी भाजपा को झेलनी पड़ रही है।
यह नाराजगी अगर जल्द दूर नहीं हुई तो तराई का वोट बैंक पार्टी के हाथ से चला जाएगा यह भी तय है।