फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   vip seat haridwar

इस सीट पर नहीं रहा किसी राजनीतिक दल का हक

Tue, 01 Apr 2014 09:51 AM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 01 Apr 2014 09:51 AM IST
विज्ञापन
vip seat haridwar

देश भर में हिन्दू धर्म का प्रतीक मानी जाने वाली हरिद्वार संसदीय सीट का इतिहास पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षता से सराबोर रहा।

विज्ञापन


पढ़ें, बीजेपी के बाद अब कांग्रेस को मिला एक और 'दुश्मन'

इस लोकसभा सीट ने खुद के ऊपर कभी भी किसी राजनीतिक दल विशेष का गढ़ बनने का ठप्पा नहीं लगने दिया। संत बिरादरी व धार्मिक अखाड़ों के प्रभाव के चलते इस सीट ने सभी दलों को गले लगाया।
विज्ञापन


पढ़ें, चारधाम मार्ग खोलने को लगाई जान
विज्ञापन
विज्ञापन


तमाम धार्मिक गतिविधियों से लेकर हर हर गंगे के नारों के बीच इस सीट पर 2004 के चुनाव में सपा ने हरिद्वार जनपद को उत्तराखंड से अलग कराकर यूपी में शामिल कराने केमुद्दे पर कब्जा किया। लेकिन अगली बार जमानत जब्त हो गई।

भाजपा को वापस नहीं मिली यह सीट

vip seat haridwar

2004 में भाजपा के हाथ से फिसली यह सीट अभी तक वापस नहीं मिली। यह सीट हमेशा से संत बिरादरी, धार्मिक अखाड़ों के साथ ही विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, आरएसएस जैसे हिन्दू संगठनों के गौरव का प्रतीक तो है।

पढ़ें, नरेंद्र मोदी के गढ़ में राहुल सेना 'सुस्त'

लेकिन इसने कभी किसी एक दल को राजनीतिक मालिकाना हक नहीं दिया। खास बात तो यह है कि भाजपा इस सीट से पहली बार 1991 में रामलहर में जीती।

पढ़ें, इस लोकसभा सीट पर हर बार हारी है भाजपा

इसके बाद तीन चुनावों में अटल बिहारी वाजपेई के करिश्मे के चलते प्रत्याशी जीते। लेकिन 1991 से पहले और 1999 केचुनाव के बाद हरिद्वार ने भाजपा को गले से नहीं लगाया।

चुनावी राजनीति में कभी धर्म ने सपोर्ट नहीं किया

vip seat haridwar

अयोध्या में राममंदिर समेत कई मुद्दों को लेकर भाजपा भले ही हिन्दुत्ववादी विचारधारा की लड़ाई लड़ने का दंभ भरती हो लेकिन हिन्दू धर्म का प्रतीक हरिद्वार संसदीय सीट को अपना दुर्ग बनाने में कामयाब नहीं हुई।

पढ़ें, बीजेपी के बाद अब कांग्रेस को मिला एक और 'दुश्मन'

यह आलम तो तब है जब हर साल यहां पर विहिप के अधिवेशन, महाकुंभ जैसे आस्थावान आयोजन हुए। लेकिन यहां की चुनावी राजनीति में कभी धर्म ने सपोर्ट नहीं किया।

पढ़ें, चारधाम मार्ग खोलने को लगाई जान

विहिप समेत तमाम हिन्दू संगठन भाजपा को टिकट दिलाने के मामले में तो आक्रामक रहे लेकिन जमीन तैयार नहीं कर सके। इसलिए इस बार भी यह सीट भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है।

अब देखना यही है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी जंग किस ओर करवट बदलती है।

हरिद्वार लोकसभा संसदीय सीट पर एक नजर

vip seat haridwar

वर्ष - विजेता - दल - प्राप्त मत - रनर-अप - दल - प्राप्त मत
1977 - भगवानदास - बीकेडी - 71.26 - सुंदरलाल - कांग्रेस - 21.76
1980 - जगपाल - जेएनपी - 37.07 - भगवानदास - जेएनपी - 30.06
1984 - सुंदरलाल - कांग्रेस - 57.35 - जगपाल - बीकेडी - 26.81
1989 - जगपाल - कांग्रेस - 38.27 - धर्मसिंह - जेडी - 37.77
1991 - रामसिंह - भाजपा - 39.21 - धर्मसिंह - जेडी - 37.84
1996 - हरपाल साथी - भाजपा - 37.42 - जगपाल सिंह - सपा - 26.56
1998 - हरपाल साथी - भाजपा - 44.74 - जगपाल सिंह - सपा - 26.59
1999 - हरपाल साथी - भाजपा - 35.52 - रमेश बर्मन - बसपा - 30.59
2004 - राजेंद्र बाड़ी - सपा - 32.35 - भगवानदास - बसपा - 24.61
2009 - हरीश रावत - कांग्रेस - 42.00 - यतींद्रानंद - भाजपा - 26.00

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed