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तीन स्वतंत्रता सैनानियों के गांव में नहीं सड़क, गर्भवती को डोली में बैठकर पैदल लेकर पहुंचे अस्पताल
Sun, 01 Mar 2020 08:09 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मदकोट (पिथौरागढ़)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मदकोट (पिथौरागढ़)
Published by: अलका त्यागी
Updated Sun, 01 Mar 2020 08:09 PM IST
सार
- प्रसव पीड़िता को डोली से पांच किमी पैदल चलकर पहुंचाया अस्पताल
- तीन-तीन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गांव गांधीनगर के लिए अब तक नहीं बनी सड़क
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गर्भवती महिला
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
देश की आजादी में अहम योगदान देने वाले तीन-तीन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का गांव उत्तराखंड का पिथौरागढ़ स्थित गांधीनगर आज भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है। बीमार और गर्भवती महिलाओं को सड़क तक डोली में लाना मजबूरी है। रविवार को भी प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को ग्रामीणों ने डोली में बैठाकर पांच किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाया।
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मुनस्यारी का गांधीनगर गांव तीन-तीन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जन्मभूमि रहा है। सेनानी नरीराम, भीम सिंह कुंवर और दिलीप सिंह भंडारी ने देश की आजादी के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। देश को आजाद हुए सात दशक बीत चुके हैं, लेकिन आज भी इस गांव तक सड़क नहीं बनी है। गांधीनगर अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्र है। यहां के लोगों को बीमार होने या फिर गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर डोली में बैठाकर जोसा तक पहुंचाना पड़ता है। गांधीनगर निवासी किशन राम की पत्नी दीक्षा को रविवार की सुबह प्रसव पीड़ा हुई।
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पैदल चलने की स्थिति नहीं होने पर ग्राम प्रधान राजेश रोशन, महेंद्र कुमार, मनोज कुमार, दीवानी राम और बलवंत आदि लोगों ने दीक्षा को डोली में बैठाकर जोसा तक पहुंचाया। इसके बाद 108 एंबुलेंस से मुनस्यारी अस्पताल पहुंचाया, जहां प्रसव किया गया।
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