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Dehradun News: ग्रामीण एक किमी दूर से पानी ढो कर बुझा रहे प्यास
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तहसील क्षेत्र से महज छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित नवीन चकराता क्षेत्र के ग्रामीण इन दिनों पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। तीन हजार की आबादी को दिन में 10 से 15 मिनट ही पानी मिल रहा है। ग्रामीण एक किमी दूर स्थित प्राकृतिक पेयजल स्रोत से पानी ढोकर प्यास बुझा रहे हैं। ग्रामीणों में जल संस्थान प्रति भारी नाराजगी है।
सिजला खड्ड से छटऊ पेयजल योजना से लांघा पोखरी, पुरोड़ी, बिरमोऊ डांडा, रामताल गार्डन, माक्टी, पोखरी सहित आधा दर्जन कस्बे के लिए पेयजल आपूर्ति की जाती है। ग्रामीण खजान रावत, टीकम सिंह रावत, महावीर तोमर, प्रदीप तोमर, दिनेश सिंह, राजेंद्र जोशी, युद्धवीर, अंकित तोमर, सुल्तान चौहान आदि ने बताया कि गर्मियों में नवीन चकराता (पुरोड़ी) में पेयजल संकट गहरा जाता है। कहा कि वर्तमान में सुबह में केवल 10 से 15 मिनट ही पानी मिल पा रहा है। महिलाओं को पुरोड़ी के पास स्थित जलस्रोत से सिर पर पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि शिकायत के बाद भी जलसंस्थान समस्या का निदान नहीं कर रहा है। समस्या को लेकर जल संस्थान के अधिशासी अभियंता राजेंद्र पाल सिंह से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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सिजला खड्ड से छटऊ पेयजल योजना से लांघा पोखरी, पुरोड़ी, बिरमोऊ डांडा, रामताल गार्डन, माक्टी, पोखरी सहित आधा दर्जन कस्बे के लिए पेयजल आपूर्ति की जाती है। ग्रामीण खजान रावत, टीकम सिंह रावत, महावीर तोमर, प्रदीप तोमर, दिनेश सिंह, राजेंद्र जोशी, युद्धवीर, अंकित तोमर, सुल्तान चौहान आदि ने बताया कि गर्मियों में नवीन चकराता (पुरोड़ी) में पेयजल संकट गहरा जाता है। कहा कि वर्तमान में सुबह में केवल 10 से 15 मिनट ही पानी मिल पा रहा है। महिलाओं को पुरोड़ी के पास स्थित जलस्रोत से सिर पर पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों ने कहा कि शिकायत के बाद भी जलसंस्थान समस्या का निदान नहीं कर रहा है। समस्या को लेकर जल संस्थान के अधिशासी अभियंता राजेंद्र पाल सिंह से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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