बहुगुणा का 'लेटर बम', रावत के खिलाफ मोर्चा
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पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के सब्र का बांध टूट गया है। एक साल की प्रतीक्षा के बाद बहुगुणा ने मुख्यमंत्री हरीश रावत पर सीधा हमला बोला है। बहुगुणा ने 15 फरवरी को राज्य सरकार के खिलाफ ऊधमसिंह नगर में जन आक्रोश रैली की चेतावनी दी है। कभी बहुगुणा को पत्रों की श्रृंखला लिखकर परेशानी में डालने वाले मुख्यमंत्री हरीश रावत को पत्र की भाषा में ही चेतावनी मिली है।
बहुगुणा ने पत्र में अपने विधानसभा क्षेत्र सितारगंज से जुड़ा मामला उठाया है। उन्होंने लिखा है कि वर्ग चार और वर्ग 1 (ख) की भूमि के नियमितीकरण का मुद्दा सरकार के स्तर पर लंबित है। जबकि ऐसी भूमि के नियमितीकरण के मुद्दे पर मेरे कार्यकाल में ही सहमति बन चुकी थी।
उन्होंने यह लिखा कि इस प्रकार की भूमि के नियमितीकरण की नियमावली बन गई है। जिस पर मंत्रिमंडल की मंजूरी लंबित है। इसी प्रकार जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम (जेडएएलआर) की धाराओं में संशोधन की मंजूरी अगर मंत्रिमंडल में पारित की जाती है तो राज्य के तराई क्षेत्रों में रहने वाले पट्टा धारकों विशेषकर तहसील सितारगंज और शक्तिफार्म के पट्टाधारकों को इससे राहत मिलेगी। उन्होंने लिखा है कि ऐसे संशोधन के लिए कार्यवाही एवं नियमावली तैयार हो गई है और मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए लंबित है
चिट्ठी के जरिए सीएम को दिया अल्टीमेटम
बहुगुणा ने आग्रह करते हुए लिखा है कि इन मुद्दों को कैबिनेट में लाएं तथा लंबे समय से उठ रही जनता की मांग को पूरा करें। उन्होंने लिखा है कि इस विषय में कई बार अनुरोध कर चुका हूं। एक वर्ष से निर्णय लंबित है ऐसे में अगर शीघ्र इसे मंत्रिमंडल में लाकर पारित नहीं किया जाता है तो जनहित में 15 फरवरी को आक्रोश रैली करूंगा।
वर्ग चार और वर्ग एक ‘क’ की जमीन पर नियमितीकरण की नियमावली बनने के बावजूद कैबिनेट से मंजूरी न मिलने के कारण पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा खफा हैं। वह आगामी कैबिनेट की बैठक में नियमावली को मंजूरी दिलाने पर अड़ गए हैं। उन्होंने सीएम हरीश रावत को पत्र लिखकर आगामी कैबिनेट में नियमावली पारित कराने का आग्रह किया है। साथ ही अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह 15 फरवरी को ऊधमसिंह नगर जनपद में सरकार के खिलाफ जनाक्रोश रैली करेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कार्यकाल में वर्ग चार और वर्ग एक ‘क’ की भूमि पर नियमितीकरण के मुद्दे पर सहमति बनी थी और तब से नियमितीकरण की नियमावली को कैबिनेट में मंजूरी नहीं मिली, जिससे पूर्व सीएम बहुगुणा बेहद नाराज हैं। बृहस्पतिवार को बहुगुणा ने मुख्यमंत्री रावत को पत्र लिखकर आगामी कैबिनेट की बैठक में नियमावली को मंजूरी दिलाने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि भूमिधरी अधिकार का शासनादेश जारी किए हुए एक वर्ष हो चुका है और वह सरकार से तीन बार पत्र के माध्यम से नियमावली पारित करने का आग्रह कर चुके हैं, लेकिन अभी तक नियमावली पास नहीं की गई है।
पत्र में बहुगुणा ने कहा कि सरकार द्वारा कैबिनेट में जेडएएलआर की धाराओं में संशोधन की मंजूरी दी जाती है तो उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में रहने वाले पट्टाधारकों को राहत मिलेगी। चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आगामी कैबिनेट में वर्ग चार व वर्ग एक ‘क’ की भूमि के नियमितीकरण की नियमावली पारित न की गई तो वह 15 फरवरी को ऊधमसिंह नगर जिले में सरकार के खिलाफ जनाक्रोश रैली करेंगे।
याद आए रावत के पुराने पत्र
हरीश रावत पत्रों की भाषा खूब समझते हैं। बहुगुणा के कार्यकाल में रावत ने 100 के करीब पत्र लिखे थे। जिसमें इसी तरह के कुछ खुले पत्र भी शामिल हैं जो सरकार और मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधकर कठघरे में खड़ा करने वाले थे। आपदा के बाद रावत ने पैदल यात्रा कर केदारनाथ में चल रहे अपर्याप्त पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को लेकर कड़ा पत्र लिखा था।
उस दौरान सरकार की ओर से उठाए गए कदमों को नाकाफी ठहराया था। अवैध खनन को लेकर बहुगुणा हरीश रावत के निशाने पर रहे। एक पत्र में उन्होंने यमुना, गौला और हरिद्वार में गंगा नदी में चल रहे अवैध खनन को पत्रों के माध्यम से ही जोरशोर से उठाया।
बहुगुणा के कार्यकाल में आबकारी विभाग की ओर से राज्य के चार मैदानी जिलों में डिप्टी कमिश्नर बैठाने की पहल का विरोध किया। उन्होंने पत्र लिखकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। सरकार ने शायद उनके पत्र का संज्ञान लेकर ऐसा नहीं किया, लेकिन खुद रावत की सरकार में ऐसी ही फाइल शासन में चल रही है।
रावत ने हरिद्वार के गन्ना किसानों के भुगतान पर भी सरकार को घेरा था। खुले पत्र के माध्यम से दो किस्तों में भुगतान को किसानों का अहित ठहराया था। हालांकि, कुछ वैसी ही प्रक्रिया रावत की सरकार में चल रही है। इसी प्रकार पुष्प निदेशालय और अनुसंधान संस्थान की जमीन को लेकर भी रावत ने बहुगुणा को पत्र लिखे थे।