बलूनी आत्महत्या में चार लोगों पर मुकदमा दर्ज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेलवे अफसर सुनील कुमार बलूनी आत्महत्या के मामले में नेहरू कॉलोनी थाने में केस दर्ज कर लिया गया है। इसमें चार लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं, जिसमें दो दलाल और दो विजिलेंस कर्मी के नाम शामिल हैं।
सीनियर ट्रैफिक इंस्पेक्टर (एकाउंट) सुनील कुमार बलूनी ने रेल के नीचे आकर खुदखुशी कर ली थी। बलूनी के ऑफिस में तैनात कर्मचारी और स्टेशन अधीक्षक का खुलासा बताता है कि दून रेलवे स्टेशन पर दलालों का नेटवर्क किस कदर मजबूत है।
'बाबूजी बड़े ईमानदार थे, इसीलिए दलाल उनके पीछे पड़ गए थे। एक-दो बार बाबूजी ने टैक्स चोरी के माल पर जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद से तो दलाल उनसे रंजिश पालने लगे। उन्हें झूठा फंसाया गया। उनके मेज की दराज में रकम जानबूझकर रखी गई।'
...मैं रेलवे का कर्मचारी हूं और टीआईए सुनील कुमार बलूनी के आफिस में तैनात था। 20 नवंबर की शाम को बाबूजी (बलूनी) अपने आफिस में बैठे हुए थे। इसी बीच दो लोग आए और बाबूजी से बातचीत करने लगे। कुछ मिनट बाद बाबूजी बाहर आए और मुझे चाय लाने के लिए कहा।
मैं चाय लेने निकल ही रहा था कि बाबूजी के केबिन में दो और लोग घुस गए। इसके बाद कमरे से शोर सुनाई देने लगा। बाद में आए दोनों लोग खुद को रेलवे का विजिलेंस अफसर बता रहे थे। उनका कहना था कि बाबूजी ने घूस ली है, जबकि वह ऐसे बिल्कुल नहीं थे।
बाबूजी भी कहते रहे कि पैसे उन्होंने नहीं लिए, साजिश के तहत रखे गए। वह नोटों पर फिंगरप्रिंट की जांच करने के लिए कहते रहे। लेकिन विजिलेंस वालों ने एक नहीं सुनी। उन पर घूस का आरोप लगाया गया।
इसके बाद बाबूजी टूट से गए थे। काम पर आते, लेकिन अनमने दिखते थे। और आखिर उन्होंने अपनी जान ही दे दी...। जो हुआ गलत हुआ। लेकिन मैं पूरे घटनाक्रम का गवाह हूं और जरूरत पड़ी तो बाबूजी को इंसाफ दिलाने के लिए गवाही भी दूंगा। (बलूनी के आफिस में तैनात एक कर्मचारी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया।)
विजिलेंस टीम ने बनाया सुनील पर दबाव
बलूनी की खुदकुशी दुखद है। वह बेहतरीन अफसर थे और ईमानदार भी। दिल्ली से आए रेलवे विजिलेंस के अधिकारियों ने ट्रैप के बाद बलूनी पर दबाव बनाने की कोशिश की थी।
मुझ पर भी दबाव बनाया गया था कि विजिलेंस कार्रवाई के पक्ष में ही बयान दिया जाए। हालांकि, मैंने विजिलेंस अफसरों से साफ कह दिया था कि बलूनी ईमानदार अधिकारी हैं और उन पर बिना वजह दबाव न बनाया जाए। बलूनी के परिजनों के प्रदर्शन के दौरान जवाब देते हुए स्टेशन अधीक्षक एसडी डोभाल ने ये बात बताई।
दोनों की बातें यह इशारा भी करती हैं कि टैक्स चोरी रोकने की कोशिश करने वाले अफसरों के हाथ बांधने में रेलवे विजिलेंस ही दलालों का सहारा बनने लगी है।
पूरे मामले में यह बड़ा सवाल भी उभरता है कि विजिलेंस अपने अफसरों पर भरोसा करने के बजाय रेलवे को हर रोज लाखों का चूना लगाने वाले दलालों पर क्यों मेहरबान है?
सता रहा सुरक्षा का डर
अमर उजाला से बातचीत करने वाले बलूनी के आफिस में तैनात कर्मचारी को अपनी सुरक्षा का डर भी सता रहा है। बुधवार को अमर उजाला स्टेशन पहुंचा तो बलूनी के आफिस में ताला लटका था। बाहर कर्मचारी रुआंसा बैठा था।
बातचीत शुरू होते ही वह फफकने लगा। बलूनी के खुदकुशी कर लेने का उसे बड़ा मलाल था। यह दलालों का डर ही था कि बातचीत में खुलकर कहने के बावजूद इस कर्मचारी ने सुरक्षा के लिहाज से अपना नाम न छापने का अनुरोध किया।
ये हैं कुछ सुलगते सवाल
- रेलवे विजिलेंस ने ट्रैप में आधुनिक और वैज्ञानिक विधि क्यों नहीं अपनाई?
- ट्रैप में स्थानीय गवाह क्यों नहीं लिए?
- ट्रैप के दौरान रेलवे के स्थानीय अधिकारियों को साथ क्यों नहीं लिया?
- अफसर बलूनी के फिंगर प्रिंट क्यों नहीं लिए?
- ट्रैप की घटना को दलालों के जरिए क्यों प्रचारित किया जाता रहा?
- ट्रैप की घटना के वक्त ही बलूनी को चाय के लिए क्यों कहा गया? इसकी पुष्टी उनके एक साथी कर्मचारी और सुसाइड नोट से भी होती है?
- बलूनी को दिल्ली बुलाया, लेकिन पक्ष क्यों नहीं रखने दिया गया?
- सहकर्मियों को पता था कि बलूनी को झूठा फंसाया गया है तो वे खुलकर विरोध में क्यों नहीं आए?
- लीज होल्डर पर नियम विरुद्ध सामान लाने की पेनल्टी लगाने वाला अफसर ही क्यों ट्रैप किया गया?
- विजिलेंस को दिल्ली से अवैध तरीके से माल लोड करने वाले और देहरादून से माल ठिकाने लगाने वाले लीज होल्डर, ठेकेदार और दलालों की सक्रियता नजर क्यों नहीं आती?
परिजनों ने मांगी दोषियों को फांसी
गुस्साए परिजनों ने बुधवार को शव को स्टेशन पर रखकर रेल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। परिजनों ने पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की है। घूसखोरी के झूठे केस में फंसाने से क्षुब्ध रेलवे के सीनियर ट्रैफिक इंस्पेक्टर (एकाउंट) सुनील बलूनी ने मंगलवार को ट्रेन से कटकर जान दे दी थी।
पोस्टमार्टम के बाद शव को बलूनी के पार्सल दफ्तर के बाहर लाया गया। शव पहुंचते ही परिजनों और नार्दर्न रेलवे मैंस नियन (नरमू) से जुड़े रेलकर्मियों ने रेलवे प्रबंधन को जमकर कोसा। परिजनों और कर्मचारियों ने शव को आरपीएफ दफ्तर के बाहर प्लेटफार्म पर रखकर न्याय दिलाने की मांग की।
परिजनों की स्टेशन अधीक्षक एसडी डोभाल और पार्सल सेक्शन के अफसरों से भी नोकझोंक हुई। परिजनों का आरोप था कि रेलवे अफसरों की मिलीभगत से ही स्टेशन पर दलाल सक्रिय हैं। इन्हीं दलालों की साजिश से ईमानदार अफसर को जान गवांनी पड़ी।
रेलकर्मियों ने कहा कि वे पूरी साजिश का खुलासा और सुनील को न्याय दिलाने के लिए रेलमंत्री, मुख्यमंत्री, डीआरएम मुरादाबाद से मिलकर सीबीआई जांच की मांग करेंगे। दलालों से मिलीभगत के आरोपियों पर भी कार्रवाई की मांग की है।