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10 हजार की घूस लेता लेखपाल गिरफ्तार

Wed, 14 Oct 2015 09:02 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, रुड़की
ब्यूरो / अमर उजाला, रुड़की Updated Wed, 14 Oct 2015 09:02 AM IST
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vigilance arrest lekhpal taking bribe.

रुड़की चकबंदी के एक लेखपाल को 10 हजार की रिश्वत लेते विजिलेंस ने रंगेहाथ दबोच लिया। लेखपाल ने जमीन के दाखिल खारिज के लिए रिपोर्ट लगाने की एवज में 20 हजार रुपए की डिमांड की थी। बाजूहेड़ी गांव में एडवांस के तौर पर 10 हजार रुपए लेने के दौरान विजिलेंस की टीम लेखपाल को गिरफ्तार कर देहरादून ले गई।

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रुड़की तहसील के गांव दौलतपुर निवासी भरत गिरी ने गांव के ही एक किसान से करीब सवा तीन बीघा जमीन खरीदी थी। जमीन के दाखिल खारिज के लिए भरत गिरी ने तहसील में आवेदन किया।
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जिस पर दौलतपुर हल्के के चकबंदी लेखपाल सचिन सिंघल की रिपोर्ट लगनी थी। भरत गिरी के मुताबिक सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद सचिन सिंघल ने रिपोर्ट लगाने के लिए 20 हजार रुपए की मांग की।
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इस पर भरत गिरी ने विजिलेंस से संपर्क किया। प्लानिंग के तहत भरत मंगलवार को कलियर के पास बाजूहेड़ी गांव में सहायक चकबंदी अधिकारी दफ्तर में 10 हजार रुपए एडवांस के तौर पर लेकर पहुंचा। जैसे ही सचिन सिंघल ने रकम हाथ में ली, बाहर मौजूद विजिलेंस इंस्पेक्टर जयमल सिंह नेगी, हेमेंद्र सिंह नेगी और उनकी टीम ने उसे पकड़ लिया।

कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद टीम ने उसे साथ लेकर रुड़की स्थित चावमंडी में उसका घर खंगाला। इसके बाद टीम लेखपाल को लेकर देहरादून रवाना हो गई।

दफ्तर के बाहर लगा जमावड़ा
बाजूहेड़ी में विजिलेंस की खबर आसपास के गांव में भी तेजी से फैल गई। विजिलेंस की कार्रवाई के दौरान सहायक चकबंदी अधिकारी के दफ्तर के बाहर घंटों तक ग्रामीणों की भीड़ जमा रही। लेखपाल को दफ्तर से निकालकर गाड़ी में बैठाने के दौरान ग्रामीणों ने मोबाइल से लेखपाल के फोटो भी लिए।

पिछली बार लिए थे 30 हजार
चकबंदी लेखपाल सचिन सिंघल को रंगेहाथ पकड़वाने वाले भरत गिरी की माने तो लेखपाल ने पिछले साल भी दाखिल खारिज के लिए रिपोर्ट लगाने की एवज में 30 हजार रुपये लिए थे। इस बार भी लेखपाल बिना पैसे लिए रिपोर्ट लगाने को तैयार नहीं था।


जागरूक युवक ने दिखाई राह
लेखपाल के रिश्वत मांगने पर भरत गिरी मानसिक रूप से परेशान चल रहा था। उसने यह परेशानी गांव के युवक नीटू गिरी से साझा की। नीटू ने विजिलेंस से पकड़वाने का प्लान भरत को बताया। सरकारी कर्मचारी होने के कारण भरत शुरुआत में टाल मटोल करता रहा, लेकिन नीटू के समझाने पर उन दोनों ने विजिलेंस से संपर्क कर ही लिया।

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