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खाद्य आपूर्ति विभाग: आखिर कहां गया करोड़ों का वाहन भत्ता?

Fri, 25 Nov 2016 10:39 AM IST
महेश्वर प्रसाद सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
महेश्वर प्रसाद सिंह/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 25 Nov 2016 10:39 AM IST
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vehicle rent scam in food supply department

खाद्य आपूर्ति विभाग के तहत राशन के सरकारी दुकानदारों को चीनी के ढ़ुलान के लिए देय करोड़ों का वाहन भत्ता आखिर कहां चला गया?

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आपूर्ति विभाग के 2013 में जारी एक शासनादेश की मानें तो चीनी को सस्ते गल्ले की दुकानों तक पहुंचाने की मद में परिवहन व्यय का भुगतान किया जा रहा है, जबकि दुकानदारों का दावा है कि उन्हें इस मद में कभी फूटी कौड़ी नहीं मिली। इसी शासनादेश के हवाले से जारी पत्र पर गौर करें तो उसमें साफ लिखा है कि इस परिवहन व्यय की प्रतिपूर्ति केंद्र सरकार जून 2013 से पहले तक कर रही थी, यानी इस मद में पैसा तो आया, मगर गया कहां यह लाख टके का सवाल है? इस सवाल का जवाब फिलहाल विभाग के आलाधिकारियों के पास भी नहीं है।
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उत्तराखंड सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के पदाधिकारी पिछले 12 वर्षों से चीनी पर वाहन भत्ते की मांग कर रहे हैं। परिषद के पदाधिकारी इस संबंध में प्रमुख सचिव, आयुक्त, उपायुक्त, जिलापूर्ति अधिकारी आदि अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं। बावजूद राशन डीलरों को सिर्फ आश्वासन मिला। इस संबंध में एक ज्ञापन अमर उजाला को भी मिला।
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अमर उजाला ने जब पड़ताल की तो पता चला कि 28 जून 2013 को तत्कालीन प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी ने एक शासनादेश (27 जून 2013) के हवाले से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को एक पत्र भेजा था। पत्र के अनुसार 2013 में केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को वितरितकी जाने वाली चीनी की खुले बाजार से खरीद की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार को दी थी।

इसी पत्र के सात नंबर कालम में यह लिखा है कि राज्य के उपभोक्ताओं के लिए चीनी को वितरित कर रहे उचित दर विक्रेताओं को वर्तमान में 7.28 रुपये प्रति कुंतल लाभांश तथा गोदाम से उचित दर विक्रेता की दुकान तक परिवहन व्यय का भुगतान दिया जा रहा है, जिसकी प्रतिपूर्ति भारत सरकार द्वारा अभी तक की जा रही थी, भविष्य में इसकी प्रतिपूर्ति भारत सरकार द्वारा न किए जाने के कारण राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। अगर यह सच है तो स्पष्ट है कि राज्य को केंद्र सरकार वर्ष 2013 तक डीलरों को चीनी पर वाहन भत्ता देते आ रही थी।
 
यह तय हुआ था वाहन भत्ता
(01 मार्च 2000 के शासनादेश के अनुसार)
मैदानी क्षेत्र 
0 से 8 किलोमीटर --- 1.57 रुपये
8-20 किलोमीटर --- 3.77 रुपये 
इससे ज्यादा दूरी पर ----4.42 रुपये 
पहाड़ी क्षेत्र : 7.20 रुपये
(भत्ता प्रति किलोमीटर, प्रति क्विंटल) (वर्ष 2000 के बाद राज्य सरकार ने नया शासनादेश भी जारी किया, जिसमें चीनी परिवहन पर वाहन भत्ते का किराया बढ़ाया गया है)

हम 15 साल से चीनी पर वाहन भत्ते की मांग कर रहे हैं। अनेकों बार इस संबंध में प्रमुख सचिव, आयुक्त, जिलापूर्ति अधिकारी को ज्ञापन दिए। हर बार अधिकारियों का कहना होता था कि यह मामला केंद्र सरकार का है। अब पता चला कि केंद्र सरकार तो वाहन भत्ता दे रही थी, लेकिन यह कभी डीलरों को नहीं मिला। और न ही कभी विभाग ने इस संबंध में कभी सूचना दी।

- जितेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष उत्तराखंड सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद

यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। एफसीआई पर हमारा 195 करोड़ रुपये बकाया है। हो सकता है कि इसमें वाहन भत्ता भी शामिल हो, जिसकी वजह से इसका भुगतान नहीं हो पाया हो। हिसाब किताब का काम चल रहा है। अगर ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
- आनंद वर्धन, सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग

केंद्र सरकार की ओर से गेहूं और चावल पर वाहन भत्ता दिया जा रहा है। फिलहाल चीनी और मिट्टी तेल के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए चीनी पर वाहन भत्ता डीलरों को नहीं दिया जाता। हालांकि डीलर काफी समय से इसकी डिमांड कर रहे हैं।
- पीएस पांगती, जिलापूर्ति अधिकारी

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