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मशीन चलाना नहीं जानते, कैसे चेक होगा वाहनों का धुंआ
आशीष डोभाल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 04 Apr 2016 12:00 PM IST
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वाहन प्रदूषण
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उत्तराखंड परिवहन विभाग की ओर से वाहनों का धुआं सड़क पर रि-चेक करने के लिए सभी एआरटीओ को लाखों रुपये की छोटी मशीनें उपलब्ध कराईं। लेकिन ये अफसर मशीन को चलाना ही नहीं जानते। इतना ही नहीं मशीन को बेचने वाली कंपनी ने भी दस दिन बीत जाने के बाद भी डेमो देने को तकनीशियन नहीं भेजे।
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प्रदेश की सड़कों पर रोजाना लाखों की संख्या में व्यावसायिक और निजी दुपहिया और चौपहिया वाहन दौड़ते हैं। जुगाड़ लगाकर वाहन संचालक संबंधित आरटीओ कार्यालय से वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन सड़क पर उसकी प्रमाणिकता की जांच वाहनों का धुआं देखकर आप स्वयं कर सकते हैं।
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लोगों की शिकायत पर परिवहन विभाग ने करीब दो लाख रुपये की कीमत की एक मशीन खरीदकर प्रदेश के सभी एआरटीओ प्रवर्तन दी गई, ताकि वे सड़कों पर वाहनों के धुएं को रिचेक कर सकें। धुआं अधिक होने पर उस पर कार्रवाई की जा सके, लेकिन मशीन के संचालन से अज्ञान अफसर यह अभियान नहीं चला रहे हैं।
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पर्यावरणविद् चिंतित, अफसर लापरवाह
वाहनों से निकलने वाले जहरीले धुएं से प्रदेश की आबोहवा खराब हो रही है। इसको लेकर तमाम पर्यावरणविद् चिंतित हैं, लेकिन अफसर उनकी इस चिंता को नजरअंदाज कर देते हैं। पर्यावरणविद् डॉ. महावीर सिंह मेहता का कहना है कि वाहनों के धुएं से ओजोन परत में लगातार छिद्र हो रहे है। जिससे पर्यावरण में लगातार बदलाव देखने को मिला है।
आपदाओं में इजाफा और ग्लेशियर घट रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार दूनघाटी में अभियान भी चलाया, लेकिन परिवहन और पुलिस अफसरों का सहयोग नहीं मिला। जबकि दिल्ली में पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुये 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक फिर से ऑड इवन नियम लागू होने जा रहा है। लेकिन उत्तराखंड में तमाम संसाधन होने के बाद भी यहां की सरकार और अफसर इस दिशा में कदम उठाने को तैयार नहीं हैं।
मशीन तो मिल गई है, लेकिन मैं खुद दुविधा में हूं कि इसे कैसे चलाऊं? जिस कंपनी ने यह मशीन विभाग को बेची है उसने डेमो के लिए तकनीशियन नहीं भेजे हैं। मशीन को चलाने की जानकारी नहीं होने की वजह से अभियान चलाना मुश्किल है।
- अरविंद पांडे, एआरटीओ प्रवर्तन, देहरादून