वसंत पंचमी 2022: हरिद्वार में श्रद्धालु लगा रहे पावन डुबकी, कोई पाबंदी नहीं, फिर भी कम संख्या में आए लोग
वसंत पंचमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। इस दिन से भारत में वसंत ऋतु का शुभारंभ होता है। इस दिन सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।
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वसंत पंचमी के मौके पर हरिद्वार में हरकी पैड़ी सहित विभिन्न् घाटों पर गंगा स्नान जारी है। स्नान पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन फिर भी शनिवार को बेहद कम संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच रहे हैं। प्रशासनिक व्यवस्था कोविड-19 प्रोटोकोल के अनुसार लागू की गई है।
वसंत पंचमी मां सरस्वती की आराधना का सर्वश्रेष्ठ दिन
हरिद्वार के श्री अवधूत मंडल आश्रम बाबा हीरा दास हनुमान मंदिर के पीठाधीश्वर महंत संतोष आनंद देव ने कहा कि सभी धनों में सर्वश्रेष्ठ विद्या धन है। मां सरस्वती की कृपा और आशीर्वाद से विद्या धन प्राप्त होता है। मां सरस्वती की आराधना के लिए वसंत पंचमी का दिन सर्वश्रेष्ठ दिन है।
मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पुरातन काल से ही ऋषि-मुनि, राजा-महाराजा और आमजन विद्या की प्राप्ति के लिए मां सरस्वती की आराधना करते चले आ रहे हैं। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार वसंत पंचमी को मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस माना जाता है। इस दिन मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा अर्चना करने से मनुष्य के समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मंदिर और शिक्षण संस्थानों में विशेष पूजा
विद्या-बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती पूजा का वसंतोत्सव पर्व पांच फरवरी यानी आज मनाया जा रहा है। शरद ऋतु की समाप्ति के बाद ऋतुराज वसंत के आगमन पर शहर के मंदिरों और शिक्षण संस्थानों के साथ घरों में मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि हिंदू परंपरा में विशेष महत्व रखती है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती का पूजन किया जाता है। बच्चों का विद्यारंभ संस्कार भी इसी दिन किया जाता है। इस दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त होता है इसलिए बिना मुहूर्त के विवाह संपन्न किए जाते हैं। इस बार वसंत पंचमी तीन विशेष योगों की त्रिवेणी में मनाई जा रही है। वसंत पंचमी के दिन सिद्ध, साध्य और रवियोग का संगम है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. आचार्य सुशांत राज ने बताया कि वसंत पंचमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। इस दिन से भारत में वसंत ऋतु का शुभारंभ होता है। इस दिन सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।