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विदेश में भारतीय संस्कृति के बीज बो रही वंदना
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 29 Sep 2014 10:11 AM IST
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उत्तराखंड की वंदना सेमवाल विदेशी बच्चों में संस्कृति के बीज बोने की कोशिश कर रही हैं। उन्हें हर रविवार को स्वाध्य कक्षा के माध्यम से छात्रों को भागवत गीता, वेद, पुराण का पाठ पढ़ाते देखा जा सकता है।
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यूएसए में मांटेसरी स्कूल की चेन
वंदना टेक्सास (यूएसए) में मांटेसरी स्कूल की चेन चला रही हैं। इस वक्त उनके जायस मांटेसरी नाम से दो स्कूल रनिंग हैं, जबकि अन्य की तैयारी अंतिम दौर में है। वंदना 1999 से टेक्सास में हैं। उनके पति महावीर सेमवाल यहां बैंक ऑफ अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट हैं।
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साथ टेक्सास गईं लगभग 35 वर्षीया वंदना को देश की कमी खलती जरूर है, लेकिन भारतीय समुदाय के लोगों के साथ त्योहारों में शिरकत कर वह इसे पूरा कर लेती हैं। मूल रूप से टिहरी की रहने वाली और पांडुरंग अठावले को आदर्श मानने वाली वंदना एकल विद्यालय और बालोद्यान अभियान को भी बल देने का काम कर रही हैं।
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स्कूल खोलने के पीछे मकसद साफ करती हैं। उनके मुताबिक इस वक्त नौकरीपेशा लोगों की सबसे बड़ी दिक्कत छोटे बच्चे हैं। हिंदुस्तान की ही तरह यूएसए में भी लोग बच्चों को लेकर बेहद चिंतित रहते हैं। बात कुछ करने की हुई तो मांटेसरी से हटकर कुछ नहीं लगा।
उन्होंने टेक्सास से ही एकाउंटिंग मुख्य विषय के साथ डायरेक्टोरेट ट्रेनिंग इन चाइल्ड केयर की है। उन्हें बच्चों से प्यार है और अभिभावकों की परेशानी कम करके खुशी भी बहुत मिलती है।
आज रोजगार देने की स्थिति में
वंदना बताती हैं कि उन्हें बहुत अच्छा लगता है जब बच्चे को खुश देख उनके अभिभावक चेहरे पर संतोष का भाव लिए निकलते हैं। मांटेसरी के स्टाफ के रूप में वह कुछ अन्य महिलाओं को रोजगार देने की भी स्थिति में हैं।
बच्चों का मां की तरह ख्याल
वंदना के मांटेसरी में हिंदुस्तानी कम, विदेशी बच्चे ज्यादा हैं। इनकी सब जरूरतों का वह मां की तरह ख्याल रखती हैं। उन्होंने स्टाफ भी बेहद सावधानी से चुना है ताकि नन्हें-मुन्नों को किसी तरह की दिक्कत न हो।