वैली ऑफ वर्ड्स 2020: देहरादून पर संवाद के साथ होगी शुरुआत, 20 से 22 नवंबर तक होंगे 65 सेशन
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वैली ऑफ वर्ल्ड के पहले सत्र की शुरुआत 20 नवंबर को देहरादून पर संवाद के साथ होगी। देहरादून सिटी : इट्स हिस्टोरिक इंपॉर्टेंस विषय पर अजय शर्मा डॉ. समीर सिन्हा के साथ बातचीत करेंगे। इस सत्र की अध्यक्षता लोकेश ओहरी करेंगे।
इसके अलावा पहले दिन द इंडिया नेपाल बाउंड्री क्वेश्चन, प्राचीन मूल्य आधुनिक जीवन, काव्य स्वर, द मोरल एंड द इमोरल एसिस्टेंसलिज्म इन ट्रांसलेशन, मैपिंग द इंडियन स्टेट्स, पोयट्री कैफे, द वैरियंट डोगरास, द नॉर्दन बाउंड्री, द न्यू वर्ल्ड ऑर्डर- ग्रेट गेम टू, पब्लिशिंग प्रेजेंट टेंस और टाइम एंड एटरनिटी जैसे सत्र आयोजित होंगे। इसके अलावा वजाहत हबीबुल्लाह की माई ईयर्स विद राजीव, राज कंवर की डेट लाइन देहरादून, आलोक लाल की बाराबंकी नार्कोस और मुकुल कुमार की कथेरसिस किताब का विमोचन भी होगा।
दूसरे दिन कोविड-19 पर भी होंगे सत्र
पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले चुके कोविड-19 पर भी वैली ऑफ वर्ड्स के दूसरे दिन सत्र आयोजित होंगे। दूसरे दिन की शुरुआत सुहेल सईद खान के सितार कंसर्ट के साथ होगी। इसके बाद टेक्स्ट एंड कॉन्टेक्स्ट पर प्लेनरी सेशन होगा, जिसका मुख्य आकर्षण केरल के राज्यपाल डॉ. आरिफ मोहम्मद खान होंगे। दूसरे दिन ही केंद्रीय विद्यालयों, जवाहर जवाहर नवोदय विद्यालयों और संस्कृत के छात्रों की डिबेट भी होगी। कोविड-19 इंपैक्ट ऑन इकोनॉमिक्स ऑफ स्टेट, रिवर्स माइग्रेशन एंड नीड ऑफ माइक्रो फाइनेंस, कोविड-19 : इम्पेक्ट ऑन पब्लिक हेल्थ एंड सोसाइटी इश्यूज सत्र पूरी तरह महामारी और उसके प्रभावों पर आधारित होंगे।
इसके अलावा सोशल मीडिया, देश-विदेश में हिंदी, यात्रा साहित्य, स्त्री : संघर्ष, सीमा और सृजन और दास्तान ए हिंद, दास्तान ए औरत सत्र हिंदी के भी आयोजित होंगे। सोशल मीडिया दूसरे दिन का विशेष आकर्षण होगा। इसमें डॉ. बालेंदु दाधीच, विजय कुमार मल्होत्रा, शोभा अक्षर, सुधा ओम ढींगरा और अमर उजाला उत्तराखंड के स्टेट हेड संजय अभिज्ञान शामिल होंगे। मुशायरा, गलियों के शहजादे, वेस्ट टू वेल्थ, ऑथर एंड ट्रांसलेटर, फ्रेंच ट्रांसलेशन वर्कशॉप, राजास, नवाब्स एंड फिरंगीस- फ्रेंच इन इंडिया, प्रिंस, पैट्रन एंड पैट्रीअर्च, कैन इंडिया बी सेल्फ रिलायंट इन डिफेंस, कैचिंग दैम यंग- मिलिट्री हिस्ट्री इन स्कूल्स, बॉडी, फैमिली, मेमोरी, कल्चरल नेशनलिज्म इन बंगाल दास्तान समेत अन्य सत्र होंगे।
वैली ऑफ वर्ड्स में होंगे 65 सेशन
कार्यक्रम से जुड़ने के लिए अभी तक 30 हजार से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। वैली ऑफ वर्ड्स साहित्य एवं कला उत्सव के अध्यक्ष संजीव चोपड़ा ने बताया कि उत्सव में देश-विदेश के एक लाख से अधिक साहित्य व कला प्रेमी लोगों को जोड़ने की तैयारी चल रही है। उन्होंने बताया कि तीन दिन में 65 सेशन आयोजित किए जाएंगे।
शहर के एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में डॉ. संजीव चोपड़ा ने बताया कि आयोजन में वजाहत हबीबुल्लाह, बीएस बासवान, नीरज कुमार, आलोक लाल, शुभा शर्मा, आई विशेषज्ञ राजीव मल्होत्रा, जनरल कोसम हिमालय सिंह और छह साल के अयान गोगोई गोहेन गोवा जैसे प्रतिष्ठित लेखकों की पुस्तकों का विमोचन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि समापन भाषण केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक देंगे। साथ ही वे पुरस्कार भी वितरित करेंगे। इसके अलावा वैली ऑफ वर्ड्स बुक अवॉर्ड्स का शुभारंभ पीएफसी चेयरमैन डॉ. आरएस ढिल्लन करेंगे।
डॉ. संजीव चोपड़ा ने कहा कि कोरोना के चलते यह उत्सव वर्चुअल प्लेटफार्म पर आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में करीब एक लाख लोगों के जुड़ने की तैयारी की जा रही है। वहीं, देश के विभिन्न क्षेत्रों के 100 से अधिक संस्थान व विश्वविद्यालय व स्कूल जुड़ेंगे। उन्होंने बताया कि यह वैली ऑफ वर्ड्स का चौथा सीजन है, लेकिन इस बार वर्चुअल उत्सव होने के कारण इसका लाभ अधिक लोग उठा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि पहले उत्सव में लेखक आते थे। आपस में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते थे। किताबें लायी जाती थीं, जिसे साहित्य प्रेमी देखते व पढ़ते थे, लेकिन इस बार वर्चुअल होने के कारण यह सब नहीं हो पायेगा। इस बार कार्यक्रम वर्चुअल होगा और इसे रिकॉर्ड किया जाएगा। ऐसे में इसे बाद भी ऑनलाइन देख जा सकेगा। उन्होंने बताया कि अभी तक लगभग 30 हजार पंजीकरण हो चुके हैं और यह प्रक्रिया लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि उत्सव का उद्घाटन धर्मगुरु दलाई लामा करेंगे। अगर वे स्वयं अपना संदेश नहीं दे पाए तो तिब्बत के प्रधानमंत्री डॉ. लोबसांग सांघे उनके संदेश को पढ़ेंगे। बताया कि वैली ऑफ वर्ड्स के 95 प्रतिशत सत्र वर्चुअल आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि पांच प्रतिशत कार्यक्रम मसूरी में होंगे, जिसमें मसूरी, देहरादून व आसपास के साहित्यकार शामिल होंगे। भारत में फ्रांस के राजदूत एडवर्ट लिनेन मसूरी आएंगे व भारत और फ्रांस के संबंधों पर चर्चा करेंगे। एक सत्र में फ्रांस के आधिपत्य में रहे चुके क्षेत्र, जो आजादी के बाद भारत के आधिपत्य में आसानी से दिए गए थे, पर भी चर्चा होगी। उत्सव में कविता पाठ व पुस्तक पाठ भी होगा। उत्सव में विदेश से भी 10 साहित्यकार जुड़ रहे हैं। भारत के पहले डीलिट डा. पीतांबर बड़थ्वाल के जीवन पर भी चर्चा होगी। वहीं, क्षेत्रीय भाषाओं की पुस्तकें, जिनका अनुवाद अंग्रेजी या हिंदी में हुआ है, सत्र में चर्चा में शामिल की जाएंगी। उन्होंने बताया कि उत्सव में सत्र डिबेट भी होगी।
वैली ऑफ वर्ड्स बुक अवार्ड्स के साथ होगा समापन
वैली ऑफ वर्ड्स बुक अवॉर्ड के साथ आयोजन का समापन होगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक साथ अलग-अलग श्रेणियों में चयनित लेखकों को पुरस्कृत करेंगे। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. आरएस ढिल्लन करेंगे। आरएस टोलिया फोरम की ओर से आयोजित रिव्यू टू पीतांबर दत्त बड़थ्वाल कार्यक्रम मुख्य आकर्षण होगा।
इसके अलावा इंडिया शुड रिकॉग्नाइज तिब्बत एंड ताइवान, वाइल्ड हिमालयाज, द इंडियन मशीन हिस्ट्री एंड फ्यूचर, ए जनरेशन कॉल्ड जेड : अवेयरनेस एंड एक्टिविश्म, द उतराखण्डस् वाइस चांसलर्स राउंड टेबल, आईडेंटिटी, सॉलिडेरिटी एंड कम्युनिटी, पाकिस्तान द गैरिसन स्टेट, स्ट्रैटेजिक ऑप्शन इन द इंडो पेसिफिक, द फ्यूचर : विल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फाइट वार्स, 150 ईयर्स ऑफ यूएसआई - ए रोडमैप फॉर द फ्यूचर, वाइल्ड हार्ट ऑफ इंडिया जैसे सत्र होंगे। इसके अलावा हिंदी में प्रेम की बदलती मुद्राएं, कविता तेरे कितने रूप, हिंदी लेखन में युवा सत्र भी आयोजित होंगे। अंतिम दिन अंतिम दिन छह किताबों का विमोचन भी होगा।