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प्यार नहीं ये है जिस्मों का केमिकल लोचा

Sun, 14 Feb 2016 01:38 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 14 Feb 2016 01:38 PM IST
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valentine day special story.

आपके जेहन में अक्सर यह ख्याल उठता होगा कि ‘प्यार’ किया नहीं जाता, हो जाता है। जी हां, यही सच है।

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शरीर विज्ञान के तथ्य से इसकी पुष्टि करते हैं। किसी को देखकर सहसा ही हार्मोंस तेजी से बनने लगता है और फिर आंखों के रास्ते प्यार दिल में उतर जाता है।

जेनेटिक मेकअप जितना ज्यादा समान होगा, उतनी ही जल्दी एक दूसरे के प्रति आकर्षण बढ़ता है। प्यार के संबंध में सबसे अच्छा ज्ञात शोध न्यू जर्सी के रूटगेर्स विवि की हेलन फिशर का है। प्यार का परवान चढ़ने के कई चरण होते हैं। आईए हम आपको कुछ विस्तार से बताते हैं।

पहला चरण : केमिकल लोचा
सेक्स हार्मोंस टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजेन से प्रेरित हैं। टेस्टोस्टेरोन पुरुषों में और एस्ट्रोजेन हार्मोन महिलाओं में होते हैं। इन्हें सेक्सुअल हार्मोंस भी कहते हैं। प्यार की पहली दहलीज में इन दोनों हार्मोंस का बनना बढ़ जाता है। वे एक-दूसरे का पसंद करने लगते हैं। ऐसे उन्ही मेल फीमेल में होता है, जिनके जेनेटिक मेकअप(जीन) समान या समानता के अधिकतम करीब होते हैं।
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दूसरा चरण : आकर्षण
इनमें सेक्सुअल हार्मोंस के प्रभाव दिखने लगते हैं। ऐसी स्थिति में कई बार प्रेमी के बारे में दिन में सपने देखने जैसी स्थिति हो जाती है। प्रेमी-प्रेमिका एक दूसरे के बारे में सोचने, याद करने और उसके बारे में कल्पनाएं करने में घंटों बीताना पसंद करने लगते हैं। इस स्थिति में हार्ट अट्रेक्शन और फ्लेशिंग बढ़ती है। इस स्टेज में ‘मोनोआमाइंस’ नामक न्यूरो ट्रांसमीटर का एक समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसी स्थिति में ब्रेन में सेरोटोनिन रसायन की सक्रियता बढ़ जाती है। यह प्यार के सबसे महत्वपूर्ण रसायनों में एक है और वास्तव में हमें अस्थायी रूप से ‘प्यार में पागलपन’ की स्थिति तक भेज सकता है।
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तीसरा चरण : विश्वास
वरिष्ठ न्यूरो स्पेशलिस्ट डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता के मुताबिक इस अवस्था में तंत्रिका तंत्र और डोपामीन रसायन की भूमिका अहम होती है। यह हमेशा एक समान स्थिति में नहीं रहता। ऑक्सीटोसिन हार्मोन संबंधों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसके बाद वैसोप्रेसिन रसायन का सेक्रेशन बढ़ जाता है। वैसे तो यह गुर्दों का महत्वपूर्ण नियंत्रक है लेकिन प्रेम संबंधों को और मजबूत बनाने में इसकी भूमिका मानी जाती है।

वैज्ञानिक तथ्य

यदि पुरुष और महिला आंख से आंख मिलाते हैं या परस्पर शारीरिक स्पर्श करते हैं तो दिमाग का एक विशेष प्रकोष्ठ उत्तेजित होता है। इसकी वजह से स्नायुविक क्रिया शुरू हो जाती है। इसमें रक्त प्रभाव की गति बढ़ जाती है। और इस वजह से शरीर में उत्पन्न होने वाले रासायनिक पदार्थ की मात्रा भी बढ़ जाती है।

इसके बाद शरीर की विभिन्न ग्रंथियों से एमफिटामिन, डोपामिन, नोरेपिनिफ्रीन, सेरोटोनिन, वेसोप्रोसिन, फिनाइल एवाइल एमीन आदि रसायन का स्त्राव होता है। यह प्रेमी-प्रेमिका के चेहरे और आंखों में अलग तरह की मुस्कान और चमक लाता है। एंडरफिल रसायन से प्रेमी युगल में शांति, समर्पण और एक-दूसरे के प्रति भरोसे की भावना बढ़ जाती है।


प्रेम की भावना जीन पर निर्भर है। जीन भावनाओं को उभारने में मदद करता है। युवावस्था में हार्मोंस चेंज होते हैं। इससे अपॉजिट सेक्स की ओर आकर्षण होता है। इससे प्रेम की भावना पैदा होती है। इस मौसम में प्यार उमड़ने की एक वजह यह भी है कि दरअसल, सर्दियों में सुस्ती आ जाती है, पर वसंत ऋतु आते ही मौसम अच्छा होने लगता है और सक्रियता भी बढ़ जाती है।
- डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता, वरिष्ठ न्यूरो स्पेशलिस्ट, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज

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