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Uttarkashi Avalanche: बेस कैंप से मातली हेलीपैड लाया गया एक शव, दो पर्वतारोहियों की तलाश जारी

Fri, 14 Oct 2022 09:16 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 14 Oct 2022 09:16 PM IST
सार

बीते चार अक्तूबर को डोकराणी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में हिमस्खलन होने से 29 पर्वतारोही लापता हो गए थे। यहां निम की ओर से पर्वतारोहण का एडवांस कोर्स संचालित हो रहा था।

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Uttarkashi Avalanche dead bodies rescue All update Today
रेस्क्यू - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

हिमस्खलन हादसे में लापता 27 पर्वतारोहियों के शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं जबकि दो अब भी लापता चल रहे हैं। जिनकी तलाश में रेस्क्यू अभियान जारी है। हादसे में 29 पर्वतारोही लापता हो गए थे। 

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बीते चार अक्तूबर को डोकराणी बामक ग्लेशियर क्षेत्र में हिमस्खलन होने से 29 पर्वतारोही लापता हो गए थे। यहां निम की ओर से पर्वतारोहण का एडवांस कोर्स संचालित हो रहा था। पर्वतारोही एवलांच के साथ करीब 50 फीट गहरे क्रेवास में गिर गए थे। घटना के दिन ही फर्स्ट रिस्पांडर ने चार शवों को बरामद किया था। छह अक्तूबर से घटना स्थल पर हाई एल्टीट्यूड वार फेयर स्कूल गुलमर्ग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, निम व सेना ने रेस्क्यू शुुुरू किया था। 
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शुक्रवार को सेना के हेलीकाप्टर से एक और शव मातली हेलीपैड भेजा गया। शव की पहचान सौरभ विश्वास निवासी पश्चिम बंगाल के रूप में हुई है। अब विनय पंवार व ले. कर्नल दीपक वशिष्ठ लापता चल रहे हैं। विनय पंवार नौसेना में पैटी ऑफीसर व ले. कर्नल दीपक वशिष्ठ सेना में त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं। इनकी तलाश में रेस्क्यू अभियान जारी है। अब तक 27 शव बरामद हो चुके हैं। 
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इकलौता बेटा था सौरभ 
शुक्रवार को पर्वतारोही सौरभ विश्वास का शव मातली हेलीपैड लाया गया। शव के साथ यहां पहुंचे सौरभ के दोस्त ने बताया कि वह आईटी कंपनी में जॉब करता था। सौरभ अपने माता पिता का इकलौता बेटा था। सौरभ की एक छोटी बहन है। 

अब तो आंसू भी सूख गए
10 दिनों से मातली हेलीपैड पर अपने भाई का इंतजार कर रहे दीपक पंवार ने कहा कि अब तो आंसू भी सूख गए हैं। 10 दिनों से हर हेलीकाप्टर पर उम्मीद भरी निगाह से देखता हूं लेकिन हर बार मायूसी ही हाथ लगती है। दीपक ने कहा कि निम हर बार आश्वासन दे रहा है। घर में बेटे को याद कर मां बार-बार बेहोश हो रही है। नेवी में कार्यरत विनय पंवार अभी भी लापता है। 

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