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उत्तराखंड कर्मकार बोर्ड: नेताओं के अहम की लड़ाई में पिछले पिछले एक साल से पिस रहे पांच लाख श्रमिक
Fri, 01 Oct 2021 12:58 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 01 Oct 2021 12:58 PM IST
सार
कर्मकार बोर्ड में पहले अध्यक्ष श्रम मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत और सचिव दमयंती रावत थे। पूर्ववर्ती त्रिवेंद्र सरकार ने पहले दमयंती को हटाया और फिर बोर्ड भंग कर हरक सिंह रावत को भी अध्यक्ष पद से हटा दिया। उनकी जगह शमशेर सिंह सत्याल को अध्यक्ष बना दिया गया था। इससे हरक अंदरखाने बहुत नाराज हुए।v
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श्रम मंत्री हरक सिंह रावत
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत करीब पांच लाख श्रमिक पिछले एक साल से नेताओं के अहम की लड़ाई में पिस रहे हैं। अब सरकार ने यहां अप्रत्यक्ष तौर पर राजनीतिक हस्तक्षेप खत्म करते हुए दो अधिकारियों को जिम्मेदारी दे दी है। जिसके बाद दोनों अधिकारी व्यवस्थाएं सुधारने में जुट गए हैं।
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दरअसल, कर्मकार बोर्ड में पहले अध्यक्ष श्रम मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत और सचिव दमयंती रावत थे। पूर्ववर्ती त्रिवेंद्र सरकार ने पहले दमयंती को हटाया और फिर बोर्ड भंग कर हरक सिंह रावत को भी अध्यक्ष पद से हटा दिया। उनकी जगह शमशेर सिंह सत्याल को अध्यक्ष बना दिया गया था। इससे हरक अंदरखाने बहुत नाराज हुए। उधर, नए अध्यक्ष सत्याल ने भी बोर्ड के विशेष ऑडिट से लेकर 40 कर्मचारियों को हटाने के फैसले लिए।
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अप्रत्यक्ष रूप से त्रिवेंद्र रावत और हरक सिंह रावत के अहम की इस लड़ाई में शमशेर सत्याल भी हिस्सा बन गए। कई विवादों के चलते धीरे-धीरे बोर्ड का कामकाज ठप होता चला गया। यहां सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहीं दीप्ति सिंह को भी हटा दिया गया। श्रमिकों के बच्चों को स्कॉलरशिप से लेकर उनके हितों की कई योजना बुरी तरह प्रभावित हुईं। पिछले दिनों तो बोर्ड में हालात यह हो गए थे कि सचिव और अध्यक्ष के अलावा कोई कर्मचारी ही काम करने वाला नहीं था। स्पेशल ऑडिट से अटकी बोर्ड की योजनाओं की गाड़ी को कर्मचारियों की कमी ने लगभग ब्रेक लगा दिया।
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अधिकारी व्यवस्था बनाने में जुटे
सरकार ने अब श्रम सचिव को बोर्ड का पदेन अध्यक्ष और पीसीएस अफसर अभिषेक त्रिपाठी को बोर्ड का सचिव बनाया है। सचिव त्रिपाठी ने बुधवार को ही कार्यभार ग्रहण कर लिया। बृहस्पतिवार को वह बोर्ड के दफ्तर पहुंचे। उन्होंने सभी व्यवस्थाएं देखीं। कर्मचारियों की कमी भी सामने आई। अब नए अध्यक्ष और सचिव बोर्ड की व्यवस्था सुधार में लग गए हैं, ताकि श्रमिकों को योजनाओं का लाभ मिल सके।
यह योजनाएं हो रहीं थीं प्रभावित
पेंशन योजना, आवास सहायता योजना, दुर्घटना सहायता योजना, स्वास्थ्य बीमा योजना, टूल किट योजना, विवाहोपरांत योजना, साइकिल सहायता योजना, सैनेट्री नैपकिन योजना, बारिश या धूप छाता योजना, छात्रवृत्ति योजना आदि।
श्रम मंत्री हरक सिंह रावत फिर नाराज
मसूरी में आयोजित हुए कार्यक्रम में बयान पर आई भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया के बाद अब श्रम मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत अंदरखाने कर्मकार बोर्ड को लेकर जारी हुए आदेश से भी नाराज बताए जा रहे हैं। फिलहाल उन्होंने चुप्पी साधी हुई है लेकिन पार्टी फोरम पर अपनी आपत्ति जता दी है। सूत्रों के मुताबिक, कर्मकार बोर्ड में बुधवार को हुए बदलाव की खबर सुनने के बाद श्रम मंत्री नाराज हो गए। उनका विरोध इस बात पर है कि कर्मकार बोर्ड से अध्यक्ष के साथ ही सचिव मधु नेगी चौहान की भी विदाई हो गई।
सचिव को उन्हें भरोसे में लिए बिना ही बदल दिया गया। इससे पहले वह मसूरी में बयान पर भाजपा नेताओं के जवाब को लेकर भी नाराज चल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, हरक ने यह दोनों मुद्दे पार्टी फोरम पर उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि सचिव को अभी कुछ ही महीने हुए थे जो बेहतर काम कर रही थीं। उन्हें बताए बिना उनके विभाग से जुड़े बोर्ड से सचिव को हटाना उचित नहीं है। इस मामले में जब अमर उजाला ने उनसे बात करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
शाह से गुफ्तगू के बाद परवान चढ़ा बदलाव
कर्मकार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सत्याल से जुबानी जंग के बाद से ही हरक लगातार उन्हें हटाने का दबाव बना रहे थे। पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत के बाद उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी बातचीत की थी। बावजूद इसके सत्याल को नहीं हटाया गया। सूत्रों के मुताबिक, पिछले सप्ताह जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हरक ने मुलाकात की तो उन्होंने यह मामला भी उनके सामने रखा। शाह से बातचीत के बाद ही सत्याल के हटने की राह आसान हुई।
कर्मकार बोर्ड से हटाए जाने के बाद सत्याल ने साधी चुप्पी
कर्मकार बोर्ड से हटाए जाने के बाद से शमशेर सिंह सत्याल ने गहरी चुप्पी साध ली है। उनके मोबाइल स्विच ऑफ हैं। मीडिया से दूरी बना ली है। उनके सामने आने के बाद ही इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया स्पष्ट हो पाएगी।
शमशेर सत्याल के कर्मकार बोर्ड में अध्यक्ष का पद संभालने के बाद से ही विवाद तेज हो गए थे। पहले स्पेशल ऑडिट हुआ, जिसमें कई तथ्य सामने आए। इसके बाद साइकिल आवंटन को लेकर उन्होंने गड़बड़ी की बात कही। इसके बाद उन्होंने ईएसआई अस्पताल के लिए जारी हुए 20 करोड़ रुपये वापस लिए। वह लगातार मीडिया के सामने यह बात स्वीकार करते रहे कि पूर्व बोर्ड के कार्यकाल में काफी अनियमितताएं हुई हैं। पार्टी फोरम हो या सरकार, सभी जगह लगातार सत्याल लिखित पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग करते रहे। बुधवार की शाम सरकार ने उन्हें अध्यक्ष पद से हटाया। इसके बाद से ही सत्याल का मोबाइल नंबर लगातार बंद है।
सरकार ने माना, नहीं हुआ बोर्ड में भ्रष्टाचार
कर्मकार बोर्ड से 20 करोड़ की रकम ईएसआई अस्पताल के लिए जारी होने के मामले में हाईकोर्ट में एक याचिका दायर हुई थी। बीते दिनों हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई की। सरकार ने हाईकोर्ट के सामने माना कि बोर्ड में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ। मामले में सरकार ने जांच रिपोर्ट, कोर्ट के समक्ष पेश की। इसमें सरकार ने कहा कि बोर्ड की लापरवाही की वजह से यह रकम किसी दूसरी कंपनी को दे दी गई थी, जो कि वापस आ चुकी है। कोई गबन नहीं हुआ। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अब इस मामले में दस नवंबर को सुनवाई होगी।