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उत्तराखंड में जंगल संवारने के लिए आगे आई महिलाएं
प्रमोद सेमवाल/ अमर उजाला, गोपेश्वर
Updated Wed, 02 Mar 2016 02:51 PM IST
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गोपेश्वर की सुंदरता के प्रतीक बंज्याणी जंगल को संवारने के लिए गोपेश्वर गांव की महिलाएं आगे आई हैं। गांव की करीब 60 महिलाओं ने जंगल के वनीकरण के लिए श्रमदान शुरू कर दिया है।
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नगर से करीब आधा किमी दूर स्थित बंज्याणी जंगल में संरक्षित प्रजाति के बांज के पेड़ मौजूद हैं, लेकिन संरक्षण नहीं होने और अवैध पातन के चलते जंगल का दायरा साल दर साल घट रहा है। जिला मुख्यालय के पास होने के बावजूद वन विभाग इस जंगल का संरक्षण नहीं कर पा रहा है। अब जंगल को बचाने के लिए मातृशक्ति आगे आई है।
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महिला नव जागरण समिति से जुड़ी गोपेश्वर गांव की महिलाओं ने श्रमदान कर जंगल को फिर से हराभरा करने का संकल्प लिया है। स्थानीय महिला सुशीला सेमवाल, पुष्पा पासवान, रुक्मणी देवी, कुंती, पुष्पा, मधुली, सरोजनी, सतेश्वरी, वर्षा, आशा, मधु, नमिता, प्रेमा, मीना, कुंती, मंजू और सावित्री देवी का कहना है कि बंज्याणी जंगल के संरक्षण के लिए महिलाएं एकजुट हुई हैं।
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जंगल में हरे पेड़ काटे जा रहे हैं, जिससे यह जंगल लगातार सिमट रहा है। महिलाओं ने जंगल के चारों ओर से चहारदीवारी करने का निर्णय लिया है। इससे वन्य जीव भी आबादी और खेतों तक नहीं पहुंच सकेंगे।
बंज्याणी जंगल की देन है वैतरणी प्राकृतिक जल स्रोत
बंज्याणी जंगल के ठीक नीचे वैतरणी प्राकृतिक जल स्रोत है, जहां साल भर पानी उपलब्ध रहता है। गोपीनाथ मंदिर में शिव के जलाभिषेक के लिए यहीं से पानी की आपूर्ति की जाती है। महिलाओं का कहना है कि बंज्याणी जंगल का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में वैतरणी जल स्रोत भी सूखने के कगार पर आ जाएगा।