हार गए जंग, यूपी से 12 पीसीएस आएंगे उत्तराखंड
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15 वर्ष लंबी कानूनी जंग हारने के बाद यूपी से 12 पीसीएस अफसरों का उत्तराखंड आना लगभग तय हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद केंद्र सरकार ने इन अफसरों के यूपी से कार्यमुक्त होकर उत्तराखंड में ज्वाइनिंग देने का आदेश जारी किया है।
अभी इतने ही अफसरों के उत्तराखंड आने का आदेश होना बाकी है। हालांकि यूपी अब भी इन अफसरों को उत्तराखंड भेजने को तैयार नहीं है। इसके लिए यूपी ने उत्तराखंड से इस आधार पर एनओसी ली है कि इन अफसरों को रोकने के लिए एक नीति बनाकर केंद्र से अनुमति ले ली जाएगी। लेकिन वर्तमान में केंद्र का आदेश स्टैंड कर रहा है।
राज्य के गठन के समय तमाम श्रेणी के अफसरों को यूपी पुनर्गठन अधिनियम 2000 के तहत उत्तराखंड आवंटित हुआ था। इनमें 45 पीसीएस अफसर ऐसे थे जिन्होंने उत्तराखंड आने से बचने के लिए कैट, हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी। लेकिन अंतिम फैसला इन अफसरों के खिलाफ आया।
अफसरों को रोकने में जुटा उत्तर प्रदेश
सर्वोच्च न्यायालय ने फरवरी माह में अपने फैसला में किया था कि इन अधिकारियों को उत्तराखंड जाना होगा। लेकिन फिर भी यूपी ने अफसरों को कार्यमुक्त नहीं किया। इसी के मद्देनजर केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने यूपी व उत्तराखंड के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर केंद्र केअंतिम फैसले से अवगत कराया।
वैसे तो ऐसे अफसरों की संख्या 24 के आसपास हैं लेकिन फिलहाल केंद्र ने 12 अफसरों को यूपी से कार्यमुक्त होकर उत्तराखंड आने की अधिसूचना जारी कर दी है। उम्मीद है कि ये अफसर जल्द ही उत्तराखंड में ज्वाइनिंग देंगे।
केंद्र ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जो अफसर 09 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश या उत्तराखंड में नौकरी कर रहे थे और उन्हें पुनर्गठन अधिनियम के तहत उत्तराखंड आवंटित हुआ है, वे उत्तराखंड के आवंटी माने जाएंगे।
जानिए, इन पीसीएस अफसरों को आना होगा उत्तराखंड
उदयराज सिंह
हरिकृष्ण त्रिपाठी
देवकृष्ण तिवारी
प्रदीप कुमार श्रीवास्तव
सीताराम गुप्ता
रामशंकर पांडेय
आनंद स्वरूप
तुलसीराम
राजेंद्र प्रसाद यादव
कुसुम शर्मा
दिनकर प्रकाश दूबे
रामविलास यादव
इनका है कहना
डीओपीटी ने आदेश जारी किया है। लेकिन यूपी ने इन सभी पीसीएस अफसरों को वहीं रखने के लिए अनापत्ति मांगी थी। ताकि एक नीति तैयार कर केंद्र से मंजूरी ली जा सके। उत्तराखंड ने एनओसी दे दी है। साथ यह भी कहा गया है कि ऐसे पीसीएस अफसर जो कि उत्तराखंड को आवंटित हुए थे और उन्होंने यहां ज्वाइन नहीं किया, उनकी पेंशन का भार यूपी के जिम्मे ही रहेगा।
-राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव कार्मिक विभाग